ब्रजभूषण शरण सिंह को भारी पड़ा पतंजलि से भिड़ना! 50 करोड़ की मानहानि का मुकदमा, 18 सितंबर को सुनवाई

Patanjali Sues Brij Bhushan: पतंजलि फूड्स ने ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। जानिए पतंजलि के घी पर दिए बयान से जुड़े इस विवाद की पूरी कहानी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 16 Sept 2026 12:45 PM IST
Patanjali Sues Brij Bhushan Sharan Singh
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Patanjali Sues Brij Bhushan: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह एक नई कानूनी मुसीबत में घिरते नजर आ रहे हैं। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह मामला पतंजलि के घी को लेकर ब्रजभूषण शरण सिंह की ओर से दिए गए कथित विवादित बयानों से जुड़ा हुआ है।

ब्रजभूषण शरण सिंह और बाबा रामदेव के बीच पतंजलि के उत्पादों को लेकर पहले भी बयानबाजी हो चुकी है। अब यह पुराना विवाद अदालत तक पहुंच गया है और पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए 50 करोड़ रुपये की मानहानि (Defamation) का दावा किया है।

कोर्ट में पहुंचा मामला

मामले में मंगलवार 15 सितंबर को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान ब्रजभूषण शरण सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता अदालत में पेश हुए और वकालतनामा दाखिल किया। उनके अधिवक्ता ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा।

अदालत ने अधिवक्ता की मांग को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है। अब ब्रजभूषण शरण सिंह की ओर से मामले में जवाब दाखिल किया जाएगा और इसके बाद अदालत आगे की कार्यवाही पर सुनवाई करेगी।

2022 में उठाए थे सवाल

यह पूरा मामला उस बयान से जुड़ा है, जिसमें ब्रजभूषण शरण सिंह ने पतंजलि के घी को लेकर सवाल उठाए थे। साल 2022 में भी ब्रजभूषण शरण सिंह ने एक सार्वजनिक मंच से पतंजलि के घी को ‘नकली’ बताया था।

उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे अपने घर में गाय या भैंस पालें और घर का घी इस्तेमाल करें। उनके इस बयान के बाद बाबा रामदेव और ब्रजभूषण शरण सिंह के बीच विवाद सामने आया था।

इसके बाद पतंजलि के उत्पादों को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का सिलसिला जारी रहा। अब इसी पुराने विवाद से जुड़ा मामला 50 करोड़ रुपये की मानहानि (Defamation Case) के दावे के साथ अदालत तक पहुंच चुका है।

पतंजलि ने आर्थिक नुकसान का भी किया दावा

पतंजलि फूड्स की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विक्रम मालवीय के अनुसार, ब्रजभूषण शरण सिंह के बयान से कंपनी की ब्रांड इमेज (Brand Image) को नुकसान पहुंचा। कंपनी की ओर से यह भी दावा किया गया कि विवादित बयान सार्वजनिक रूप से प्रसारित हुए और इसका असर कंपनी के शेयर मूल्य (Share Price) पर भी पड़ा।

पतंजलि फूड्स का दावा है कि इन बयानों की वजह से कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी आधार पर कंपनी ने पहले जिला कोर्ट में ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा पेश किया था।

कंपनी का कहना है कि ब्रजभूषण शरण सिंह के बयान बड़े स्तर पर सार्वजनिक हुए, जिससे उसके उत्पादों और कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसी को आधार बनाकर पतंजलि फूड्स ने मानहानि की कार्रवाई शुरू की।

जिला कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

इस मामले की शुरुआत जिला कोर्ट से हुई थी। शुरुआती सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से ब्रजभूषण शरण सिंह को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद मामला ट्रायल के चरण में पहुंचा।

सुनवाई के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (Electronic Evidence) को लेकर विवाद सामने आया। इन्हीं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े मुद्दों के कारण मामला आगे चलकर हाईकोर्ट तक पहुंचा।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पतंजलि फूड्स की ओर से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए। कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला भी दिया गया।

पिछली सुनवाई में अदालत ने ब्रजभूषण शरण सिंह से मामले में जवाब मांगा था। मंगलवार को हुई सुनवाई में उनकी ओर से अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुए और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अब मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

इंदौर में क्यों दायर हुआ मुकदमा?

पतंजलि फूड्स लिमिटेड का कार्यालय मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के विजय नगर क्षेत्र में स्थित है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विजय नगर, इंदौर का पता दर्ज है।

इसी वजह से कंपनी की ओर से मानहानि का मामला इंदौर में दायर किया गया है। मामला जिला कोर्ट से होते हुए अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है और अदालत में इसकी सुनवाई चल रही है।

ब्रजभूषण और पतंजलि का विवाद पुराना

ब्रजभूषण शरण सिंह और पतंजलि समूह के बीच विवाद कोई नया नहीं है। साल 2022 में ब्रजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव और पतंजलि के उत्पादों को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे।

उस दौरान उन्होंने पतंजलि ब्रांड के नाम को लेकर भी आपत्ति जताई थी। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी होती रही।

अगस्त 2026 में भी ब्रजभूषण शरण सिंह ने पतंजलि के उत्पादों और देश में मिल रहे कथित मिलावटी घी को लेकर बाबा रामदेव पर सवाल उठाए थे। यानी 2022 में शुरू हुआ यह विवाद समय-समय पर फिर सामने आता रहा है और अब मामला सीधे अदालत तक पहुंच गया है।

पतंजलि के घी पर 2025 में लगा था जुर्माना

पतंजलि के घी को लेकर साल 2025 में पिथौरागढ़ में भी कार्रवाई हुई थी। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मानकों के अनुसार घी नहीं पाए जाने के मामले में पतंजलि पर जुर्माना लगाया था।

दरअसल, साल 2020 में पिथौरागढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पतंजलि के घी का नमूना जांच के लिए लिया था। पहली जांच में यह नमूना पास नहीं हुआ था।

इसके बाद कंपनी ने नमूने को दोबारा जांच के लिए भेजा। दूसरी जांच में भी घी निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं पाया गया। इसके बाद इस मामले में कोर्ट में केस दर्ज किया गया।

मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने पतंजलि पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। अब पुराने विवाद और पतंजलि के घी को लेकर दिए गए बयानों के बीच ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा अदालत में चल रहा है।

18 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले में ब्रजभूषण शरण सिंह की ओर से जवाब दाखिल किया जाना है। इसके बाद अदालत में मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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