कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण में घिरी PNC इंफ्राटेक, NHAI ने उसे ही क्यों थमा दिया करोड़ो का नया प्रोजेक्ट?

Kanpur-Lucknow Expressway Row: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण में तकनीकी खामियों और कार्रवाई की प्रक्रिया के बीच NHAI द्वारा PNC इंफ्राटेक को 3,483 करोड़ रुपये की दो नई सड़क परियोजनाएं दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी पर पहले से CBI जांच और ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है।

Harsh Srivastava
Published on: 6 Aug 2026 4:07 PM IST (Updated on: 6 Aug 2026 4:07 PM IST)
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण में घिरी PNC इंफ्राटेक, NHAI ने उसे ही क्यों थमा दिया करोड़ो का नया प्रोजेक्ट?
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Kanpur-Lucknow Expressway Row: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगातार सामने आ रही तकनीकी कमियों और सड़क धंसने की घटनाओं के बाद NHAI ने निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को 'नॉन-परफॉर्मर' श्रेणी में डाल दिया है। कंपनी को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस कड़े कदम के बीच NHAI ने इसी कंपनी को उत्तर प्रदेश में 3,483 करोड़ रुपये की दो बड़ी सड़क परियोजनाओं के नए ठेके सौंप दिए हैं।

3,483 करोड़ रुपये की 2 बड़ी परियोजनाओं पर हस्ताक्षर

कंपनी द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारी के मुताबिक, 16 जुलाई 2026 को PNC इंफ्राटेक और NHAI के बीच दो हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) प्रोजेक्ट्स के लिए समझौते पर दस्तखत हुए हैं। पहला प्रोजेक्ट एनएच-927 पर बाराबंकी से मुस्तफाबाद के बीच 1,728 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन सड़क निर्माण का है। दूसरा प्रोजेक्ट मुस्तफाबाद से बिसवां तक 1,755 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन मार्ग बनाने का है। इन दोनों फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट्स को 24 महीने की समय सीमा के भीतर पूरा करके अगले 15 वर्षों तक संचालित करने की जिम्मेदारी कंपनी को दी गई है।

CBI जांच और 10 लाख रुपये की रिश्वत का पुराना मामला

यह पहला मौका नहीं है जब यह इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी विवादों में घिरी हो। वर्ष 2024 में सीबीआई ने एक हाईवे प्रोजेक्ट की आधिकारिक मंजूरी के ऐवज में 10 लाख रुपये के अवैध लेनदेन का बड़ा मामला दर्ज किया था। आरोप थे कि कंपनी के अधिकारियों के जरिए NHAI के जनरल मैनेजर-कम-प्रोजेक्ट डायरेक्टर तक रिश्वत पहुंचाई जा रही थी। इस मामले में सीबीआई ने एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार किया था और पीएनसी इंफ्राटेक से जुड़े 4 कर्मचारियों समेत कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर छापेमारी की थी।

कार्रवाई के दावे के बीच नए कॉन्ट्रैक्ट पर उठे तीखे सवाल

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में बार-बार आ रही खराबी के बाद एनएचएआई ने तकनीकी जांच बिठाकर कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हालांकि, ब्लैकलिस्टिंग की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी होती है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस कंपनी पर घटिया निर्माण, अधिकारियों को घूस देने के आरोप और ब्लैकलिस्टिंग का खतरा मंडरा रहा हो, उसे इतनी भारी-भरकम राशि के नए प्रोजेक्ट्स आखिर किस आधार पर आवंटित कर दिए गए? क्या नए ठेके देते समय कंपनी के पिछले रिकॉर्ड और सीबीआई की गंभीर जांच की पूरी तरह से अनदेखी की गई?

Harsh Srivastava
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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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