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PM Modi Gold Appeal: PM मोदी ने देशवासियों को सोना खरीदने से क्यों किया मना? सामने आई ये 3 बड़ी वजह
PM Modi gold buying warning: PM मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील क्यों की? US-ईरान युद्ध, गिरते विदेशी मुद्रा भंडार और महंगे डॉलर के बीच जानिए इस फैसले के पीछे की 3 बड़ी आर्थिक वजहें।
PM Modi gold buying warning: पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध पर टिकी हैं। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई इस जंग ने न केवल वैश्विक शांति को खतरे में डाला है, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी भारी उथल-पुथल मचा दी है। भारत के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाली पेट्रोलियम और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे मुश्किल वक्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक सेहत बचाने के लिए नागरिकों से एक भावुक और रणनीतिक अपील की है। उन्होंने कहा है कि इस संकट से निपटने के लिए हमें अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदना चाहिए।
सोना न खरीदने के पीछे का आर्थिक गणित
भारत में सोने का मोह जगजाहिर है, लेकिन यह शौक संकट के समय अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण आयातक है और हर साल करीब 6 लाख करोड़ रुपये का सोना विदेशों से मंगाता है। पीएम मोदी ने समझाया कि जब हम सोना आयात करते हैं, तो हमें भुगतान डॉलर में करना होता है, जिससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार कम होता है। युद्ध की वजह से डॉलर लगातार महंगा हो रहा है और रुपया दबाव में है। पीएम ने याद दिलाया कि इतिहास में भारतीयों ने देश के लिए सोना दान किया है, आज सिर्फ एक साल तक नया सोना न खरीदकर हम देश की बड़ी सेवा कर सकते हैं।
ज्वेलरी इंडस्ट्री और शेयर बाजार में मची हलचल
प्रधानमंत्री की इस अपील का सीधा असर बाजार पर भी दिखने लगा है। देशभर के ज्वेलरी कारोबारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि लोगों ने खरीदारी बंद कर दी, तो इस सेक्टर से जुड़े लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का क्या होगा। वहीं, शेयर बाजार के निवेशकों ने भी इसे भविष्य के आर्थिक संकेतों के तौर पर लिया है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि पुराने सोने की रिसाइक्लिंग (Recycling) के जरिए इंडस्ट्री का काम चलता रह सकता है, जिससे नए आयात की जरूरत नहीं पड़ेगी और डॉलर की बचत होगी।
ईंधन और खाद्य तेल में कटौती का 'मास्टर प्लान'
सिर्फ सोना ही नहीं, पीएम मोदी ने पेट्रोल, डीजल और कुकिंग ऑयल के इस्तेमाल में भी कटौती की सलाह दी है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम (WFH) अपनाएं और निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन या मेट्रो का उपयोग करें। भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है और युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $105 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ऐसे में ईंधन बचाना सीधे तौर पर देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाने जैसा है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव
आरबीआई (RBI) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि युद्ध शुरू होने के बाद से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से गिरा है। फरवरी के अंत में जो भंडार करीब 728 अरब डॉलर के सर्वकालिक स्तर पर था, वह मई के पहले हफ्ते तक घटकर 690 अरब डॉलर पर आ गया है। यानी महज दो महीनों में देश ने करीब 38 अरब डॉलर का भंडार खो दिया है। पीएम मोदी का यह 'क्राइसिस मैनेजमेंट' प्लान असल में 'आत्मनिर्भरता' की एक नई परीक्षा है, ताकि युद्ध के लंबे खिंचने की स्थिति में भी भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके।


