Operation Sindoor के दौरान जवानों की शहादत छिपाई गई? जानें रक्षा मंत्रालय ने क्या दिया जवाब

Operation Sindoor Controversy: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर छह शहीद जवानों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुराने बयान पर सवाल उठाए। रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है।

Shivam Shrivastava
Published on: 27 Jun 2026 10:31 PM IST
Rajnath Singh on Operation Sindoor
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Rajnath Singh on Operation Sindoor (photo: social media)

Operation Sindoor: कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में शहीद हुए छह जवानों की जानकारी छिपाकर देश और संसद दोनों को गुमराह किया गया है। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक पुराना वीडियो साझा किया।

यह वीडियो पिछले मॉनसून सत्र का है, जिसमें रक्षा मंत्री यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि इस सैन्य अभियान में किसी भी भारतीय सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब हाल ही में राष्ट्रीय समर स्मारक पर उन छह जवानों के नाम उकेरे गए, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वीरगति प्राप्त की थी। इनमें थलसेना के पांच और वायुसेना का एक जवान शामिल है।

मई 2025 के इस सैन्य अभियान के बाद यह पहला मौका है जब सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर इन शहीदों के नाम सामने आए हैं। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि इस मामले में सिर्फ दो ही बातें हो सकती हैं। पहली यह कि जब रक्षा मंत्री संसद में बयान दे रहे थे, तब उन्हें खुद इन शहादतों की जानकारी नहीं थी। अगर ऐसा है तो यह विभागीय नाकामी का एक बड़ा सबूत है। दूसरी स्थिति यह हो सकती है कि उन्हें पूरी सच्चाई पता थी, लेकिन फिर भी उन्होंने जानबूझकर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में शपथ लेकर देश से झूठ बोला।

शहादत को सम्मान न मिलने पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन यह कड़वा तथ्य नहीं बदलता कि हमारे छह वीर सपूतों ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान की है। उनकी इस सर्वोच्च शहादत को छिपाना सीधे तौर पर उनका अपमान है। उन्हें वह सम्मान और पहचान नहीं दी गई जिसके वे असल में हकदार थे। इसके साथ ही उनके परिवारों को भी पारदर्शिता से वंचित रखा गया। खेड़ा ने इसे हर उस सच्चे देशभक्त के लिए चिंता का विषय बताया जो अपनी सेना का सम्मान करता है।

रक्षा मंत्रालय ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

इन बढ़ते विवादों और आरोपों के बीच रक्षा मंत्रालय ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय ने कांग्रेस के दावों को पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, रक्षा मंत्री के 28 जुलाई को संसद में दिए गए भाषण को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री के बयान का यह मतलब कतई नहीं था कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी भी सैनिक की जान नहीं गई।

मंत्रालय ने उस समय के हालात को याद दिलाते हुए कहा कि जिस वक्त राजनाथ सिंह ने वह भाषण दिया था, तब सोशल मीडिया और मीडिया के एक वर्ग में यह झूठी अफवाह तेजी से फैलाई जा रही थी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय पायलट मारे गए हैं। यह एक सोची-समझी साजिश थी जिसका मकसद सैन्य अभियान की सफलता पर सवाल उठाना और देशवासियों का मनोबल गिराना था। रक्षा मंत्री का वह बयान दरअसल उसी झूठे और शरारतपूर्ण नैरेटिव का सटीक जवाब था। उन्होंने केवल उन भ्रामक दावों का खंडन किया था।

कौन हैं वो बलिदानी

पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था। इसी के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस साहसिक अभियान में जिन छह जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनके नाम अब राष्ट्रीय समर स्मारक के त्याग चक्र की दीवार नंबर '3डी' पर हमेशा के लिए दर्ज हो गए हैं। देश के इन अमर बलिदानियों में थलसेना के सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर एम मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं।

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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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