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पटना में छात्रों-किसानों के प्रदर्शन पर बवाल, छात्र-छात्राएं बेहोश, लाठीचार्ज के बाद कई हिरासत में
पटना में छात्र, किसान और मजदूर संगठनों के लोक भवन मार्च के दौरान जमकर हंगामा हुआ। बैरिकेडिंग टूटने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन और लाठीचार्ज किया।
Patna Protest News: बिहार की राजधानी पटना में सोमवार, 28 सितंबर को छात्र, किसान और मजदूर संगठनों के प्रदर्शन के दौरान जमकर हंगामा हुआ। गांधी मैदान से निकले मार्च को पुलिस ने जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शन में किसान, खेत मजदूर, छात्र और विभिन्न वामपंथी संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे। मार्च में महंगाई, बेरोजगारी, बाढ़-सूखा, रोजगार, शिक्षा और कृषि से जुड़े मुद्दे उठाए गए। 28 सितंबर को प्रस्तावित लोक भवन मार्च की तैयारियां पहले से विभिन्न जिलों में की जा रही थीं।
जेपी गोलंबर पर टूटी बैरिकेडिंग
प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से आगे बढ़ते हुए जेपी गोलंबर पहुंचे। यहां पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। काफी देर तक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और खींचतान होती रही। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ गए। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान कुछ छात्र-छात्राएं बेहोश भी हो गए।
डाकबंगला पहुंचने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए रास्ते बंद किए। भीड़ बढ़ने और बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश के बीच पुलिस ने वाटर कैनन चलाया। स्थिति नहीं संभलने पर लाठीचार्ज किया गया।
नर्सिंग-पैरामेडिकल छात्र भी आंदोलन में शामिल
इस प्रदर्शन में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से जुड़े नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इन छात्रों की अपनी अलग मांगें थीं और वे विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति तथा नियमित शैक्षणिक सत्र समेत परीक्षा से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे।
छात्रों का आरोप है कि परीक्षा परिणाम में बड़ी संख्या में छात्र फेल हुए हैं और इसी को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी है। हालांकि, 80 प्रतिशत छात्रों के फेल होने और छात्रों के बेहोश होने जैसे विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध ताजा रिपोर्टों से नहीं हो सकी है, इसलिए इन्हें आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य के रूप में पेश करने से बचना बेहतर होगा।
पत्थरबाजी के भी आरोप
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ने के साथ पत्थरबाजी की भी सूचना सामने आई। पुलिस अधिकारियों के घायल होने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है। ऐसे में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के लिए फिर से बल प्रयोग किया और कई लोगों को हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि एसपी कमल मीणा के हेलमेट पर पत्थर लगा है।
डाकबंगला पर अफरातफरी
पुलिस की कार्रवाई के बाद डाकबंगला चौराहे पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में भागते नजर आए। पुलिस ने इलाके को खाली कराने की कार्रवाई की और कई प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर हिरासत में लिया। प्रदर्शन के कारण शहर के इस महत्वपूर्ण इलाके में यातायात भी प्रभावित हुआ।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन से जुड़े संगठनों ने कई मुद्दों को लेकर मार्च का आह्वान किया था। इनमें प्रमुख रूप से:
- बाढ़ पीड़ितों को राहत और मुआवजा
- महंगाई पर नियंत्रण
- बेरोजगारों को रोजगार
- भ्रष्टाचार और अपराध पर लगाम
- कृषि संकट और किसानों की समस्याओं का समाधान
- कृषि ऋण माफी
- नई उर्वरक नीति में बदलाव
- नई शिक्षा नीति का विरोध
- शुल्क वृद्धि और लेबर कोड वापस लेने की मांग
- महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण
- बेरोजगारों और बुजुर्गों के लिए ₹10 हजार मासिक पेंशन
बताया गया है कि इन मांगों को लेकर ही लोक भवन मार्च का आयोजन किया गया था।


