PM Modi Convoy Details: पायलट कार से एम्बुलेंस तक...कैसा होता है PM मोदी का काफिला? जानें फ्लीट में कितनी गाड़ियां होती है शामिल

PM Modi Convoy Details: PM मोदी का काफिला आखिर कैसा होता है? पायलट कार, SPG सुरक्षा, एम्बुलेंस और हाई-टेक गाड़ियों से लैस इस फ्लीट में कितनी कारें शामिल होती हैं? जानिए क्यों PM मोदी अब पेट्रोल-डीजल की जगह EV गाड़ियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

Harsh Srivastava
Published on: 13 May 2026 1:14 PM IST (Updated on: 13 May 2026 1:14 PM IST)
PM Modi Convoy Details: पायलट कार से एम्बुलेंस तक...कैसा होता है PM मोदी का काफिला? जानें फ्लीट में कितनी गाड़ियां होती है शामिल
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PM Modi Convoy Details: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दूरदर्शी सोच और कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की भावुक अपील की थी। लेकिन इस बार पीएम ने केवल सलाह नहीं दी, बल्कि खुद मिसाल पेश करते हुए एक ऐसा फैसला लिया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। प्रधानमंत्री ने अपने सुरक्षा काफिले को आधा करने का निर्देश दिया है और साथ ही इसमें पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की जगह अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कारों (EVs) को शामिल करने को कहा है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर पीएम के काफिले का सुरक्षा चक्र कैसा होता है और इसमें कितनी गाड़ियां चलती हैं।

SPG का अभेद्य सुरक्षा चक्र और गाड़ियों का गणित

प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी 'स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप' यानी एसपीजी (SPG) के पास होती है। पीएम के काफिले में कितनी गाड़ियां होंगी और वे किस क्रम में चलेंगी, यह पूरी तरह से एसपीजी प्रोटोकॉल और गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस पर निर्भर करता है। सुरक्षा कारणों से इन गाड़ियों की संख्या कभी भी फिक्स नहीं होती। यह स्थान, खतरे के स्तर और परिस्थितियों के हिसाब से बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में संसद जाते समय काफिला छोटा हो सकता है, जबकि किसी बड़े रोड शो के दौरान इसमें गाड़ियों की संख्या बढ़ जाती है। सामान्य तौर पर एक मानक काफिले में 13 से 17 गाड़ियां शामिल होती हैं, जो अब पीएम के निर्देश के बाद काफी कम नजर आएंगी।

काफिले में शामिल खास गाड़ियां और उनकी भूमिका

पीएम के काफिले की हर गाड़ी का अपना एक विशेष मकसद होता है। सबसे मुख्य हिस्सा 'पीएम बॉक्स' होता है, जिसमें प्रधानमंत्री की बुलेटप्रूफ रेंज रोवर या मर्सिडीज मेबैक जैसी हाई-एंड कारें होती हैं। इनके साथ ही जैमर से लैस टोयोटा फॉर्च्युनर चलती हैं, जो किसी भी रिमोट कंट्रोल सिग्नल या बम विस्फोट को रोकने की क्षमता रखती हैं। काफिले में एक आधुनिक कम्युनिकेशन वाहन होता है जो सैटेलाइट से जुड़ा रहता है और एक एम्बुलेंस हमेशा मेडिकल इमरजेंसी के लिए तैयार रहती है। अब पीएम के नए निर्देश के बाद, इन शक्तिशाली एसयूवी की जगह हम जल्द ही हाई-परफॉरमेंस इलेक्ट्रिक कारों को दौड़ते हुए देखेंगे, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगी।

पायलट से लेकर टेल कार तक: ऐसा होता है फॉर्मेशन

प्रधानमंत्री के काफिले का चलना एक बेहद जटिल और अनुशासित प्रक्रिया है। काफिले की शुरुआत एक 'पायलट वाहन' से होती है, जिसका नेतृत्व दिल्ली या संबंधित राज्य पुलिस का एसीपी रैंक का अधिकारी करता है। इसके ठीक पीछे पुलिस की सुरक्षा विंग की गाड़ियां होती हैं। इसके बाद मुख्य हिस्सा आता है जहां प्रधानमंत्री की कार के साथ एसपीजी के कमांडो और जरूरी स्टाफ होता है। रास्ते की निगरानी के लिए एक 'रूट इंस्पेक्शन' वाहन चलता है, जिसमें पुलिस इंस्पेक्टर मौजूद रहता है। काफिले के सबसे अंत में 'टेल कार' होती है, जो ट्रैफिक पुलिस के समन्वय और अंतिम सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

काले रंग की गाड़ियां और सुरक्षा का कड़ा प्रोटोकॉल

अक्सर आपने देखा होगा कि पीएम के काफिले की लगभग सभी गाड़ियां काले रंग की होती हैं। यह केवल स्टाइल के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है ताकि काफिले को एकरूपता मिले और दुश्मन भ्रमित रहे। सुरक्षा की एक परत राज्य पुलिस की होती है, तो दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण परत एसपीजी की। पीएम मोदी का अपने काफिले को छोटा करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का फैसला यह दर्शाता है कि वे न केवल सुरक्षा बल्कि देश की ऊर्जा बचत के प्रति भी उतने ही गंभीर हैं।

Harsh Srivastava

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