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‘ज्ञानेश कुमार को फांसी, खंभे पर लटकाओ…’, CEC पर भड़के बिहार के ये सांसद, कर डाली ये बड़ी मांग, VIDEO
CEC Gyanesh Kumar Row: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद विवादित बयान दिया है। उन्होंने फांसी की मांग करते हुए चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और एसआईआर विवाद का भी जिक्र किया।
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CEC Gyanesh Kumar Row: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग (Election Commission) के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर विपक्षी दलों की ओर से पहले से ही सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव (Pappu Yadav) ने ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी की है।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को फांसी दी जानी चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्हें बिजली के खंभे से लटकाकर फांसी दी जानी चाहिए, ताकि गरीबों, दलितों, कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों और वोटों को चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश जाए।
पप्पू यादव ने ज्ञानेश कुमार के लिए आतंकवादी और उग्रवादी से भी ज्यादा गंभीर शब्दों का इस्तेमाल किया। ये सभी बातें पप्पू यादव के आरोप और राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आई हैं।
'बिजली के खंभे से लटकाकर फांसी दी जाए'
पप्पू यादव ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को फांसी दी जानी चाहिए और उन्हें बिजली के खंभे से लटकाकर फांसी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए होना चाहिए ताकि गरीब, कमजोर, दलित, वंचित, ओबीसी और ईबीसी के अधिकार और वोट चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर एक बड़ा अपराध किया है। पप्पू यादव ने इसे संविधान का गला घोंटने और लोकतंत्र की हत्या करने से जोड़ा। उन्होंने अपने बयान में ज्ञानेश कुमार को आतंकवादी और उग्रवादी से भी बड़ा आतंकवादी तक बताया।
PM मोदी और अमित शाह पर भी लगाए आरोप
पप्पू यादव ने आगे आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को आरएसएस (RSS), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का समर्थन मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून मंत्री ने भी उनका साथ दिया है।
पप्पू यादव ने मांग की कि इस मामले में तुरंत अभियोग चलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक पूरे विपक्ष को एकजुट होकर आंदोलन करना चाहिए।
आखिर ज्ञानेश कुमार पर क्यों बढ़ा विवाद?
ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध हाल की एक रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi) ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में आपत्ति जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों का कहना था कि कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए।
रिपोर्ट में इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 (Form 6) में बदलाव और मतदाता डेटाबेस से जुड़े तकनीकी सिस्टम के नियंत्रण जैसे मुद्दों से बताया गया है।
SIR को लेकर सबसे ज्यादा सवाल
इस पूरे विवाद के केंद्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) भी है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े कुछ आदेशों और फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट में बताया गया कि फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए। यह वह फॉर्म है जिसका इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में फॉर्म-6 में ऐसा सवाल जोड़ा गया था जिसमें नए मतदाता या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पिछले एसआईआर की मतदाता सूची में मौजूद होने से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, विवेक जोशी ने मई में फाइल पर इस बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि नियमों में बदलाव के बिना फॉर्म-6 को इस तरह बदला नहीं जा सकता। इसके बाद सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को इस बदलाव को कथित तौर पर “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए इसे हटाने की मांग रिकॉर्ड पर रखी थी।
मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण पर भी सवाल
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने चुनावी रोल के डेटाबेस और उससे जुड़े सॉफ्टवेयर तक पहुंच के केंद्रीकरण पर सवाल उठाए।
रिपोर्ट में कहा गया कि परंपरागत तौर पर मतदाता सूची तैयार करने और नियंत्रित करने की जिम्मेदारी संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ (ERO) के पास रहती है। लेकिन दोनों आयुक्तों ने इस बात पर चिंता जताई कि क्या जमीन पर काम करने वाले अधिकारियों की इस डेटाबेस तक पहुंच सीमित की जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने बाद में चुनावी रोल से जुड़े आईटी सिस्टम और काम के बंटवारे को लेकर कैबिनेट सचिव को भी अपनी चिंताओं से अवगत कराया।
रिपोर्ट के बाद विपक्ष का हमला तेज
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को लेकर अपना हमला और तेज कर दिया। विपक्षी दलों की ओर से उनके पद पर बने रहने पर सवाल उठाए गए और उनके इस्तीफे की मांग की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष ने यह भी मांग उठाई कि सुप्रीम कोर्ट एसआईआर से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों की जांच करे। इसी राजनीतिक विवाद के बीच पप्पू यादव ने पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फांसी जैसी सख्त सजा की मांग कर दी।
राहुल गांधी भी मांग चुके हैं इस्तीफा
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने भी ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने रिपोर्ट के बाद ज्ञानेश कुमार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी हमला बोला और पूरे मामले को “वोट चोरी” से जोड़ते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विपक्ष का फोकस अब सिर्फ एसआईआर की प्रक्रिया पर नहीं बल्कि चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने के तरीके और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी आ गया है।
14 आपत्तियों ने बढ़ाया सियासी तापमान
चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय ढांचे में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 10 महीने में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट ने पूरे विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
इसी रिपोर्ट के बाद विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। वहीं पप्पू यादव ने इस राजनीतिक हमले को और आगे बढ़ाते हुए उनके खिलाफ फांसी जैसी सजा की मांग की है।
इस तरह एसआईआर, मतदाता सूची, फॉर्म-6 और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के राजनीतिक अभियान का बड़ा मुद्दा बन गया है।


