CEC विवाद में Piyush Goyal का पलटवार, राहुल गांधी को बताया बचकाना; Congress पर लगाए गंभीर आरोप!

Piyush Goyal on Election Commission: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार किया है।

Priya Singh Bisen
Published on: 13 Oct 2026 4:30 PM IST
Piyush Goyal on Election Commission
X

Piyush Goyal on Election Commission

Piyush Goyal on Election Commission: चुनाव आयोग (Election Commission of India) की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार किया है।

उन्होंने कांग्रेस पर संविधान के हर पहलू को कमजोर करने का आरोप लगाया और राहुल गांधी के रवैये को बचकाना बताया। पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने से पहले अपने पुराने रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र और स्वायत्त तरीके से काम करने का अवसर दिया है। इसके उलट, उनके मुताबिक कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पद दिए गए और उन्हें सांसद, मंत्री तथा राज्यपाल तक बनाया गया। पीयूष गोयल ने अपने आरोपों के समर्थन में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव अधिकारियों के उदाहरण भी दिए।

राहुल गांधी पर पीयूष गोयल का सीधा हमला

पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने पुराने कार्यकाल और फैसलों को नजरअंदाज कर देती है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने चुनाव आयोग को देशहित और जनहित में स्वतंत्र रूप से काम करने की स्वायत्तता दी है।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, मौजूदा सरकार ने चुनाव आयोग के अधिकारियों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं की और उन्हें ईमानदारी से काम करने का अवसर दिया। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले यह बताना चाहिए कि उसके शासनकाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कैसा व्यवहार किया गया था।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय एक मुख्य चुनाव आयुक्त को पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ाया गया, एक को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और दो मुख्य चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के एक अधिकारी के खिलाफ शिकायत के बावजूद कांग्रेस सरकार ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की।

टीएन शेषन का उदाहरण देकर क्या बोले पीयूष गोयल?

केंद्रीय मंत्री ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पहचान निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए रही है। पीयूष गोयल के मुताबिक, कांग्रेस ने वर्ष 1999 में टीएन शेषन को लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने का अवसर दिया था।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी ऐसे अधिकारी को चुनाव लड़ने का मौका देना, जिसकी निष्पक्षता की चर्चा होती रही हो, उसे राजनीतिक रूप से पुरस्कृत करने जैसा नहीं था। यह सवाल उठाकर उन्होंने कांग्रेस के चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई।

हालांकि, यह पीयूष गोयल की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। इन उदाहरणों को सामने रखकर उन्होंने कांग्रेस के पुराने फैसलों और चुनाव आयोग के साथ उसके व्यवहार पर सवाल खड़े किए।

एमएस गिल को लेकर भी कांग्रेस पर साधा निशाना

पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि एमएस गिल वर्ष 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, वर्ष 2000 में पद पर रहते हुए उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

पीयूष गोयल ने सवाल किया कि क्या यह सम्मान उनके काम को पुरस्कृत करने जैसा नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटने के तीन साल बाद एमएस गिल कांग्रेस में शामिल हुए। वर्ष 2004 में वह राज्यसभा पहुंचे और वर्ष 2008 में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया गया।

केंद्रीय मंत्री ने इन घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग के पद की गरिमा को कम किया और अधिकारियों का राजनीतिक इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इन उदाहरणों से कांग्रेस के पुराने रवैये को लेकर सवाल उठते हैं।

टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर के मामलों का भी किया जिक्र

पीयूष गोयल ने टीकाराम मीणा का नाम लेते हुए कहा कि वह केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रहे थे। उनके अनुसार, एक साल बाद उन्हें कांग्रेस की राजस्थान घोषणापत्र टीम में शामिल कर लिया गया।

उन्होंने केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रहे रतन यू केलकर का भी जिक्र किया। पीयूष गोयल के मुताबिक, मई 2026 में केलकर इस पद पर थे और चुनाव के तुरंत बाद केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने उन्हें अपना मुख्य सचिव घोषित कर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाया कि चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों को बाद में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करना क्या राजनीतिक लाभ पहुंचाने जैसा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में मदद करने के बदले पद दिए जाने की आशंका से ऐसी नियुक्तियों पर सवाल खड़े होते हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर क्या बोले?

चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर बात करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि पहले सरकार अपनी पसंद के व्यक्ति को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त कर सकती थी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने वर्ष 2023 में इस प्रक्रिया से जुड़ा कानूनी प्रावधान किया।

उनके मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति में शामिल किया गया। पीयूष गोयल ने कहा कि अब प्रधानमंत्री के साथ नेता प्रतिपक्ष भी मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया में भाग लेते हैं। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार के कदम के रूप में पेश किया।

SIR पर भी कांग्रेस को घेरा

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) को लेकर भी पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने खुद एसआईआर की तारीफ की है।

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता शशि थरूर और रमेश चेन्नीथला का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने केरल में कांग्रेस की जीत के संदर्भ में एसआईआर का जिक्र किया था। उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री और अधीर रंजन चौधरी के बयानों का भी उल्लेख किया। पीयूष गोयल के मुताबिक, अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चुनाव कराने के तरीके की तारीफ की थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस के कुछ नेता चुनाव आयोग और एसआईआर की तारीफ कर चुके हैं, तो अब पार्टी की ओर से वोट चोरी के आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं। पीयूष गोयल ने इन आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताया।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सियासी बहस तेज

पीयूष गोयल के बयान से साफ है कि बीजेपी चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस के सवालों का जवाब उसके पुराने कार्यकाल और अधिकारियों की नियुक्तियों के उदाहरणों से देना चाहती है। दूसरी ओर, राहुल गांधी और कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस का केंद्र चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवाल बने हुए हैं। पीयूष गोयल ने कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और तथ्यों के आधार पर आगे की चर्चा महत्वपूर्ण होगी।

Priya Singh Bisen
ABOUT THE AUTHOR

Priya Singh Bisen

Content Writer Mail ID - Priyasinghbisen96@gmail.comPriyasinghbisen96@gmail.com

Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

Next Story