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NEET-UG 2026 पेपर लीक में NTA के भीतर ही सेंध: तीन विषय विशेषज्ञों पर लीक करने का आरोप
NEET-UG 2026: CBI की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट में NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में NTA विशेषज्ञों की कथित भूमिका और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आईं।
NEET UG 2026
NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था की ऐसी कमजोरियां सामने रखी हैं, जो केवल बाहरी गिरोह या बिचौलियों तक सीमित नहीं थीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद की अत्यंत गोपनीय प्रक्रिया से जुड़े राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के तीन विषय विशेषज्ञों ने अपने अधिकृत प्रवेश का दुरुपयोग कर प्रश्न बाहर पहुंचाए। इसके बाद यही प्रश्न बिचौलियों, कोचिंग नेटवर्क और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचे। मामले में सीबीआई ने 13 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। 
सीबीआई के मुताबिक इस कथित अंदरूनी सेंध के प्रमुख आरोपियों में रसायन विज्ञान विशेषज्ञ पी.वी. कुलकर्णी, जीव विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे और भौतिकी विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। तीनों को NTA की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में विशेषज्ञ के रूप में शामिल किया गया था और उन्हें अपने-अपने विषयों के प्रश्नों तक गोपनीय पहुंच प्राप्त थी। मंधारे को बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्नों तक पूर्ण पहुंच होने की बात सीबीआई पहले ही आधिकारिक रूप से कह चुकी है, जबकि हवलदार को भौतिकी प्रश्नों तक पहुंच थी।
सीबीआई का आरोप है कि इस पहुंच का इस्तेमाल प्रश्नों की नकल या इलेक्ट्रॉनिक फोटो खींचने जैसे सीधे तरीके से नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत चतुर तरीके से किया गया। प्रश्न याद किए गए, छोटे कागजों पर संकेतों और विकल्पों के रूप में दर्ज किए गए तथा संबंधित पाठ्यपुस्तकों में महत्वपूर्ण हिस्सों को चिह्नित किया गया। बाद में होटल या निवास स्थान पहुंचकर इन जानकारियों को दोबारा व्यवस्थित किया गया और चुनिंदा विद्यार्थियों को विशेष कक्षाओं के माध्यम से बताया गया।
गोपनीय कमरे से बाहर कैसे निकले प्रश्न?
चार्जशीट में सबसे गंभीर सवाल NTA की प्रश्नपत्र निर्माण व्यवस्था पर उठाया गया है। प्रश्नों की सेटिंग, अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन का कार्य दिल्ली के ओखला स्थित NTA परिसर के गोपनीय हिस्से में कराया गया था। कागजों पर यह व्यवस्था बेहद सुरक्षित दिखाई देती थी, लेकिन सीबीआई ने जांच में पाया कि विशेषज्ञों के प्रवेश और बाहर निकलने के समय पर्याप्त फ्रिस्किंग यानी शारीरिक तलाशी की व्यवस्था नहीं थी। इससे छोटी पर्ची या लिखित सामग्री बाहर ले जाने की संभावना बनी रही।
इसके अलावा विशेषज्ञों की गतिविधियों पर वास्तविक समय में नजर रखने के लिए समर्पित लाइव CCTV मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम भी नहीं था। सीबीआई ने इसे सुरक्षा ढांचे की गंभीर कमजोरी माना है। एनटीए के पास सीसीटीवी रिकॉर्डिंग का बैकअप भी सीमित अवधि का था। परिणामस्वरूप जब जांच शुरू हुई, तब प्रश्नपत्र तैयार करने की महत्वपूर्ण अवधि की फुटेज उपलब्ध नहीं रह गई थी।
इस मामले ने एक और व्यवस्थागत कमजोरी उजागर की है। एक ही विशेषज्ञ को प्रश्नपत्र निर्माण के कई चरणों—समीक्षा, अनुवाद और पुनः अनुवाद—में शामिल किए जाने के कारण कुछ लोगों को अंतिम प्रश्नों तक व्यापक पहुंच मिल गई। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार गोपनीय परीक्षाओं में सामान्यतः need-to-know access और कार्यों का विभाजन इसलिए किया जाता है कि किसी एक व्यक्ति को पूरा पेपर समझने या पुनर्निर्मित करने का अवसर न मिले।
कुलकर्णी पर रसायन विज्ञान के सवाल बाहर ले जाने का आरोप
पी.वी. कुलकर्णी को सीबीआई ने शुरुआती जांच में ही कथित पेपर लीक के प्रमुख स्रोतों में से एक बताया था। एजेंसी के अनुसार वह NTA की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े थे और उन्हें रसायन विज्ञान के प्रश्नों तक पहुंच मिली थी। आरोप है कि उन्होंने प्रश्न और विकल्प याद किए तथा बाद में विशेष कोचिंग कक्षाओं में विद्यार्थियों को बताए। छात्रों की नोटबुक में मिले प्रश्न वास्तविक NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए थे।
चार्जशीट में यह भी आरोप है कि गोपनीय कक्ष में उपलब्ध कराए गए सादे कागजों का उपयोग कर कुलकर्णी ने प्रश्नों और उत्तर विकल्पों के संकेत छोटी पर्चियों पर दर्ज किए। सीबीआई ने बरामद सामग्री और वास्तविक परीक्षा प्रश्नों का विशेषज्ञों से मिलान कराया। जांच में उन प्रश्न सेटों के साथ काफी अधिक समानता मिली, जिन तक संबंधित विशेषज्ञों की पहुंच थी।
जीव विज्ञान के सवाल किताबों में निशान लगाकर याद रखने का तरीका
जीव विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे के संबंध में सीबीआई का आरोप है कि उन्हें बॉटनी और जूलॉजी प्रश्नों तक पूर्ण पहुंच प्राप्त थी। एजेंसी ने मई में उनकी गिरफ्तारी के समय भी कहा था कि उन्होंने संभावित अभ्यर्थियों को जुटाकर पुणे स्थित अपने आवास पर विशेष कक्षाएं आयोजित कीं और वहां परीक्षा से जुड़े कई प्रश्नों की जानकारी दी। छात्रों को प्रश्न नोट कराने के साथ पाठ्यपुस्तकों के संबंधित हिस्सों पर निशान लगाने की बात भी जांच में सामने आई।
जांच एजेंसी का मानना है कि लंबे अध्यापन अनुभव के कारण विशेषज्ञ के लिए प्रश्न को याद रखने के बजाय यह याद रखना आसान था कि वह NCERT के किस अध्याय, पृष्ठ या अवधारणा से जुड़ा है। इस तरह प्रश्नपत्र की प्रतिलिपि बनाए बिना भी बड़ी मात्रा में सामग्री बाहर पहुंचाई जा सकती थी।
भौतिकी विशेषज्ञ हवलदार तक भी पहुंची जांच
भौतिकी से जुड़े प्रश्नों के मामले में सीबीआई ने पुणे की शिक्षिका मनीषा संजय हवलदार को गिरफ्तार किया। एजेंसी के अनुसार वह भी NTA की विशेषज्ञ थीं और उन्हें Physics प्रश्नों तक पूर्ण पहुंच थी। आरोप है कि उन्होंने कुछ प्रश्न मनीषा मंधारे के साथ साझा किए और जांच में वे प्रश्न वास्तविक परीक्षा सेट से मेल खाते पाए गए।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि मनीषा संजय हवलदार और मनीषा संजय वाघमारे दो अलग व्यक्ति हैं। वाघमारे को जांच एजेंसी ने कथित मध्यस्थ नेटवर्क से जोड़ा है, जबकि हवलदार NTA की भौतिकी विशेषज्ञ थीं।
‘FIFA World Cup 2026’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप से मिली अहम कड़ी
इस पूरे मामले में एक व्हाट्सऐप समूह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। आरोपियों ने कथित तौर पर ‘FIFA World Cup 2026’ नाम से समूह बनाया था। बाहर से देखने पर इसका नाम परीक्षा या कोचिंग से कोई संबंध नहीं दर्शाता था, लेकिन सीबीआई के अनुसार समूह के भीतर विद्यार्थियों, विशेष कक्षाओं और परीक्षा संबंधी सामग्री पर बातचीत होती थी। डिजिटल जांच के दौरान यही ग्रुप कई आरोपियों और अभ्यर्थियों के बीच संबंध स्थापित करने वाली अहम कड़ी बना।
जांच एजेंसी का आरोप है कि नेटवर्क केवल एक शहर तक सीमित नहीं था। पुणे से निकली कथित जानकारी बिचौलियों की श्रृंखला के माध्यम से महाराष्ट्र से बाहर राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों तक पहुंची। टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल सामग्री आगे बढ़ाने के लिए किया गया।
विशेषज्ञ खुद देते थे निजी कोचिंग, NTA नियमों पर भी सवाल
सीबीआई ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल कुछ विशेषज्ञ परीक्षा से पहले या बाद में निजी स्तर पर अभ्यर्थियों को विशेष कोचिंग भी दे रहे थे। जांच एजेंसी के अनुसार यह हितों के टकराव का गंभीर मामला है क्योंकि परीक्षा प्रश्नों तक गोपनीय पहुंच रखने वाले व्यक्ति का उन्हीं अभ्यर्थियों को कोचिंग देना परीक्षा की निष्पक्षता को सीधे प्रभावित कर सकता है।
यही वजह है कि यह मामला केवल तीन विशेषज्ञों की कथित आपराधिक भूमिका तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल अब यह भी है कि NTA ने विशेषज्ञों की पृष्ठभूमि, निजी कोचिंग से उनके संबंध और हितों के टकराव की निगरानी किस स्तर पर की।
लीक सामग्री का वास्तविक प्रश्नपत्र से बड़ा मिलान
सीबीआई ने अभ्यर्थियों और बिचौलियों से बरामद सामग्री का स्वतंत्र विशेषज्ञों से विश्लेषण कराया। जांच एजेंसी के अनुसार जिन विषयों और प्रश्न सेटों तक संबंधित विशेषज्ञों को पहुंच थी, उनमें लीक हुई सामग्री का वास्तविक प्रश्नपत्र के साथ बहुत अधिक मिलान मिला। रसायन विज्ञान से जुड़ी सामग्री में कुछ परीक्षणों में समानता करीब 85 प्रतिशत तक दर्ज होने का दावा किया गया है।
इसी पैटर्न को सीबीआई ने इस आरोप की महत्वपूर्ण परिस्थितिजन्य पुष्टि माना कि सामग्री किसी बाहरी अनुमान या सामान्य ‘गेस पेपर’ से नहीं बल्कि प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया के भीतर से निकली थी।
3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को CBI ने दर्ज किया मामला
NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी। परीक्षा से पहले प्रश्नों से मिलती-जुलती सामग्री प्रसारित होने की शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर सीबीआई ने 12 मई को एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी, साक्ष्य नष्ट करने और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून से जुड़ी धाराएं लगाई गईं।
इसके बाद राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा सहित कई राज्यों में कार्रवाई हुई और डिजिटल उपकरण, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन तथा अन्य दस्तावेज जब्त किए गए। जांच की कड़ियां पीछे जोड़ते हुए एजेंसी कथित बिचौलियों से उन विशेषज्ञों तक पहुंची जिन्हें प्रश्नपत्र तक आधिकारिक पहुंच हासिल थी।
13 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों का आरोपपत्र
सीबीआई ने 28 जुलाई को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में 13 आरोपियों के खिलाफ लगभग 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। आरोपपत्र में डिजिटल फोरेंसिक डेटा, मोबाइल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, विद्यार्थियों की नोटबुक, बैंक लेन-देन और कथित लीक प्रश्नों की तुलना सहित कई तरह के साक्ष्यों को शामिल किया गया है।
अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान से संबंधित आगे की कार्यवाही के लिए 10 अगस्त की तारीख तय की है। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और अंतिम रूप से दोषी या निर्दोष होने का फैसला अदालत करेगी।
सवाल केवल ‘किसने पेपर लीक किया’ का नहीं, सिस्टम कैसे टूटा यह भी अहम
NEET-UG 2026 मामला देश की परीक्षा प्रणाली के सामने एक बड़ा संस्थागत सवाल खड़ा करता है। यदि सीबीआई के आरोप अदालत में सिद्ध होते हैं, तो इसका अर्थ होगा कि अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद परीक्षा की सबसे कमजोर कड़ी कोई बाहरी हैकर या प्रिंटिंग प्रेस नहीं बल्कि गोपनीय प्रक्रिया के भीतर अधिकृत पहुंच रखने वाला व्यक्ति था।
इस प्रकरण से कम से कम चार गंभीर कमजोरियां सामने आती हैं—विशेषज्ञों को जरूरत से अधिक प्रश्नों तक पहुंच, प्रवेश-निकास पर अपर्याप्त तलाशी, CCTV रिकॉर्डिंग और लाइव निगरानी की कमी तथा प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों और निजी कोचिंग के बीच संभावित हितों के टकराव पर अपर्याप्त नियंत्रण।
NEET जैसी परीक्षा में लाखों विद्यार्थी वर्षों की मेहनत और भारी खर्च के बाद शामिल होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र की गोपनीयता केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि अवसर की समानता का आधार है। इसलिए इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला जितना महत्वपूर्ण होगा, उतना ही महत्वपूर्ण यह भी होगा कि NTA अपनी प्रश्नपत्र निर्माण प्रणाली में ऐसी कौन-सी संरचनात्मक तब्दीलियां करता है, जिससे भविष्य में अधिकृत पहुंच ही परीक्षा की सबसे बड़ी कमजोरी न बन जाए।


