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NDA vs INDIA: TMC में बगावत, AAP-DMK अलग, 2024 के झटके के बाद कैसे बाउंस बैक कर गई BJP? विपक्ष की हालत पस्त
NDA vs INDIA: 2024 चुनाव के बाद बीजेपी और NDA ने शानदार वापसी करते हुए विधानसभाओं में अपनी ताकत बढ़ाई है। वहीं, TMC में बगावत और AAP-DMK के अलग होने से INDIA गठबंधन की हालत पस्त हो गई है।
NDA vs INDIA: साल 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने एक अलग ही रफ्तार पकड़ ली है। अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर पार्टी ने न सिर्फ संसद में अपनी जड़ें और गहरी की हैं, बल्कि देश भर की राज्य विधानसभाओं में भी विपक्ष को काफी पीछे छोड़ दिया है। इस राजनीतिक विस्तार में पश्चिम बंगाल का जिक्र बेहद अहम है। एक ऐसा सूबा जो लंबे समय तक भाजपा की चुनावी पहुंच से दूर माना जाता रहा, वहां भी अब पार्टी खुद को मजबूत स्थिति में देख रही है। इसकी एक बड़ी वजह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही भारी बगावत है। इस अंदरूनी कलह ने भाजपा को अपना मुख्य विपक्षी दल कमजोर करने और इस राज्य में अपनी पैठ मजबूत करने का एक सुनहरा मौका दे दिया है।
आंकड़ों में भाजपा और एनडीए की ऐतिहासिक छलांग
अगर 2024 के आम चुनावों से लेकर अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सत्ताधारी गठबंधन की ताकत में एक जबरदस्त उछाल देखने को मिलता है। देश के कुल 4123 विधायकों में से अब 43.97 प्रतिशत विधायक अकेले भाजपा के हैं, जबकि कुछ समय पहले तक यह आंकड़ा 37.16 फीसदी हुआ करता था। असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में मिली शानदार जीत ने इस ग्राफ को और तेजी से ऊपर चढ़ाया है। इसी का नतीजा है कि एनडीए का कुल विधायक शेयर 50.84 प्रतिशत से छलांग लगाकर 61.36 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
संख्या के लिहाज से बात करें तो देश के सभी 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर भाजपा के पास अब 1813 विधायक हैं। 2024 के आम चुनावों के फौरन बाद यह तादाद 1532 थी। वहीं, पूरे एनडीए कुनबे के विधायकों की संख्या भी इस दौरान 2096 से बढ़कर 2530 के मजबूत आंकड़े को छू चुकी है।
इंडिया गठबंधन में बिखराव और विपक्ष की कमजोर होती स्थिति
जैसे-जैसे सत्ता पक्ष का दायरा पूरे देश में बढ़ता गया, वैसे-वैसे विपक्षी खेमे और खास तौर पर 'इंडिया' ब्लॉक की ताकत हर चुनाव के साथ कम होती चली गई। 2024 के चुनावों के ठीक बाद इंडिया गठबंधन के पास देश भर में 1603 विधायक हुआ करते थे, जो कुल संख्या का लगभग 38.88 प्रतिशत था। लेकिन पिछले दो सालों के सियासी घटनाक्रमों ने इस आंकड़े को बुरी तरह गिरा दिया है। अब यह संख्या सिमटकर महज 1011 या कुल विधायकों का 24.52 प्रतिशत ही रह गई है।
इस बड़ी गिरावट की वजह सिर्फ खराब चुनावी नतीजे नहीं हैं, बल्कि गठबंधन के भीतर की बढ़ती फूट ने भी अहम भूमिका निभाई है। आम आदमी पार्टी और हाल ही में एम.के. स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) का इंडिया ब्लॉक से किनारा कर लेना विपक्ष के लिए बड़े झटके साबित हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौर में किसी भी गठबंधन का हिस्सा न रहने वाली स्वतंत्र पार्टियों के विधायकों की संख्या 321 (7.79 प्रतिशत) से बढ़कर 563 (13.66 प्रतिशत) हो गई है।
हालिया 11 विधानसभा चुनावों का स्पष्ट प्रभाव
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से अब तक देश भर में 11 विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और इनके नतीजे सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में ही रहे हैं। इन चुनावों के दम पर अकेले भाजपा के खाते में 281 नए विधायक जुड़ गए। उसके सहयोगी दलों ने भी इस दौर में खूब फायदा उठाया है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पास 36, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के पास 20 और शिवसेना के पास 19 विधायकों का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ विपक्ष के लिए लगातार नुकसान का दौर जारी है। कांग्रेस ने इस अवधि में अपने 18 विधायक खो दिए। क्षेत्रीय दलों की स्थिति और भी खराब रही, जहां डीएमके को 75, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को 51 और आम आदमी पार्टी को 37 विधायकों का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।


