NDA Two-Thirds Majority: लोकसभा में पलट गया पूरा गेम! टूट के बाद INDIA अलायंस पस्त, क्या एनडीए के पास अब दो-तिहाई बहुमत?

NDA Two-Thirds Majority: टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में बगावत, डीएमके के अलग होने और विपक्षी सांसदों की संख्या घटने से एनडीए की ताकत बढ़ी है। लोकसभा और राज्यसभा में गठबंधन अब दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंचता नजर आ रहा है।

Shivam Shrivastava
Published on: 17 Jun 2026 5:24 PM IST (Updated on: 17 Jun 2026 5:25 PM IST)
NDA Two-Thirds Majority: लोकसभा में पलट गया पूरा गेम! टूट के बाद INDIA अलायंस पस्त, क्या एनडीए के पास अब दो-तिहाई बहुमत?
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NDA Two-Thirds Majority: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद से देश की सियासत में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। राजनीतिक गलियारों में, खासकर कोलकाता से लेकर मुंबई और दिल्ली तक सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। एक तरफ जहां बंगाल में ममता बनर्जी को तगड़ा झटका लगा है और उनके 20 सांसद बागी हो गए हैं।

वहीं महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे गुट के साथ जाने का पूरा मन बना लिया है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के भीतर हुई इस बड़ी टूट ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को एक नई ताकत दे दी है। साल 2024 के आम चुनावों के बाद जिस एनडीए को पहले के मुकाबले कमजोर आंका जा रहा था, वह आज के वक्त में एक बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।

विपक्ष के कुनबे में भारी सेंधमारी

अगर हम 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों की बात करें, तो उस वक्त इंडिया गठबंधन ने एक मजबूत ताकत के रूप में खुद को पेश किया था। तब कांग्रेस 99, समाजवादी पार्टी 37, टीएमसी 28 और डीएमके 22 सीटों के साथ मजबूत स्थिति में थे। इसके अलावा शिवसेना (यूबीटी) ने 9, शरद पवार गुट वाली एनसीपी ने 8, आरजेडी ने 4 और सीपीएम व जेएमएम ने तीन-तीन सीटों पर कब्जा जमाया था। लेकिन ठीक दो साल बाद आज पूरी तस्वीर बदल चुकी है और लोकसभा में विपक्षी सांसदों का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है।

बागी हुए 20 सांसदों के जाने के बाद टीएमसी के पास अब महज 8 सांसद ही बचे हैं। कुछ ऐसा ही हाल उद्धव ठाकरे की शिवसेना का है, जहां अब केवल 3 सांसद रह गए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि विपक्ष ने अपने 26 सांसद सीधे तौर पर गंवा दिए हैं।

डीएमके की राहें भी हुईं अलग

दक्षिण भारत की राजनीति में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके और कांग्रेस की पुरानी दोस्ती टूट गई है और डीएमके ने खुद को इंडिया गठबंधन से पूरी तरह अलग कर लिया है। एमके स्टालिन के सुर अब राहुल गांधी के प्रति पहले जैसे नहीं रहे। डीएमके के इस कदम से इंडिया गठबंधन को 22 सांसदों का एक और भारी नुकसान उठाना पड़ा है। टीएमसी, शिवसेना और डीएमके के इन तमाम सांसदों के छिटकने के बाद अब इंडिया गठबंधन का कुनबा सिमट कर करीब 187 सांसदों तक ही रह गया है।

लोकसभा में मौजूदा दलीय स्थिति

अगर हम मौजूदा वक्त में इंडिया गठबंधन के घटक दलों की ताकत पर नजर डालें, तो असम के नौगांव से प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के पास अब 98 सांसद बचे हैं। इसके अलावा गठबंधन में समाजवादी पार्टी के 37, एनसीपी के 8, टीएमसी के 8 और आरजेडी व सीपीएम के चार-चार सांसद शामिल हैं। वहीं शिवसेना (यूबीटी), आईयूएमएल और जेएमएम के पास तीन-तीन सांसद हैं। इनके अलावा सीपीआई, नेशनल कॉन्फ्रेंस और वीसीके के पास दो-दो तथा एमडीएमके, केसीएम और आरएसपी के पास एक-एक सांसद हैं, जबकि अन्य छोटे सहयोगियों की संख्या सात है।

दूसरी तरफ कई दल ऐसे भी हैं जो न तो इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं और न ही एनडीए का। इनमें 22 सांसदों वाली डीएमके के अलावा आम आदमी पार्टी के 3 और वाईएसआरसीपी के 4 सांसद शामिल हैं। इसके साथ ही एआईएमआईएम, बीजेडी, जेडपीएम, एचएलपी और वीओटीपीपी के पास एक-एक सांसद हैं जो फिलहाल तटस्थ भूमिका में बने हुए हैं।

दो-तिहाई बहुमत की दहलीज पर एनडीए

किसी भी बड़े संविधान संशोधन बिल को संसद से पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत का होना बहुत जरूरी होता है। आपको याद होगा कि इसी साल अप्रैल में 131वां संविधान संशोधन विधेयक यानी परिसीमन विधेयक लोकसभा में इसलिए गिर गया था क्योंकि सरकार इसे पास कराने के लिए जरूरी आंकड़ा नहीं जुटा पाई थी।

उस वक्त बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े थे, जिनमें 293 एनडीए के और 5 अन्य दलों के वोट थे। फिलहाल शिलांग, नौगांव और बशीरहाट की सीटें खाली होने की वजह से 543 सदस्यों वाली लोकसभा की प्रभावी संख्या 540 रह गई है। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत साबित करने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

बहुमत का बदलता गणित

इस वक्त एनडीए के पास अपने 293 सांसद हैं। लेकिन टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने एनसीपीआई में विलय करके एनडीए को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है, जिससे यह आंकड़ा 313 तक पहुंच जाता है। इसमें अगर उद्धव गुट के 6 सांसदों को भी जोड़ लिया जाए, तो एनडीए के पास 319 का मजबूत बल हो जाएगा।

इसके अलावा राजनीतिक पंडितों का मानना है कि तमिलनाडु के सियासी समीकरणों को देखते हुए अगर डीएमके के 22 सांसद भी एनडीए को किसी मुद्दे पर अपना समर्थन दे देते हैं, तो यह संख्या 341 तक जा पहुंचेगी। अप्रैल की वोटिंग में मिले 5 अतिरिक्त वोटों को भी अगर साथ रख लिया जाए, तो एनडीए 346 के जादुई आंकड़े को छू सकता है, जो दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ 14 कदम दूर है।

राज्यसभा में क्या है समीकरण?

लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब खड़ा नजर आ रहा है। उच्च सदन में वर्तमान में कुल 242 सांसद हैं, जहां साधारण बहुमत के लिए 122 और दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 वोटों की दरकार होती है। एनडीए के पास यहां 148 सांसद मौजूद हैं, जो उसे बेहद मजबूत स्थिति में रखते हैं। इसके ठीक विपरीत, इंडिया गठबंधन के पास केवल 64 सांसद बचे हैं, जबकि अन्य दलों के पास 28 सांसद हैं। कुल मिलाकर दोनों सदनों में सत्ता पक्ष का दबदबा अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

Shivam Shrivastava
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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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