NEET OMR Sheet Controversy: OMR शीट में गड़बड़ी के आरोप, 6 छात्र पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

NEET OMR Sheet Controversy: NEET-UG 2026 काउंसलिंग से पहले 6 छात्रों ने OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। जानिए पूरा मामला।

Jyotsana Singh
Published on: 5 Aug 2026 5:03 PM IST
NEET OMR Sheet Controversy: 6 Students Move Supreme Court Ahead of UG Counselling
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NEET OMR Sheet Controversy: 6 Students Move Supreme Court Ahead of UG Counselling

NEET OMR Sheet Controversy: नीट परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब NEET-UG 2026 की काउंसलिंग शुरू होने से ठीक पहले परीक्षा को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। छह अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा जारी की गई उनकी OMR शीट परीक्षा के दौरान भरे गए उत्तरों से मेल नहीं खाती। छात्रों का कहना है कि इस गड़बड़ी की वजह से उनके अंक और रैंक प्रभावित हुई है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि काउंसलिंग शुरू होने से पहले मामले की तत्काल सुनवाई कर उन्हें राहत दी जाए।

OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे छह छात्र

नई दिल्ली में दायर याचिका में छह अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि परीक्षा के दौरान उन्होंने OMR शीट पर जो उत्तर भरे थे, वे NTA द्वारा परिणाम के बाद उपलब्ध कराई गई OMR शीट से अलग हैं। छात्रों का कहना है कि यह केवल कुछ सवालों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई उत्तरों में अंतर दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि इससे उनके कुल अंक कम हो गए और रैंक भी प्रभावित हुई। सभी याचिकाकर्ता 600 से 650 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र बताए जा रहे हैं। इसलिए यह मामला उनके मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पर सीधा असर डाल सकता है।

काउंसलिंग से पहले तत्काल सुनवाई की मांग

छात्रों की ओर से यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच के समक्ष मेंशन किया गया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत से कहा कि NEET-UG काउंसलिंग जल्द शुरू होने वाली है। यदि उससे पहले OMR शीट की जांच नहीं हुई तो छात्रों को अपूरणीय नुकसान हो सकता है। इसलिए इस मामले पर प्राथमिकता के आधार पर जल्द सुनवाई की जानी चाहिए।

आपत्ति दर्ज करने की अवधि में सामने नहीं आई थी समस्या

याचिका में कहा गया है कि NTA ने उत्तर कुंजी और OMR शीट पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया था। लेकिन उस समय यह विसंगति छात्रों के सामने नहीं आई। बाद में जब उन्होंने अपनी OMR शीट का विस्तार से मिलान किया, तब उन्हें उत्तरों में अंतर दिखाई दिया। इसी वजह से वे निर्धारित समय के भीतर आपत्ति दर्ज नहीं करा सके और अब न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

NTA से शिकायत के बावजूद नहीं मिला समाधान

सुनवाई के दौरान जब चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या छात्रों ने पहले NTA से संपर्क किया था, तो उनके वकील ने बताया कि सभी छात्रों ने ई-मेल के जरिए शिकायत भेजी थी। इसके अलावा वे NTA कार्यालय भी गए और अधिकारियों से मुलाकात की। हालांकि, उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिला। छात्रों का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें अदालत का रुख करने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया

मामले का उल्लेख होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है। वहीं अदालत ने याचिका पर तत्काल कोई राहत नहीं दी, लेकिन छात्रों की ओर से जल्द सुनवाई की मांग बरकरार है।

NEET परीक्षा में OMR शीट की भूमिका क्यों होती है अहम

NEET-UG जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में OMR (ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन) शीट ही उम्मीदवार के उत्तरों का आधिकारिक रिकॉर्ड होती है। इसी शीट के आधार पर उत्तरों की जांच होती है और अंतिम परिणाम तैयार किया जाता है। यदि OMR शीट में किसी तरह की तकनीकी या रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी होती है तो उसका सीधा असर छात्र के अंक, रैंक और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों को बेहद संवेदनशील माना जाता है।

NEET-PG विवाद पर केंद्र सरकार ने बनाई 12 सदस्यीय समिति

इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट में NEET-PG परीक्षा से जुड़े एक अन्य मामले की भी सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि मेडिकल प्रवेश प्रणाली की व्यापक समीक्षा के लिए 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। सरकार के अनुसार इस समिति की अध्यक्षता स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) करेंगे। समिति परीक्षा प्रक्रिया, काउंसलिंग और मेडिकल प्रवेश व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं को कम किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने समिति को आठ सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए समिति को आठ सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) के प्रतिनिधियों को भी समिति की बैठक में शामिल किया जा सकता है। इससे मेडिकल प्रवेश प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

NEET-UG की काउंसलिंग शुरू होने से पहले सामने आया यह मामला केवल छह छात्रों तक सीमित नहीं माना जा रहा। यदि अदालत OMR शीट की दोबारा जांच या सत्यापन का आदेश देती है तो इसका प्रभाव भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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