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2 अक्टूबर को लेकर चलना होगा कैश! 'No UPI Day' पर वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद व्यापारियों ने क्या फैसला?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद AICPDF और AIMRA ने 2 अक्टूबर का ‘No UPI Day’ विरोध वापस ले लिया।
No UPI Day Called Off: UPI पेमेंट को लेकर 2 अक्टूबर को होने वाला व्यापारियों का 'No UPI Day' अब नहीं होगा। ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने शुक्रवार को प्रस्तावित इस विरोध प्रदर्शन को वापस ले लिया है। यह फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया।
व्यापारी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में वित्त मंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में व्यापारियों और रिटेल सेक्टर की तरफ से प्रस्तावित UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर अपनी चिंताएं और सुझाव सामने रखे गए। व्यापारियों का कहना है कि MDR लागू होने से कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
क्यों बुलाया गया था 'No UPI Day'?
दरअसल, व्यापारियों के संगठनों ने प्रस्तावित UPI MDR के विरोध में 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' मनाने का ऐलान किया था। इस दौरान विरोध में शामिल व्यापारी एक दिन के लिए UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करने वाले थे।
व्यापारियों की मुख्य चिंता UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर थी। उनका कहना था कि अगर डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ व्यापारियों पर आता है तो इससे खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
इसी मुद्दे को सरकार के सामने रखने और MDR व्यवस्था की समीक्षा की मांग को लेकर 'No UPI Day' का ऐलान किया गया था। अब वित्त मंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद AICPDF और AIMRA ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित इस विरोध कार्यक्रम को वापस लेने का फैसला किया है।
त्योहारों से पहले MDR लागू न करने की मांग
बैठक में व्यापारियों ने सरकार से प्रस्तावित MDR को लागू करने की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि आने वाला त्योहारी सीजन कारोबार के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है और इस दौरान बाजार में खरीदारी और डिजिटल पेमेंट दोनों बढ़ते हैं। ऐसे समय में MDR लागू होने से व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
व्यापारी संगठनों ने सरकार के सामने प्रस्तावित 1 लाख रुपये की सीमा की भी समीक्षा करने की मांग रखी। उन्होंने इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का सुझाव दिया है। संगठनों का कहना है कि कारोबार की वास्तविक स्थिति को देखते हुए यह सीमा ज्यादा व्यावहारिक होगी।
M2M ट्रांजेक्शन को MDR से बाहर रखने की मांग
व्यापारी संगठनों ने Merchant-to-Merchant यानी M2M ट्रांजेक्शन को भी MDR के दायरे से बाहर रखने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले पर विचार करने के लिए एक विशेष समिति बनाने का सुझाव दिया है। यह समिति व्यापारियों की समस्याओं और सुझावों पर विस्तार से विचार करके आगे का रास्ता सुझाएगी।


