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NEET Paper Leak में सबसे बड़ा एक्शन! अब तक 45 से ज्यादा लोग गिरफ्तार, सामने आया इस गैंग का नाम
NEET Paper Leak Arrest 2026: NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में अब तक 45 से ज्यादा गिरफ्तारियां! CBI की जांच में सामने आया इंटर-स्टेट गैंग, संजीव मुखिया की तलाश तेज। जानिए कैसे करोड़ों छात्रों के भविष्य से खेला गया और क्यों NTA को परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
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NEET Paper Leak Arrest 2026: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 अब सिर्फ एक इम्तिहान नहीं रह गई है, बल्कि यह करोड़ों उम्मीदों के टूटने और सिस्टम की नाकामी की एक बड़ी दास्तां बन चुकी है। 22 लाख छात्रों की दिन-रात की मेहनत और उनके माता-पिता के सपनों पर उस वक्त पानी फिर गया, जब पेपर लीक की खबरों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक मचे बवाल के बाद अब जांच एजेंसियां इस संगठित अपराध की तह तक जाने में जुटी हैं। अब तक 45 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी और कई राज्यों में छापेमारी के बाद यह साफ हो गया है कि यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा षड्यंत्र था।
NTA का कड़ा फैसला और सरकार का हस्तक्षेप
National Testing Agency (NTA) ने शुरुआती जांच के बाद NEET UG 2026 परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह फैसला तब आया जब केंद्रीय एजेंसियों ने 3 मई को हुई परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंप दी है। NTA ने अपने बयान में स्वीकार किया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परीक्षा को वैध मानना अब मुमकिन नहीं था। अब दोबारा परीक्षा कराने की तैयारी हो रही है, लेकिन छात्रों के मन में नई तारीखों को लेकर गहरी चिंता और मानसिक दबाव बना हुआ है।
देशभर में गिरफ्तारियों का सिलसिला और इंटर-स्टेट नेटवर्क
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, गिरफ्तारियों का आंकड़ा 45 के पार पहुंच चुका है। इसमें केवल छात्र ही नहीं, बल्कि सॉल्वर गैंग के शातिर सदस्य, बिचौलिए और पेपर सप्लायर शामिल हैं। जांच एजेंसियों ने बिहार, झारखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक फैले एक विशाल 'इंटर-स्टेट नेटवर्क' का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क इतना सुनियोजित था कि कई राज्यों की सीमाओं को लांघकर पेपर को चंद घंटों में फैला दिया गया। एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित माफिया है जो शिक्षा के बाजार में सेंध लगाकर करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहा था।
मनीष यादव और संजीव मुखिया: मास्टरमाइंड की तलाश
राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जांच के दौरान मनीष यादव को हिरासत में लिया है, जिसे इस नेटवर्क का अहम चेहरा माना जा रहा है। वहीं, CBI की जांच में संजीव मुखिया का नाम मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में उभरकर सामने आया है। संजीव मुखिया फिलहाल फरार है और उसकी तलाश में कई राज्यों की पुलिस छापेमारी कर रही है। जांच एजेंसियां इन दोनों के बीच के कनेक्शन को खंगाल रही हैं। अगर इन दोनों के तार आपस में जुड़े मिलते हैं, तो यह मामला और भी बड़ा और जटिल हो सकता है।
पटना का वो स्कूल और जले हुए प्रश्नपत्रों का राज
CBI ने पटना से मनीष प्रकाश और आशुतोष नाम के दो ऐसे आरोपियों को पकड़ा है, जिन्होंने पूरी साजिश की पोल खोल दी है। आरोप है कि इन्होंने 4 मई की रात पटना के एक निजी स्कूल में 20 से 25 छात्रों को इकट्ठा किया और उन्हें कथित पेपर रटवाया गया। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई को जांच स्थल से आधे जले हुए प्रश्नपत्र भी मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि पेपर हजारीबाग के एक सेंटर से लीक हुआ था। यह घटना दिखाती है कि नकल माफिया ने किस हद तक अपनी पैठ बना ली थी।
नासिक में नई गिरफ्तारी
लीक कांड की आंच अब महाराष्ट्र के नासिक तक भी पहुंच गई है। नासिक क्राइम ब्रांच ने 30 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जिसने BAMS की पढ़ाई की है और वह मेडिकल काउंसलिंग एजेंसी चलाता था। CBI राजस्थान यूनिट से मिले इनपुट के बाद पुलिस ने उसे दबोचा। पकड़े जाने के डर से आरोपी ने अपना हेयरस्टाइल तक बदल लिया था ताकि कोई उसे पहचान न सके। इस तरह की गिरफ्तारियां साफ करती हैं कि जांच अभी और गहरे तक जाएगी। आज जरूरत सिर्फ जांच की नहीं, बल्कि परीक्षा सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह बदलने की है ताकि भविष्य में किसी भी छात्र की मेहनत लालच की भेंट न चढ़े।


