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CJP प्रदर्शनकारियों पर नहीं होगी कानूनी कार्रवाई, दिल्ली सरकार ने दिया बड़ा आदेश
Protes Case Withdrawal: दिल्ली सरकार ने NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़े CJP प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है। 13 मामलों की समीक्षा होगी और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों पर आगे कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
CJP Protes Case Withdrawal: NEET प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि हालिया विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, यह राहत उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Antecedents) है।
दिल्ली सरकार की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, 29 जुलाई की शाम तक दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े कुल 13 मामले दर्ज किए हैं। अब इन सभी गिरफ्तारियों और हिरासत में लिए गए लोगों की समीक्षा की जाएगी और जिन पर यह राहत लागू होगी, उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई बंद कर उन्हें रिहा करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
दिल्ली सरकार ने क्या कहा?
दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ खड़ी है और उसी भावना के तहत यह फैसला लिया गया है।
उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने छात्रों से किया गया वादा निभाया है। लेकिन यदि किसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले असामाजिक तत्व ने छात्र आंदोलन की आड़ में हिंसा फैलाने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।"
20 जुलाई को हिंसक हुआ था प्रदर्शन
20 जुलाई को CJP की ओर से आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। विवाद बढ़ने के बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और CCTV फुटेज के आधार पर मुकदमे दर्ज किए गए।
CJP की मांगों के बाद बदला सरकार का रुख
प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने CJP की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई थी। इनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी शामिल थी।
हालांकि आंदोलन समाप्त होने के दो दिन बाद CJP ने आरोप लगाया था कि पुलिस केस वापस लेने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। पार्टी ने चेतावनी दी थी कि यदि सरकार अपने वादे पर अमल नहीं करती तो वह फिर से सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
सुप्रीम कोर्ट का भी आया था आदेश
28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई न की जाए और उन्हें रिहा किया जाए। दिल्ली सरकार का ताजा फैसला इसी आदेश और केंद्र द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुरूप माना जा रहा है।
लोकसभा से पास हुआ सख्त एंटी-पेपर लीक बिल
इस बीच लोकसभा ने एंटी-पेपर लीक कानून में संशोधन संबंधी विधेयक भी पारित कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।


