NEET पेपर लीक का सबसे बड़ा खुलासा! NTA एक्सपर्ट ने स्पेशल क्लास में बांटे सवाल, CBI के हाथ लगे सबूत

NEET UG Paper Leak 2026: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने बड़ा दावा किया है। जांच में एनटीए के एक्सपर्ट की स्पेशल क्लास, व्हाट्सऐप ग्रुप, लीक प्रश्नपत्र, मोबाइल से मिले सबूत और लाखों रुपये के लेनदेन का खुलासा होने की बात कही गई है। जानिए पूरी जांच में क्या-क्या सामने आया।

Aditya Kumar Verma
Published on: 7 Aug 2026 5:06 PM IST
NEET UG Paper Leak 2026 | CBI Alleges NTA Experts Ran Special Classes
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Image Source- Social Media

NEET UG Paper Leak 2026: नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) पेपर लीक (Paper Leak) मामले की जांच कर रही सीबीआई (CBI) ने कई बड़े खुलासे करने का दावा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, एनटीए (NTA) के केमिस्ट्री एक्सपर्ट (Chemistry Expert) पीवी कुलकर्णी (PV Kulkarni) की इस पूरे मामले में अहम भूमिका सामने आई है। सीबीआई का कहना है कि गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद उन्होंने छात्रों की स्पेशल क्लास (Special Class) ली और इसी दौरान उन्हें प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी दी।

परीक्षा से पहले पुणे और लातूर में ली गई स्पेशल क्लास

सीबीआई के अनुसार पीवी कुलकर्णी ने परीक्षा से ठीक पहले 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे (Pune) और लातूर (Latur) में स्पेशल क्लास आयोजित की। जांच में दावा किया गया है कि पुणे में 9 और लातूर में 3 छात्रों को पढ़ाया गया। एजेंसी का कहना है कि इन्हीं छात्रों तक लीक हुआ केमिस्ट्री का प्रश्नपत्र पहुंचाया गया।

जांच के दौरान सीबीआई ने मायगेट ऐप (MyGate App) के एंट्री रिकॉर्ड और मोबाइल सीडीआर (CDR) का मिलान किया। एजेंसी का दावा है कि इससे छात्रों के कुलकर्णी के घर आने-जाने और स्पेशल क्लास में शामिल होने की पुष्टि हुई।

नोट्स से लेकर मोबाइल तक, कई सबूत मिलने का दावा

सीबीआई के मुताबिक छात्रों के हाथ से लिखे नोट्स लीक हुए प्रश्नपत्र से मेल खाते मिले। जांच एजेंसी का कहना है कि ये नोट्स कुलकर्णी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किए गए थे।

जांच में यह भी दावा किया गया है कि कुलकर्णी के मोबाइल से केमिस्ट्री प्रश्नपत्र और आंसर स्लिप (Answer Sheet) की 9 तस्वीरें मिलीं, जो नीट-यूजी 2026 के आधिकारिक प्रश्नपत्र से मेल खाती हैं। मोबाइल में अभ्यर्थियों, उनके माता-पिता और अन्य आरोपियों से बातचीत के सबूत भी मिले हैं।

सीबीआई के मुताबिक परीक्षा के बाद एक अभ्यर्थी की मां ने खुश होकर कुलकर्णी को घड़ी गिफ्ट करने की बात भी कही थी।

व्हाट्सऐप पर बना था 'स्पेशल क्लास' ग्रुप

जांच में सामने आया कि 25 अप्रैल को पीवी कुलकर्णी ने स्पेशल क्लास नाम से व्हाट्सऐप ग्रुप (WhatsApp Group) बनाया था। इस ग्रुप में छात्रों के नाम, उनसे ली गई फीस और क्लास का पूरा रिकॉर्ड मौजूद था।

CBI का दावा है कि छात्रों से पैसे सीधे कुलकर्णी या मनीषा वाघमारे (Manisha Waghmare) के जरिए लिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कुलकर्णी फिजिक्स (Physics) का प्रश्नपत्र हासिल करने की कोशिश भी कर रहे थे।

फिजिक्स पेपर लीक में मनीषा हवलदार पर भी आरोप

सीबीआई के मुताबिक एनटीए की फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार (Manisha Sanjay Havaldar) पर भी पेपर लीक में शामिल होने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि उन्होंने गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद 25 हजार रुपये लेकर एक अभ्यर्थी की मां को फिजिक्स के सवाल लीक किए।

जांच के अनुसार मनीषा हवलदार ने फिजिक्स के सवाल हाथ से लिखकर मनीषा गुरुनाथ मंडहरे (Manisha Gurunath Mandhare) को व्हाट्सऐप पर भेजे। कुछ सवाल उन्होंने तेजस शाह (Tejas Shah) से भी लिखवाए। 14 अप्रैल को तेजस शाह ने मनीषा हवलदार के बताए सवाल अपनी नोटबुक में लिखे थे।

CBI के अनुसार परीक्षा से आठ दिन पहले तक मनीषा हवलदार के मोबाइल में हाथ से लिखे हुए प्रश्न मौजूद थे।

मीडिया में खबर आते ही जलाई गई नोटबुक

सीबीआई का दावा है कि जैसे ही मीडिया में पेपर लीक की खबरें सामने आईं, मनीषा हवलदार ने अपनी रसोई में वह नोटबुक जला दी, जिसमें सवाल और हिंट्स लिखे गए थे। पूछताछ के दौरान तेजस शाह ने भी माना कि उसने अपने नोट्स नष्ट कर दिए थे।

मोस्ट एक्सपेक्टेड बताकर बांटा गया पेपर

जांच एजेंसी के मुताबिक आरसीसी कोचिंग सेंटर (RCC Coaching Centre) के संचालक शिवराज मोटेगांवकर (Shivraj Motegaonkar) ने छात्रों के बीच यही लीक प्रश्नपत्र 'मोस्ट एक्सपेक्टेड' बताकर बांटा।

सीबीआई का दावा है कि परीक्षा से एक रात पहले 40 से 50 हॉस्टल छात्रों के बीच लीक प्रश्नपत्र की पीडीएफ (PDF) भी शेयर की गई। इसके बाद 3 मई को परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों ने वीडियो बनाकर दावा किया कि आरसीसी का मॉक टेस्ट ही असली नीट प्रश्नपत्र निकला।

किताबों में छिपाए गए बायोलॉजी के सवाल

सीबीआई जांच के अनुसार आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंडहरे ने छात्रों को सीधे प्रश्नपत्र देने के बजाय नई एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में खास पैराग्राफ चिन्हित करवाए। उन्होंने छात्रों से किताबों के किनारों पर सवाल लिखवाए और बाद में उन्हीं नोटबुक की जांच की। जांच एजेंसी का दावा है कि उन्होंने फिजिक्स के हस्तलिखित सवालों के प्रिंट भी निकलवाए।

मनीषा वाघमारे बनी पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी

सीबीआई के अनुसार मनीषा वाघमारे इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी थीं। उन्होंने अभिभावकों से संपर्क किया और उन्हें ऑफलाइन प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। प्रति छात्र करीब 4 लाख रुपये की डील की गई।

जांच एजेंसी का दावा है कि उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लास आयोजित कराईं, कैश और बैंक ट्रांसफर के जरिए पैसे लिए, परीक्षा से पहले फिजिक्स के सवाल व्हाट्सऐप पर भेजे और छात्रों की नोटबुक भी अपने पास रख ली।

2025 के आखिर से शुरू हुई थी तैयारी

सीबीआई के मुताबिक पेपर लीक की तैयारी 2025 के आखिर से ही शुरू हो गई थी। अक्टूबर 2025 से कुछ अभिभावकों से संपर्क किया गया और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि मोटी रकम देने पर नीट-यूजी के सवाल पहले ही उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

जांच में दावा किया गया है कि शुरुआत में डेढ़ लाख रुपये नकद लिए गए। इसके बाद अप्रैल 2026 में अलग-अलग किस्तों में नकद और ऑनलाइन भुगतान कराया गया। एजेंसी का कहना है कि उसे कई बैंक ट्रांजैक्शन और कैश भुगतान के सबूत मिले हैं।

तीन दिन पहले टेलीग्राम से शुरू हुआ पेपर लीक

सीबीआई के मुताबिक 29 अप्रैल यानी परीक्षा से तीन दिन पहले प्रश्नपत्र और उत्तरों की सॉफ्ट कॉपी सबसे पहले टेलीग्राम (Telegram) पर शेयर की गई।

जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी ऋषि बिवाल (Rishi Bival) ने इसे अपने रूममेट आदित्य मीणा (Aditya Meena) को भेजा। आरोप है कि वह प्रति छात्र 10 से 12 लाख रुपये मांग रहा था और जो ज्यादा छात्र लाता था, उसे मुफ्त में पेपर दिया जाता था।

इसके बाद 13 मई को गिरफ्तार किए गए मंगीलाल (Mangilal), दिनेश (Dinesh) और विकास बिवाल (Vikas Bival) के मोबाइल की फोरेंसिक जांच में यही फाइलें बरामद हुईं।

ब्लूटूथ से ट्रांसफर की कोशिश नाकाम

सीबीआई के अनुसार 2 मई को सीकर (Sikar) स्थित आर.के. एजुकेशनल कंसल्टेंसी (RK Educational Consultancy) में ब्लूटूथ (Bluetooth) के जरिए लीक पीडीएफ ट्रांसफर करने की कोशिश की गई, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।

इसके बाद ऑफिस के डेस्कटॉप में व्हाट्सऐप वेब (WhatsApp Web) लॉगिन किया गया। वहीं पीडीएफ डाउनलोड की गई और फिर अलग-अलग लोगों को भेजी गई।

जांच एजेंसी के मुताबिक ऑफिस कर्मचारी अभिषेक सैनी (Abhishek Saini) ने फाइल डिलीट करने के बजाय अपने मोबाइल में सेव कर ली और अपने दोस्त सचिन ढांगर (Sachin Dhangar) को भेज दी।

कई राज्यों तक फैल गई हल प्रश्नपत्र की PDF

सीबीआई का दावा है कि इसके बाद यही पीडीएफ कई लोगों के जरिए अलग-अलग राज्यों में फैल गई। लक्षय राज (Lakshay Raj) ने इसे अपने हॉस्टल रूममेट हितेश कुमार (Hitesh Kumar) को भेजा। हितेश ने इसे अपने पिता राकेश स्वामी (Rakesh Swami) को भेज दिया।

इसी दौरान राजत चौधरी (Rajat Chaudhary) ने फोनपे (PhonePe) के जरिए 30 हजार रुपये ट्रांसफर किए और बदले में करीब 450 हल किए हुए सवालों की पीडीएफ हासिल की। उसने यह पीडीएफ अपने भाई, जो नीट का अभ्यर्थी था, को परीक्षा से एक रात पहले भेज दी। सीबीआई का दावा है कि आरसीसी कोचिंग सेंटर के 40 से 50 हॉस्टल छात्रों तक भी यही पीडीएफ पहुंची।

NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि एनटीए ने अपने मास्टर सेट को कैलाश (Kailash) और शिवालिक (Shivalik) जैसे कोडनेम दिए थे। वहीं आरोपियों ने नीट 2026 (NEET 2026) और फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) नाम से व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए थे। एक आरोपी का नंबर एपी ब्रोकर (AP Broker) नाम से सेव था। बाद में उसने दावा किया कि उसका मोबाइल बाइक चलाते समय गिरकर खो गया।

जांच एजेंसी का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की न तो ठीक से तलाशी ली जाती थी और न ही उनके आने-जाने पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी। कॉन्फिडेंशियल सेक्शन (Confidential Section) में सीसीटीवी (CCTV) की लाइव मॉनिटरिंग भी नहीं थी। सीबीआई का आरोप है कि इसी लापरवाही का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र बाहर निकाले गए।

असली पेपर से हुआ लीक दस्तावेजों का मिलान

सीबीआई के मुताबिक दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के विशेषज्ञों ने लीक दस्तावेजों और असली प्रश्नपत्रों का मिलान किया। जांच में दावा किया गया कि बायोलॉजी (Biology) के कई सेट में 80 से 93 प्रतिशत तक सवाल एक जैसे पाए गए।

केमिस्ट्री (Chemistry) के कई मास्टर सेट में 45 में से 45 सवाल पूरी तरह मेल खाते मिले। वहीं एक आरोपी के मोबाइल से मिले 132 हस्तलिखित केमिस्ट्री सवालों में से 111 सवाल एनटीए के आधिकारिक प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खाते पाए गए। सीबीआई का दावा है कि ये सभी सबूत पेपर लीक की साजिश की पुष्टि करते हैं।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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