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बिहार, झारखंड और बंगाल में दौड़ रहा जाली नोट! नेटवर्क पर NIA का बड़ा एक्शन, बांग्लादेशी करेंसी भी जब्त
नकली भारतीय नोटों की तस्करी के मामले में NIA ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 8 ठिकानों पर छापेमारी की।
NIA Raid Fake Currency Raid: नकली भारतीय नोटों की तस्करी के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बुधवार, 4 नवंबर को एक साथ तीन राज्यों में बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी की टीमों ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कुल 8 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान कई डिजिटल डिवाइस, संदिग्ध दस्तावेज और बांग्लादेशी मुद्रा समेत कई अहम सामान जब्त किए गए। NIA अब इन सामानों की जांच के जरिए नकली नोटों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
तीन राज्यों में एक साथ पहुंची NIA की टीमें
NIA ने बिहार के औरंगाबाद में दो और गया जी में तीन ठिकानों पर तलाशी ली। वहीं, झारखंड के हजारीबाग में दो जगहों पर छापेमारी की गई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मालदा में भी एक ठिकाने की तलाशी ली गई। इस तरह एजेंसी ने एक ही दिन में तीन राज्यों के आठ ठिकानों पर कार्रवाई की।
कहां से शुरू हुई नकली नोटों की जांच?
दरअसल, यह पूरा मामला बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां पुलिस ने 2 लाख 48 हजार 500 रुपये के नकली भारतीय नोट बरामद किए थे। इस बरामदगी के बाद 15 अगस्त 2026 को मदनपुर थाने में FIR दर्ज की गई थी।
पुलिस ने इस मामले में सुरेंद्र कुमार, विजय यादव, रंजन और प्रदीप साव उर्फ प्रदीप कुमार साव को आरोपी बनाया था। शुरुआती जांच के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय के आदेश पर NIA ने इसकी जांच अपने हाथ में ले ली।
18 अक्टूबर को NIA ने दर्ज किया केस
NIA ने 18 अक्टूबर 2026 को इस मामले में दोबारा केस दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। अब तक की जांच में एजेंसी के सामने आया है कि आरोपी नकली भारतीय नोटों की तस्करी में शामिल थे। जांच एजेंसी को आशंका है कि इस नेटवर्क का दायरा और भी बड़ा हो सकता है और इसके तार दूसरे इलाकों से जुड़े हो सकते हैं।
डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजों से खुलेगा राज?
छापेमारी के दौरान जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों और बांग्लादेशी मुद्रा को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है। NIA इन सभी सामानों की पड़ताल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नकली नोट कहां तैयार किए जा रहे थे, उनकी सप्लाई कैसे होती थी और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फिलहाल एजेंसी की जांच जारी है। आने वाले दिनों में डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजों की जांच से इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े नए नाम और जानकारियां सामने आ सकती हैं।


