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नेपाल के बाद UP-बिहार में भी होगी भीषण तबाही? सरकार ने दिया सबसे बड़ा अपडेट...जानें अब कितना खतरा
UP Bihar Flood Alert: नेपाल के रसुवा और नुवाकोट में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद यूपी-बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका थी। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन ने अब बड़ा अपडेट दिया है। जानें गंडक-कोसी समेत प्रमुख नदियों का क्या हाल है।
UP Bihar Flood Alert: नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने चारों तरफ खौफनाक तबाही मचाई है। भोटेकोशी समेत कई उफान मारती नदियों में आए अचानक पानी और मलबे के तेज बहाव ने सैकड़ों मकानों, पक्की सड़कों, मजबूत पुलों और पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को पल भर में तिनके की तरह बहा दिया। इस भयंकर प्राकृतिक आपदा के बाद सबसे बड़ा डर उत्तर प्रदेश और बिहार को लेकर जताया जा रहा था, क्योंकि नेपाल की नदियों का पानी सीधे इन दोनों भारतीय राज्यों में तबाही फैलाता है। इसी बीच पड़ोसी देश नेपाल से एक बेहद राहत देने वाली और अच्छी खबर सामने आई है।
नेपाल से आई राहत भरी खबर
नेपाल सरकार के फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए साफ किया है कि रसुवा या नुवाकोट क्षेत्र में किसी दूसरी बड़ी या विनाशकारी बाढ़ आने की फिलहाल कोई प्रामाणिक सूचना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, जारी हल्की बारिश की वजह से नदियों का पानी थोड़ा ऊपर-नीचे जरूर हो सकता है, लेकिन किसी नए सैलाब का कोई खतरा नहीं है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही बिना पुष्टि वाली झूठी खबरों और अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि यदि कोई आपात स्थिति बनती है, तो उसकी तुरंत आधिकारिक माध्यमों और SMS अलर्ट के जरिए सूचना दी जाएगी।
क्या यूपी-बिहार से पूरी तरह टल गया है जलप्रलय का खतरा?
नेपाल से आई इस ताजा रिपोर्ट के बाद निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि खतरा पूरी तरह टल चुका है। अगर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में दोबारा भारी बारिश होती है, तो निचले इलाकों में नदियों का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। विशेष रूप से बिहार में गंडक नदी को लेकर राज्य प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश होने पर पानी सीधे नीचे आता है, जिससे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली जिलों पर लगातार कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही कोसी नदी के दायरे में आने वाले सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिलों में भी जलस्तर के पल-पल के उतार-चढ़ाव पर नजर बनाई गई है।
उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में कैसी है तैयारी?
उत्तर प्रदेश के जो जिले नेपाल की सीमा से सटे हुए हैं, वहां का जिला प्रशासन भी हालात पर बारीक नजर बनाए हुए है। खासतौर पर महराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक और अन्य पहाड़ी नदियों के बहाव पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, नेपाल की तरफ से किसी नए बड़े खतरे की चेतावनी न होने से फिलहाल सीधी तबाही का डर कम हुआ है। चूंकि पहाड़ी इलाकों में मौसम बहुत तेजी से बदलता है, इसलिए प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और लगातार पड़ोसी देश के संपर्क में बना हुआ है।
अफवाहों पर न करें यकीन: सिर्फ सरकारी अलर्ट पर रखें भरोसा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी और सुकून देने वाली बात यही है कि नेपाल के संबंधित विभाग ने फिलहाल किसी और बड़े सैलाब की आशंका से इनकार किया है। इसका सीधा अर्थ है कि उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर फिलहाल पानी का कोई नया विकराल तूफान नहीं बढ़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने सभी नागरिकों से सतर्क रहने और केवल सरकारी एजेंसियों व आधिकारिक समाचारों पर ही विश्वास करने का आग्रह किया है।


