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‘पैसे देकर चलाया गया विरोध’, E20 Fuel विवाद पर नितिन गडकरी का बड़ा दावा
E20 Fuel Controversy: नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल के विरोध को ‘पेड कैंपेन’ बताया। सरकार ने E100 फ्यूल के लिए बदले नियम। जानिए E85, E100 और पुरानी पेट्रोल कारों पर इसका असर।
E20 Fuel News: इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विरोध के पीछे पैसे लगाए जाने का दावा कर बहस तेज कर दी है। गडकरी के मुताबिक, E20 फ्यूल के खिलाफ अभियान प्रायोजित था। वहीं, सरकार ने E100 ईंधन पर चलने वाले वाहनों के लिए नियामकीय रास्ता साफ करने की दिशा में कदम उठाया है। हालांकि, नए नियमों का यह मतलब नहीं है कि अब हर पुरानी पेट्रोल कार में E100 इस्तेमाल किया जा सकेगा।
E20 के विरोध पर क्या बोले नितिन गडकरी?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक कार्यक्रम में E20 पेट्रोल को लेकर हुए विरोध पर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि करीब तीन महीने पहले इस मुद्दे पर विरोध तेज हुआ था और इसके पीछे पैसे देकर चलाया गया अभियान था। उनके मुताबिक, अब इस मुद्दे पर लोगों की नाराजगी कम हुई है।
गडकरी ने कहा कि भारत को कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता घटाने की जरूरत है। पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे में इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना देश की ऊर्जा जरूरतों और आयात बिल के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, E20 के विरोध को लेकर मंत्री का यह दावा उनका बयान है। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर पेश करने के लिए अलग से साक्ष्य जरूरी हैं।
E100 फ्यूल पर सरकार का नया नियम क्या है?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन से जुड़ी अधिसूचना 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की। इसके तहत वाहन उत्सर्जन मानकों के नियामकीय ढांचे में E100 ईंधन को भी शामिल किया गया है।
इस बदलाव से वाहन निर्माताओं के लिए E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलने वाले वाहनों को निर्धारित उत्सर्जन मानकों के अनुसार प्रमाणित कराने का रास्ता स्पष्ट होता है। इससे फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर आधारित वाहनों के विकास और प्रमाणन को बढ़ावा मिल सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि उत्सर्जन मानकों में E100 को शामिल करना और देशभर में हर पेट्रोल पंप पर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना दो अलग-अलग बातें हैं। नए नियामकीय प्रावधान को अपने आप व्यापक व्यावसायिक उपलब्धता या सभी वाहनों में इस्तेमाल की अनुमति नहीं माना जाना चाहिए।
E20, E85 और E100 में क्या अंतर है?
E20 पेट्रोल: इसमें अधिकतम 20 प्रतिशत इथेनॉल और शेष मुख्य रूप से पेट्रोल होता है।
E85 फ्यूल: इसमें लगभग 85 प्रतिशत इथेनॉल होता है।
E100 फ्यूल: यह लगभग शुद्ध इथेनॉल वाला ईंधन है।
इथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोलियम ईंधन की खपत और जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से किया जाता है। लेकिन अलग-अलग मिश्रणों के लिए इंजन, फ्यूल सिस्टम और उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक की जरूरतें अलग हो सकती हैं।
क्या पुरानी पेट्रोल कार में डाल सकते हैं E100?
इसका जवाब है- नहीं, जब तक वाहन उस ईंधन के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त न हो।
E100 और E85 जैसे उच्च इथेनॉल वाले ईंधन के लिए वाहन में उपयुक्त इंजन तकनीक, ईंधन आपूर्ति प्रणाली और संबंधित घटकों की जरूरत होती है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन निर्माता की ओर से निर्धारित ईंधन मिश्रणों पर चलने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
इसलिए, अगर कोई कार E10 या E20 पेट्रोल के अनुकूल है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसमें E85 या E100 भी सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। वाहन मालिकों को निर्माता के निर्देशों और वाहन की प्रमाणित ईंधन अनुकूलता के अनुसार ही ईंधन चुनना चाहिए।
E20 पेट्रोल को लेकर क्यों उठे सवाल?
E20 को बढ़ावा देने के साथ वाहनों की ईंधन दक्षता, माइलेज, इंजन की अनुकूलता और पुराने वाहनों पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई है। इथेनॉल की ऊर्जा सामग्री पेट्रोल से कम होने के कारण समान परिस्थितियों में ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है। वास्तविक असर वाहन के इंजन, तकनीक, इस्तेमाल और ईंधन मिश्रण पर निर्भर करता है।
इसलिए, E20 को लेकर होने वाली बहस में दो पहलुओं को अलग-अलग समझना जरूरी है, एक तरफ कच्चे तेल के आयात में कमी और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने का उद्देश्य है, तो दूसरी तरफ वाहन मालिकों की लागत, माइलेज और तकनीकी अनुकूलता से जुड़े सवाल हैं।
राजमार्गों की खराब गुणवत्ता पर भी गडकरी का बयान
CII के कार्यक्रम में गडकरी ने राजमार्गों की गुणवत्ता को लेकर सोशल मीडिया पर मिल रही शिकायतों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हाल में लगभग 700 से 800 परियोजनाओं की समीक्षा की गई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजमार्गों की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में राजमार्गों पर यात्रा करने वालों को असुविधा न हो, इसके लिए प्रयास किए जाएंगे।
गडकरी के बयान के मुताबिक, सरकार का जोर सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता सुधारने और शिकायतों पर ध्यान देने पर है। हालांकि, अगले दो वर्षों में यात्रियों को कितनी राहत मिलती है, यह परियोजनाओं के क्रियान्वयन, रखरखाव और निगरानी पर निर्भर करेगा।


