Pahalgam Terror Attack: कौन है पहलगाम को खून से लाल करने वाला खूंखार आतंकी संगठन TRF, आइए जाने कितना खतरनाक है ये?

Pahalgam Terror Attack Update: यह संगठन 2019 में विशेष रूप से कश्मीर घाटी में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच शांति और सुरक्षा स्थापित करने के नाम पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सामने आया था।

Akshita Pidiha
Published on: 23 April 2025 2:40 PM IST (Updated on: 23 April 2025 2:40 PM IST)
TRF Pahalgam Terror Attack
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TRF Pahalgam Terror Attack

Pahalgam Terror Attack Update: जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित पहलगाम में मंगलवार दोपहर 2:30 बजे एक दिल दहला देने वाली आतंकवादी घटना घटी, जिसमें कम से कम 28 लोग मारे गए और 12 से अधिक लोग घायल हो गए। हमले में आतंकवादियों ने पहले पर्यटकों से नाम पूछे और फिर उन्हें बेरहमी से गोली मार दी। यह घटना एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की पुनरावृत्ति की ओर इशारा करती है। हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) नामक आतंकवादी संगठन ने ली है, जो पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का सहयोगी समूह है।

टीआरएफ, यानी 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' एक उग्रवादी संगठन है, जो जम्मू और कश्मीर में सक्रिय है। यह संगठन 2019 में विशेष रूप से कश्मीर घाटी में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच शांति और सुरक्षा स्थापित करने के नाम पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सामने आया था। इस संगठन ने जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी हमले, राजनीतिक अस्थिरता और साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

टीआरएफ का गठन: (Who is TRF)

टीआरएफ का गठन पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मिलेजुले प्रयास से किया गया था। हालांकि इस संगठन ने खुद को कश्मीर में ‘प्रतिरोध मोर्चा’ के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन इसके उद्देश्यों और रणनीतियों ने इसे एक आतंकवादी संगठन के रूप में स्थापित किया। टीआरएफ का मकसद जम्मू और कश्मीर में भारत सरकार के खिलाफ एक आंदोलन चलाना और कश्मीर की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना था।

टीआरएफ के गठन के साथ ही यह संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा की रणनीतियों का पालन करने लगा, लेकिन यह संगठन इस बात का दावा करता है कि उसका उद्देश्य कश्मीर के लोगों का 'प्रतिरोध' है, और वह जम्मू और कश्मीर के स्थानीय लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए काम करता है।

2. टीआरएफ के उद्देश्य: (Terrorist Organization TRF Work)

टीआरएफ का प्रमुख उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में स्वतंत्रता की प्राप्ति और भारतीय शासन के खिलाफ संघर्ष करना था। इस संगठन का मानना था कि जम्मू और कश्मीर का 'स्वतंत्र कश्मीर' की ओर बढ़ना चाहिए, और भारत से उसका संबंध समाप्त होना चाहिए।


टीआरएफ के कार्यों से यह भी स्पष्ट हुआ कि उनका मकसद केवल भारतीय सेना और सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को भी अपने हमलों का निशाना बनाया। उनका दावा था कि वे "प्रतिरोध" कर रहे हैं, लेकिन इन हमलों ने समाज में डर और असुरक्षा का माहौल बना दिया।टीआरएफ को भारत सरकार ने 2023 में आधिकारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित किया था।इस संगठन ने खास तौर पर कश्मीरी पंडितों, बीजेपी कार्यकर्ताओं, और अन्य बाहरी नागरिकों को निशाना बनाकर टारगेट किलिंग की घटनाएँ अंजाम दी हैं।

टीआरएफ की कार्यप्रणाली और समर्थन

टीआरएफ के आतंकवादी गुटों को पाकिस्तान से भारी समर्थन प्राप्त था, जो इस संगठन को हथियार, प्रशिक्षण, और वित्तीय मदद प्रदान करता था। पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठन जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने टीआरएफ के गठन और संचालन में मदद की थी।


इस संगठन के लड़ाके सीमा पार से कश्मीर घाटी में घुसते थे और वहां आतंकवादी गतिविधियाँ करते थे। इन आतंकियों को स्थानीय कश्मीरी युवाओं द्वारा भी मदद मिलती थी, जो टीआरएफ के विचारधारा से प्रेरित होकर संगठन में भर्ती हो जाते थे। टीआरएफ के उग्रवादियों का एक बड़ा हिस्सा युवाओं से बना था, जो भारतीय सरकार की नीतियों से नाराज थे।

टीआरएफ की कार्यप्रणाली में छापामार युद्ध, बम विस्फोट, गोलाबारी और किडनैपिंग जैसी गतिविधियाँ शामिल थीं। संगठन ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी हमलों के लिए आईएसआई द्वारा भेजे गए हथियारों और विस्फोटकों का इस्तेमाल किया।

भारत सरकार का प्रतिक्रिया:

भारत सरकार ने टीआरएफ और अन्य आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने टीआरएफ के नेटवर्क को तहस-नहस करने के लिए कई ऑपरेशन चलाए। भारतीय सेना ने जम्मू और कश्मीर में चलाए गए ऑपरेशन ‘ऑल आउट’ और ऑपरेशन ‘ऑल डेविल्स’ के तहत आतंकवादी कैंपों को निशाना बनाकर कई आतंकवादियों को मार गिराया।


इसके अलावा, कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए भारतीय सुरक्षा बलों ने लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए और संदिग्ध आतंकवादियों के ठिकानों पर छापे मारे। इन ऑपरेशनों में सैकड़ों आतंकवादी मारे गए और कई गिरफ्तार किए गए।

टीआरएफ के खिलाफ कानूनी कार्यवाही:

भारत सरकार ने टीआरएफ को प्रतिबंधित करने की दिशा में भी कई कदम उठाए। इस संगठन को गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। भारतीय जांच एजेंसियों ने टीआरएफ के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की।


टीआरएफ के सदस्य अब भारतीय न्याय व्यवस्था से बचने के लिए विभिन्न तरीकों का सहारा लेते थे, जैसे कि फर्जी दस्तावेजों का उपयोग, स्थानीय संदिग्ध व्यक्तियों के साथ सांठ-गांठ आदि। इन सब घटनाओं ने कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को और भी जटिल बना दिया था।

समाप्ति और वर्तमान स्थिति:

हालांकि, कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठनों और टीआरएफ के खिलाफ भारतीय सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई के बाद इस संगठन की गतिविधियों में गिरावट आई है। भारतीय सेना के ऑपरेशनों और पाकिस्तान से आतंकवादियों के लगातार आने-जाने की बाधाओं के कारण टीआरएफ की ताकत में कमी आई है। लेकिन इस संगठन की विचारधारा अब भी कुछ स्थानों पर जीवित है और यह अन्य आतंकवादी समूहों के साथ मिलकर अपनी गतिविधियाँ जारी रख सकता है।

टीआरएफ की गतिविधियाँ अब भी कश्मीर घाटी में अस्थिरता बनाए रखने और कश्मीर के भविष्य को लेकर असहमति को हवा देने का प्रयास करती हैं। हालांकि, भारतीय सरकार और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण इस संगठन की प्रभावशीलता में काफी कमी आई है।

टीआरएफ की रणनीतियाँ और गतिविधियाँ:

टीआरएफ का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से जम्मू और कश्मीर के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों तक सीमित था। इस संगठन ने कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ आतंकवादी हमले करने के साथ-साथ विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी और सैन्य संस्थानों को निशाना बनाया।


टीआरएफ का नाम पहली बार 2020 में सामने आया जब इस संगठन ने कश्मीर के कुलगाम जिले में भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद कई अन्य आतंकी हमलों में भी इस संगठन का नाम जुड़ा।

टीआरएफ के उग्रवादी कारनामों में शामिल प्रमुख हमले:

2019 पुलवामा हमला: इस हमले को टीआरएफ द्वारा अंजाम दिया गया था, जो भारतीय सुरक्षा बलों पर किया गया था। इस हमले में लगभग 40 CRPF जवान शहीद हुए थे। इस हमले को कश्मीर में बढ़ते आतंकी हमलों और भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव का मुख्य कारण माना जाता है।

2020 में घाटी में हमले: टीआरएफ ने घाटी में कई हमले किए, जिनमें भारतीय सैनिकों को निशाना बनाया गया। आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के काफिले पर हमला किया और कई जगहों पर विस्फोटकों का उपयोग किया।

अप्रैल 2020 – टीआरएफ के आतंकवादियों ने कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठ की और सेना के जवानों पर हमला किया। इस हमले में सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे।

30 अक्टूबर, 2020 – टीआरएफ के आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या की। इस हमले के बाद, संगठन ने जिम्मेदारी ली और इसके संदेशों को सोशल मीडिया पर प्रचारित किया।

26 नवंबर, 2020 – टीआरएफ ने श्रीनगर के लवेपोरा इलाके में सेना की एक यूनिट पर हमला किया। इस हमले को फिल्माया गया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

20 अक्टूबर, 2024 – टीआरएफ के आतंकवादियों ने गंदेरबल जिले के सोनमर्ग इलाके में एक निर्माण स्थल पर हमला किया, जिसमें एक डॉक्टर और छह प्रवासी श्रमिकों की मौत हो गई।

26 फरवरी,2023 – टीआरएफ ने पुलवामा में कश्मीरी पंडित संजय शर्मा की हत्या की जिम्मेदारी ली। शर्मा को सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हुए आतंकवादियों ने गोली मारी

टीआरएफ की कार्यप्रणाली और सोशल मीडिया का उपयोग

टीआरएफ की कार्यप्रणाली में सोशल मीडिया का महत्वपूर्ण स्थान है। यह संगठन फेसबुक, ट्विटर, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग करता है। इन प्लेटफार्मों पर यह कट्टरपंथी विचारों को फैलाने, आतंकवादियों की भर्ती करने और प्रचार करने के लिए सक्रिय रहता है। इसके अलावा, यह कभी-कभी मीडिया संस्थानों को धमकी देता है ताकि अपने संदेशों को अधिक व्यापक रूप से प्रसारित कर सके।

टीआरएफ का प्रशिक्षण और मदद

टीआरएफ के आतंकवादियों को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त होता है। ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के पुराने प्रशिक्षण शिविरों में प्रशिक्षण लेते हैं, जिसमें उन्हें हथियार चलाने, बारूदी विस्फोटक बनाने, घुसपैठ की तकनीकें, और सीक्रेट कम्युनिकेशन की ट्रेनिंग दी जाती है। कुछ आतंकवादियों को अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में भी प्रशिक्षण दिया जाता है, जहाँ उन्हें साइबर वारफेयर और फिदायीन हमलावर की तकनीक सिखाई जाती है।

टीआरएफ से जुड़े प्रमुख आतंकवादी

टीआरएफ के प्रमुख आतंकवादी नेताओं में शेख सज्जाद गुल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, जिसे 2018 में शुजात बुखारी और उनके दो निजी सुरक्षा अधिकारियों की हत्या के मामले में संदिग्ध माना जाता है। इसके अलावा साजिद जट्ट और सलीम रहमानी भी टीआरएफ से जुड़े आतंकवादी हैं, जो लश्कर-ए-तैयबा के साथ सक्रिय हैं।

टीआरएफ का भविष्य और भारत सरकार की रणनीति

भारत सरकार ने टीआरएफ को UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत प्रतिबंधित किया है और इसके आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। भारतीय सुरक्षा बलों ने कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सघन अभियान चलाया है, और टीआरएफ के नेटवर्क को तोड़ने के लिए कई प्रमुख आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है।

टीआरएफ ने अपने छोटे से अस्तित्व में ही कई प्रमुख आतंकी हमलों को अंजाम दिया है और अपनी उपस्थिति को जम्मू और कश्मीर के आतंकवाद के क्षेत्र में स्थापित किया है। यह संगठन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के समर्थन से सक्रिय है और सोशल मीडिया के जरिए अपनी गतिविधियों को फैलाने का प्रयास करता है। हालांकि, भारत सरकार और सुरक्षा बल इस संगठन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन टीआरएफ के आतंकवादियों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियाँ अभी भी एक गंभीर खतरा बनी हुई हैं।

टीआरएफ एक उग्रवादी संगठन है, जो कश्मीर में भारत के खिलाफ संघर्ष करने के उद्देश्य से काम करता है। इस संगठन का पाकिस्तान से गहरा संबंध है और यह कश्मीर में अस्थिरता पैदा करने के लिए हर संभव प्रयास करता है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण टीआरएफ की गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन यह संगठन कश्मीर में अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लगातार कोशिशें करता रहेगा।

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