Naxal Surrender: पुष्पा ने किया सरेंडर, SLR-कारतूस कमिश्नर को सौंपे, जानिए कैसे‌ 10 वर्ष की उम्र से बनी नक्सली

Naxal Surrender: 20 वर्षों से वांछित शीर्ष माओवादी नेता शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा ने कोलकाता में आत्मसमर्पण कर SLR और 46 कारतूस सौंपे, मुख्यधारा में लौटने की अपील की।

Newstrack Network
Published on: 18 Jun 2026 10:50 PM IST (Updated on: 18 Jun 2026 10:51 PM IST)
Pushpa surrenders, hands over SLR-cartridge to commissioner, learn how Naxalite became
X

पुष्पा ने किया सरेंडर, SLR-कारतूस कमिश्नर को सौंपे, जानिए कैसे‌ 10 वर्ष की उम्र से बनी नक्सली

(Photo- Newstrack)

Naxal Surrender: नक्सल विरोधी अभियान के तहत विभिन्न राज्यों की संयुक्त टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, केरल और ओडिशा तक सक्रिय टाॅप माओवादी नेता शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा ने कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया। पुष्पा ने एक सेल्फ लोडिंग राइफल (SLR) और उसकी 46 गोलियां कमिश्नर को सौंप दीं। पुष्पा ने राष्ट्र की मुख्यधारा के साथ चलने की बात कही है।

'शीर्ष माओवादी नेता शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा नक्सल नेटवर्क का प्रमुख चेहरा थी। उसके सिर पर 10 लाख का इनाम था। 20 वर्षों से सुरक्षा बल उसकी तलाश में जंगल-पहाड़ों की खाक छानते रहे हैं।' - Dhanish Srivastava

सांसद हत्याकांड में आया था नाम, 20 वर्ष से तलाश

दो दशकों से पुलिस की संयुक्त टीमें पुष्पा की तलाश में थीं। 4 मार्च 2007 को झामुमो के तत्कालीन सांसद सुनील महतो की पूर्वी सिंहभूम जिले में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। उनके अलावा चार अन्य को मौत के घाट उतार दिया गया था। हथियार लूट लिए गए थे। सांसद सुनील महतो की हत्या में नक्सली राहुल उर्फ रंजीत पाल और असीम मंडल दस्ते की संलिप्तता जांच में सामने आयी थी। बताया जाता है कि शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा असीम मंडल के दस्ते की कमांडर थी। इस घटना में उसका नाम आया था।

लैंडमाइन विस्फोट, जघन्य वारदातें, जंगलों में था ठिकाना

36 वर्ष की शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा की क्राइम कुंडली उसकी उम्र से ज्यादा लंबी बताई जाती है। बुरूडीह (घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड) में 30 अगस्त 2008 को लैंडमाइन विस्फोट हुआ था। इस माओवादी हमले में झारखंड पुलिस के 11 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। ये दस्ता नक्सल विरोधी छापेमारी के बाद वापस लौट रहा था। इस दुखद राष्ट्र विरोधी कृत्य के अलावा हत्या, जबरन उगाही और देशद्रोह संबंधी कई मामलों में पुष्पा का नाम सामने आता रहा था। सुरक्षा एजेंसियां सरगर्मी से उसकी तलाश कर रही थीं। इसी जून 2026 में संयुक्त सुरक्षा बलों के बड़े नक्सल विरोधी अभियान के दौरान झारखंड के सारंडा जंगल से पुष्पा सुरक्षा बलों को चकमा देकर भाग निकली थी।

10 वर्ष की उम्र से लाल सलाम! बनी कुख्यात नक्सली!

शकुंतला महतो पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी थाना क्षेत्र के मेचुआ गांव की रहने वाली है। उसके गांव वाले पूर्व में मीडिया को दिए बयान में बताते हैं कि 'बचपन में वो शांत स्वभाव की थी, स्कूल जाती थी, लेकिन पढ़ाई से ज्यादा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थी। उस वक्त गांव के आसपास नक्सल विचारों का प्रचार-प्रसार जोरों पर था।‌ पर्चियां बांटी जाती थीं, नुक्कड़ नाटक होते थे। पांचवीं कक्षा में दाखिला लेने के बावजूद उसने आगे की पढ़ाई नहीं की और नक्सली संगठन में गीत-संगीत के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगी। महज 10 वर्ष की आयु में माओवादी संगठन में शामिल हो गई। वहां वो वर्षा और पुष्पा जैसे कई नामों से जानी गई, जबकि अपने गांव के आसपास उसे 'लुटुन' नाम से भी पहचाना जाता था। नक्सली आंदोलनों के लिए उसे झारखंड की पारसनाथ पहाड़ियों में भेज दिया गया था।'

जंगल में ही अपने एरिया कमांडर से कर ली शादी

साल 2003 में झारग्राम में सक्रिय माओवादी दस्ते के दौरान उसकी मुलाकात एरिया कमांडर अतुल महतो से हुई। वर्ष 2004 में सीपीआई (माओवादी) का गठन हुआ और 2005 में झारखंड के तामार जंगल में दोनों ने विवाह कर लिया। इसके बाद नक्सली संगठन ने उसे बेलपहाड़ी, दलमा, घाटशिला, गोटाशिला, पारसनाथ पहाड़, बुंडू-तामार, सारंडा सहित कई इलाकों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपीं। वाम शासन के दौरान पुष्पा ने झारग्राम के लालगढ़ आंदोलन में कुख्यात माओवादी नेता किशनजी के साथ भी काम किया। वर्ष 2012 के बाद सीपीआई (माओवादी) की बंगाल इकाई झारखंड चली गई, लेकिन वहां भी सुरक्षा बलों के दबाव में उसका नेटवर्क कमजोर पड़ता गया।

ताबड़तोड़ अभियानों से टूटा नेटवर्क, सरेंडर के बाद ये बोली पुष्पा:

केंद्र सरकार द्वारा देश से माओवादी और नक्सली गतिविधियों के सफाए के लिए चलाए गए व्यापक अभियान के दौरान कई उग्रवादी मारे गए, गिरफ्तार हुए या उन्होंने आत्मसमर्पण किया। लंबे समय तक जंगलों में सक्रिय रहने के बाद शकुंतला महतो की भी हिम्मत जवाब दे गई और उसने कोलकाता पुलिस कमिश्नर के सामने सरेंडर कर दिया। मीडिया को दिए बयान में पुष्पा ने कहा 'मैं समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहती हूं। अब सशस्त्र आंदोलन का कोई भविष्य नहीं रह गया है। मैं भटके हुए साथियों से अपील करती हूं कि वे भी हिंसा छोड़ विकास की मुख्यधारा में लौट आएं।'

पुष्पा ने वर्तमान शुभेंदु सरकार की पुनर्वास नीति पर भरोसा जताया है। उसके सरेंडर के बाद पुलिस ने अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story