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मॉनसून सत्र से ठीक पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक, संसद में मोदी सरकार दिखाएगी ताकत, पेश होंगे ये बड़े बिल
Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र 2026 से पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक होगी। मोदी सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष नीट पेपर लीक, ऑपरेशन सिंदूर और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाएगा। जानिए पूरे सत्र का एजेंडा।
Parliament Monsoon Session 2026: देश की राजनीति में एक बार फिर भारी गरमा-गरमी देखने को मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने संसद का बेहद अहम मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले, यानी 19 जुलाई को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस महा-बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इस सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले अपने तमाम बड़े एजेंडे और विधेयकों की पूरी रूपरेखा देश के सामने रखेगी। वहीं दूसरी तरफ, विपक्षी दल भी इस बैठक में अपनी रणनीति साझा करेंगे कि वे किन-किन जनहित के मुद्दों को लेकर सदन के भीतर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। इस सत्र में केंद्र सरकार कई बेहद जरूरी और ऐतिहासिक कानून पास करा सकती है।
किरेन रिजिजू ने दी पूरी जानकारी
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस सत्र की आधिकारिक जानकारी साझा की है। उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि भारत सरकार की विशेष सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मॉनसून सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को बुलाने की अपनी मंजूरी दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई 2026 से पूरे दमखम के साथ शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय महत्व के जरूरी विषयों पर सार्थक बहस, गंभीर चर्चाओं और बड़े फैसलों के लिए यह सत्र 13 अगस्त 2026 तक लगातार जारी रहेगा।
नीट लीक और सिंदूर पर बवाल
इस बार संसद का माहौल बेहद गरमा-गरम रहने की पूरी उम्मीद है। विपक्षी पार्टियां हाल ही में हुए नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर सरकार को पूरी तरह बैकफुट पर लाने की कोशिश करेंगी। इसके अलावा, 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान हताहत हुए सैनिकों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दिए एक बयान पर भी भारी हंगामा होना तय माना जा रहा है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ सदन में विशेषाधिकार हनन का नोटिस तक थमा दिया है। इसके साथ ही, हालिया दिनों में अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी के बड़े विवाद को भी विपक्ष संसद के भीतर जोर-शोर से उठाने की रणनीति बना चुका है।
30 दिन जेल तो पद खत्म!
इस मॉनसून सत्र में सबसे ज्यादा नजरें 130वें संविधान संशोधन बिल पर टिकी रहने वाली हैं। इस प्रस्तावित कानून की बारीकी से जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) संसद में पेश करने से पहले 17 जुलाई को अपनी अंतिम रिपोर्ट को अपना सकती है। इस नए बिल के एक खास नियम ने देश की राजनीति में एक बहुत बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। इसके तहत प्रावधान है कि यदि देश का प्रधानमंत्री, किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री या केंद्र व राज्य सरकार का कोई भी मंत्री गंभीर अपराधों के मामलों में लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत (जेल) में रहता है, तो उसे तत्काल और अपने आप ही उसके पद से बर्खास्त मान लिया जाएगा।
बिखरा विपक्ष और कमजोर कुनबा
इस मानसून सत्र की शुरुआत से पहले देश के कई बड़े विपक्षी दलों को भारी राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है, जिससे संसद के भीतर उनकी ताकत काफी कम हुई है। विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 लोकसभा सांसद अचानक नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए। इतना ही नहीं, टीएमसी के 3 राज्यसभा सांसदों ने भी अपनी सदस्यता से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया है। इसके अलावा, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सांसद पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की असली शिवसेना में चले गए हैं। इससे पहले दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (आप) के भी 7 राज्यसभा सांसद सीधे बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। विपक्ष के इस बिखराव का असर सदन की कार्यवाही पर साफ दिखेगा।


