‘ऑपरेशन गंगाजल’ क्या है? गुजरात में 2 IAS अफसरों की जबरन रिटायरमेंट की कहानी

Operation Gangajal: गुजरात सरकार ने IAS अफसर K राजेश और गौरव दहिया को समय से पहले अनिवार्य रिटायरमेंट दिया। जानिए CBI, ED, विभागीय जांच और पूरे मामले की कहानी।

Alakha Singh
Published on: 2 Oct 2026 11:34 AM IST (Updated on: 2 Oct 2026 11:57 AM IST)
‘ऑपरेशन गंगाजल’ क्या है? गुजरात में 2 IAS अफसरों की जबरन रिटायरमेंट की कहानी
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Operation Gangajal: गुजरात सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को दो IAS अधिकारियों K राजेश और गौरव दहिया को सामान्य सेवानिवृत्ति की उम्र से पहले अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब राज्य सरकार भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और गंभीर आचरण संबंधी मामलों में घिरे अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है। इस पूरी प्रक्रिया को रिपोर्टों में ‘ऑपरेशन गंगाजल’ के नाम से बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दोनों अधिकारियों की समय से पहले रिटायरमेंट का औपचारिक आधार उनके सर्विस रिकॉर्ड की समीक्षा और All India Services Pension Rules के तहत की गई प्रक्रिया है। गुजरात के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने अधिकारियों के लंबे सर्विस रिकॉर्ड, ईमानदारी और आचरण से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की और इसके बाद केंद्र के Department of Personnel and Training (DoPT) ने रिटायरमेंट को मंजूरी दी। दोनों अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हुई।

क्या है ‘ऑपरेशन गंगाजल’?

‘ऑपरेशन गंगाजल’ नाम से बताई जा रही यह कवायद गुजरात सरकार की उन अधिकारियों के रिकॉर्ड की समीक्षा से जुड़ी है, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप, विभागीय कार्रवाई, अनुशासनात्मक मामले या गंभीर कदाचार से संबंधित रिकॉर्ड मौजूद हैं। इसका मकसद ऐसे मामलों में लंबे समय से चल रही प्रशासनिक और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं की समीक्षा करना बताया गया है।

ताजा कार्रवाई में K राजेश और गौरव दहिया को उनकी सामान्य रिटायरमेंट उम्र से काफी पहले सेवा से बाहर किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए पेंशन नियमों के तहत अधिकारियों के लंबे करियर के दौरान सर्विस इंटीग्रिटी और मोरल कंडक्ट जैसे पहलुओं की समीक्षा की गई।

कौन हैं K राजेश?

K राजेश 2011 बैच के गुजरात कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 23 मार्च 1986 को हुआ था। उन्होंने पांडिचेरी यूनिवर्सिटी से Electrical and Electronics Engineering में BTech किया और UPSC Civil Services Examination पास करने के बाद IAS में शामिल हुए।

अपने करियर में उन्होंने जूनागढ़ और सूरत में Assistant Collector के रूप में काम किया। इसके बाद वह सूरत के District Development Officer रहे और फिर अप्रैल 2018 से जून 2021 तक सुरेंद्रनगर के कलेक्टर के पद पर रहे।

2022 में CBI ने किया था गिरफ्तार

राजेश के खिलाफ कार्रवाई की सबसे बड़ी वजहों में से एक उनका CBI मामला है। 2022 में CBI ने उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया था।

CBI के अनुसार, सुरेंद्रनगर कलेक्टर रहते हुए उन पर हथियार लाइसेंस जारी करने, सरकारी जमीन के आवंटन और सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण को नियमित करने जैसे मामलों में अवैध लाभ लेने के आरोप लगे थे। जांच के दौरान CBI ने उनके ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।

CBI ने 2022 में दाखिल चार्जशीट में कथित तौर पर 98 हजार रुपये की रिश्वत से जुड़े सबूत मिलने की बात कही थी। एजेंसी के मुताबिक, एक बिचौलिए के जरिए कथित रिश्वत की रकम का लेनदेन किया गया था।

ED और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

CBI मामले के बाद राजेश के खिलाफ Enforcement Directorate (ED) की कार्रवाई भी हुई। ED ने उन्हें Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत जांच में लिया और उनके खिलाफ prosecution complaint दाखिल की।

एक रिपोर्ट के अनुसार, CBI ने यह भी आरोप लगाया था कि उनके कार्यकाल के दौरान सरकारी चुनाव खर्च से जुड़े खाते में बड़ी रकम जमा हुई थी और एजेंसी ने इसे कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर जांच की थी। यह जांच एजेंसी के आरोपों का हिस्सा थी, न कि अदालत द्वारा दोषसिद्धि का निष्कर्ष।

राजेश जुलाई 2022 से निलंबित थे। अब 1 अक्टूबर 2026 से उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है।

कौन हैं गौरव दहिया?

गौरव दहिया 2010 बैच के गुजरात कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 3 जून 1984 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली के AIIMS से MBBS की पढ़ाई पूरी की और 2010 में IAS में शामिल हुए।

उन्होंने गुजरात सरकार के स्वास्थ्य और पर्यावरण विभागों में काम किया और National Health Mission के Mission Director भी रहे। इसके अलावा वह बनासकांठा और पाटन में District Development Officer के पद पर भी रह चुके हैं।

2019 में लगा था गंभीर आरोप

दहिया का नाम 2019 में उस समय चर्चा में आया जब दिल्ली की एक महिला ने उन पर बिगैमी यानी दो शादी करने, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर आरोप लगाए।

गुजरात सरकार ने अगस्त 2019 में उन्हें निलंबित कर दिया था। सरकार ने एक जांच समिति की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की थी और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

दहिया ने इन आरोपों से इनकार किया था। उनका दावा था कि उन्हें हनी-ट्रैप कर ब्लैकमेल किया गया। बाद में उन्होंने इस मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस और सरकार के सामने अपना पक्ष रखा।

दिल्ली पुलिस की जांच और विभागीय जांच अलग-अलग

दहिया ने दावा किया था कि दिल्ली पुलिस की जांच में उन्हें क्लीन चिट मिली। हालांकि, उस समय गुजरात सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि उनके खिलाफ अलग विभागीय जांच और वित्तीय मामलों से संबंधित जांच जारी थी।

नवंबर 2019 में गुजरात सरकार ने उनकी वित्तीय गतिविधियों की भी जांच का आदेश दिया। रिटायर्ड IAS अधिकारी वीएस गढ़वी को उनकी वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें दिल्ली में एक महिला के लिए फ्लैट खरीदने से जुड़े आरोप भी शामिल थे।

चार साल बाद निलंबन हुआ खत्म

गौरव दहिया का निलंबन करीब चार साल बाद जुलाई 2023 में वापस लिया गया। इसके बाद उन्हें गांधीनगर में Additional Development Commissioner के पद पर नियुक्त किया गया।

वह इसी पद पर कार्यरत थे, जब गुजरात सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 से उन्हें अनिवार्य रूप से रिटायर करने का आदेश जारी किया।

दहिया की उम्र रिटायरमेंट के समय करीब 42 साल थी और सामान्य परिस्थितियों में उन्हें लगभग 2044 तक सेवा में रहना था। यानी उनके पास करीब 18 साल की सेवा बाकी थी।

नए पेंशन नियमों से कैसे जुड़ा मामला?

इस पूरे घटनाक्रम में All India Services Pension Rules के तहत सर्विस रिकॉर्ड की समीक्षा अहम है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, गुजरात के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने अधिकारियों के पिछले करीब 15 वर्षों के रिकॉर्ड में उनकी सेवा, ईमानदारी और आचरण से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की। इसके बाद DoPT की मंजूरी से दोनों अधिकारियों की समय से पहले सेवानिवृत्ति प्रभावी हुई।

इसलिए ‘ऑपरेशन गंगाजल’ को केवल एक FIR या एक पुराने मामले पर आधारित कार्रवाई के तौर पर देखना पूरी प्रक्रिया को पूरा नहीं बताता। मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार, सर्विस रिकॉर्ड, लंबित अनुशासनात्मक मामले और अधिकारियों के आचरण से जुड़े रिकॉर्ड को समग्र रूप से समीक्षा में शामिल किया गया।

गुजरात सरकार का बड़ा प्रशासनिक संदेश

K राजेश और गौरव दहिया की अनिवार्य सेवानिवृत्ति ऐसे समय हुई है जब गुजरात सरकार सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और गंभीर कदाचार से जुड़े मामलों पर कार्रवाई को लेकर सख्त रुख दिखा रही है। दोनों अधिकारियों के मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं, राजेश के खिलाफ CBI और ED की जांच से जुड़े मामले हैं, जबकि दहिया का मामला मुख्य रूप से विभागीय कार्रवाई और पुराने आचरण एवं वित्तीय आरोपों से जुड़ा रहा है।

इस कार्रवाई का तत्काल प्रभाव यह है कि दोनों अधिकारी अपनी सामान्य सेवानिवृत्ति की उम्र से कई साल पहले ही सेवा से बाहर हो गए हैं। ‘ऑपरेशन गंगाजल’ के तहत आगे और किन अधिकारियों के रिकॉर्ड की समीक्षा होती है, इस पर भी नजर रहेगी।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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