Instagram पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट के विज्ञापन! Meta India के MD और हेड को NCPCR ने किया तलब

NCPCR ने Instagram पर Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों के मामले में Meta India के MD और Head को 9 सितंबर को तलब किया है।

Sachin Singh
Published on: 8 Sept 2026 9:40 PM IST (Updated on: 8 Sept 2026 9:42 PM IST)
Instagram पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट के विज्ञापन! Meta India के MD और हेड को NCPCR ने किया तलब
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Meta India: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट के कथित प्रचार को लेकर Meta की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी NCPCR ने Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड को 9 सितंबर को आयोग के सामने पेश होने के लिए तलब किया है। दोनों अधिकारियों से मामले से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी और आरोपों पर कंपनी का पक्ष जानने की कोशिश की जाएगी।

यह मामला Child Sexual Exploitation and Abuse Material यानी CSEAM से जुड़े कथित विज्ञापनों को लेकर है। NCPCR ने इस मामले में मीडिया रिपोर्ट के आधार पर खुद संज्ञान लिया था। इसके बाद आयोग ने Meta Platforms Inc. को नोटिस जारी कर पूरे मामले पर जवाब मांगा था।

BBC Eye की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई कार्रवाई

NCPCR ने BBC Eye की एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई 2026 को Meta Platforms Inc. को नोटिस जारी किया था। आयोग ने कंपनी से इंस्टाग्राम पर ऐसे कथित विज्ञापनों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। Meta ने नोटिस मिलने के करीब एक सप्ताह बाद NCPCR को अपना जवाब भेजा। आयोग ने कंपनी के जवाब की समीक्षा की। इसके बाद NCPCR ने मामले की औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया, ताकि आरोपों से जुड़े तथ्यों और पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट की जा सके। अब इसी जांच के अगले चरण में Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड को 9 सितंबर को आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा गया है।

BBC की जांच में क्या आरोप लगाए गए?

BBC Eye की जांच में आरोप लगाया गया था कि भारत में Instagram पर ऐसे पेड विज्ञापन चलाए जा रहे थे, जो बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बढ़ावा दे रहे थे। BBC World Service की ओर से देखे गए कुछ कथित विज्ञापनों में 'rape video' और 'child video' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को मैसेजिंग ऐप Telegram के कुछ चैनलों तक पहुंचाया जाता था, जहां ऐसे कथित कंटेंट को पैसे लेकर उपलब्ध कराने का आरोप था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ऐसे कंटेंट को बेहद कम कीमत पर भी बेचने की पेशकश की जा रही थी।

विज्ञापन Instagram पर कैसे पहुंचा, इस पर भी सवाल

इस मामले में Instagram की विज्ञापन मॉडरेशन व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, Instagram पर विज्ञापन प्रकाशित होने से पहले प्लेटफॉर्म की मॉडरेशन तकनीक उन्हें मंजूरी देती है। BBC की ओर से जब ऐसे ही एक विज्ञापन की जानकारी Instagram को दी गई तो कथित तौर पर प्लेटफॉर्म की ओर से अगले दिन जवाब आया। रिपोर्ट के अनुसार, Instagram ने उस पोस्ट को अपनी 'community guidelines' का उल्लंघन नहीं माना था। यही वजह है कि NCPCR की जांच में यह भी देखा जाएगा कि आरोपों से जुड़ा कंटेंट प्लेटफॉर्म की व्यवस्था से होकर कैसे गुजरा और Meta की ओर से मामले को लेकर दिए गए जवाब में क्या स्थिति बताई गई है।

NCPCR अब किन बातों की जांच करेगा?

NCPCR की औपचारिक जांच का मुख्य उद्देश्य आरोपों से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को सामने लाना है। आयोग Meta के जवाब की भी जांच करेगा और यह समझने की कोशिश करेगा कि कंपनी ने लगाए गए आरोपों पर क्या कदम उठाए और उसका पक्ष क्या है। Meta India के अधिकारियों की पेशी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग उनसे मामले से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांग सकता है।

NHRC ने भी दिल्ली पुलिस को जांच के निर्देश दिए

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC भी अलग से कार्रवाई कर चुका है। NHRC ने दिल्ली पुलिस को Instagram पर पेड विज्ञापनों के जरिए कथित तौर पर Child Sexual Abuse Material यानी CSAM के प्रचार के आरोपों की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है।

NHRC ने पुलिस से यह भी जांचने को कहा है कि Meta और मामले से जुड़े अन्य पक्षों ने Protection of Children from Sexual Offences यानी POCSO Act के तहत अपनी अनिवार्य रिपोर्टिंग जिम्मेदारियों का पालन किया या नहीं।

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