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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण में घिरी PNC इंफ्राटेक, NHAI ने उसे ही क्यों थमा दिया करोड़ो का नया प्रोजेक्ट?
Kanpur-Lucknow Expressway Row: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण में तकनीकी खामियों और कार्रवाई की प्रक्रिया के बीच NHAI द्वारा PNC इंफ्राटेक को 3,483 करोड़ रुपये की दो नई सड़क परियोजनाएं दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी पर पहले से CBI जांच और ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है।
Kanpur-Lucknow Expressway Row: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगातार सामने आ रही तकनीकी कमियों और सड़क धंसने की घटनाओं के बाद NHAI ने निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को 'नॉन-परफॉर्मर' श्रेणी में डाल दिया है। कंपनी को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस कड़े कदम के बीच NHAI ने इसी कंपनी को उत्तर प्रदेश में 3,483 करोड़ रुपये की दो बड़ी सड़क परियोजनाओं के नए ठेके सौंप दिए हैं।
3,483 करोड़ रुपये की 2 बड़ी परियोजनाओं पर हस्ताक्षर
कंपनी द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारी के मुताबिक, 16 जुलाई 2026 को PNC इंफ्राटेक और NHAI के बीच दो हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) प्रोजेक्ट्स के लिए समझौते पर दस्तखत हुए हैं। पहला प्रोजेक्ट एनएच-927 पर बाराबंकी से मुस्तफाबाद के बीच 1,728 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन सड़क निर्माण का है। दूसरा प्रोजेक्ट मुस्तफाबाद से बिसवां तक 1,755 करोड़ रुपये की लागत से 4-लेन मार्ग बनाने का है। इन दोनों फोर-लेन हाईवे प्रोजेक्ट्स को 24 महीने की समय सीमा के भीतर पूरा करके अगले 15 वर्षों तक संचालित करने की जिम्मेदारी कंपनी को दी गई है।
CBI जांच और 10 लाख रुपये की रिश्वत का पुराना मामला
यह पहला मौका नहीं है जब यह इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी विवादों में घिरी हो। वर्ष 2024 में सीबीआई ने एक हाईवे प्रोजेक्ट की आधिकारिक मंजूरी के ऐवज में 10 लाख रुपये के अवैध लेनदेन का बड़ा मामला दर्ज किया था। आरोप थे कि कंपनी के अधिकारियों के जरिए NHAI के जनरल मैनेजर-कम-प्रोजेक्ट डायरेक्टर तक रिश्वत पहुंचाई जा रही थी। इस मामले में सीबीआई ने एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार किया था और पीएनसी इंफ्राटेक से जुड़े 4 कर्मचारियों समेत कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर छापेमारी की थी।
कार्रवाई के दावे के बीच नए कॉन्ट्रैक्ट पर उठे तीखे सवाल
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में बार-बार आ रही खराबी के बाद एनएचएआई ने तकनीकी जांच बिठाकर कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हालांकि, ब्लैकलिस्टिंग की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी होती है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस कंपनी पर घटिया निर्माण, अधिकारियों को घूस देने के आरोप और ब्लैकलिस्टिंग का खतरा मंडरा रहा हो, उसे इतनी भारी-भरकम राशि के नए प्रोजेक्ट्स आखिर किस आधार पर आवंटित कर दिए गए? क्या नए ठेके देते समय कंपनी के पिछले रिकॉर्ड और सीबीआई की गंभीर जांच की पूरी तरह से अनदेखी की गई?


