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'अंडर कॉन्फिडेंट, नर्वस PM...',भाषण में अटके प्रधानमंत्री तो विपक्ष ने कसा तंज, शेयर किया VIDEO
PM Modi Stumbles: लाल किले से स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान पीएम मोदी के कुछ देर अटकने पर विपक्ष ने निशाना साधा। पवन खेड़ा और अरविंद केजरीवाल ने वीडियो शेयर कर तंज कसा, वहीं कांग्रेस ने 'दिमागी नक्सल' और महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सवाल उठाए।
Image Source- Social Media
PM Modi Stumbles: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण को लेकर शनिवार को विपक्षी नेताओं ने निशाना साधा। लाल किले (Red Fort) से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी जब 2014 में केंद्र में बीजेपी (BJP) की सरकार आने के बाद भारत की बायोइकोनॉमी (Bioeconomy) में हुई प्रगति के बारे में बात कर रहे थे, तभी वह कुछ देर के लिए अटकते हुए नजर आए। इस दौरान उन्हें अपने पेपर नोट्स (Paper Notes) देखने पड़े।
पीएम मोदी के भाषण के इसी हिस्से का वीडियो विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया (Social Media) पर शेयर किया और उनकी डिलीवरी को लेकर सवाल उठाए।
पवन खेड़ा ने टेलीप्रॉम्प्टर को लेकर कसा तंज
कांग्रेस (Congress) नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) ने पीएम मोदी के भाषण वाले वीडियो का हिस्सा सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, “सुपरह्यूमन बिना टेलीप्रॉम्प्टर के।” पवन खेड़ा के इस पोस्ट के जरिए पीएम मोदी के बिना टेलीप्रॉम्प्टर (Teleprompter) भाषण देने को लेकर तंज कसा गया।
अरविंद केजरीवाल ने भी शेयर किया वीडियो
आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने भी पीएम मोदी के भाषण का यही वीडियो क्लिप शेयर किया। उन्होंने पीएम मोदी को “अंडर-कॉन्फिडेंट, नर्वस और शकी प्रधानमंत्री” बताया।
विपक्ष की यह प्रतिक्रिया पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान उनके कुछ पल के लिए अटकने और फिर पेपर नोट्स देखने के बाद सामने आई।
चार साल में सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार करीब 75 मिनट तक स्वतंत्रता दिवस भाषण (Independence Day Speech) दिया। यह पिछले चार साल में उनका सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन रहा। इससे पहले 2023 में पीएम मोदी ने करीब 90 मिनट तक देश को संबोधित किया था।
हालांकि करीब 75 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने कई अहम मुद्दों को छुआ। उनके संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence), सेमीकंडक्टर (Semiconductors), नक्सलवाद (Naxalism), एमएसएमई (MSMEs), उच्च शिक्षा (Higher Education) और कोचिंग क्लासेज (Coaching Classes) जैसे मुद्दे शामिल रहे।
'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर भी कांग्रेस का हमला
विपक्ष का हमला सिर्फ पीएम मोदी के भाषण की डिलीवरी तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के 'दिमागी नक्सल' या वैचारिक नक्सल (Ideological Naxal) वाले बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
स्वतंत्रता दिवस के भाषण में पीएम मोदी ने कहा था कि सशस्त्र माओवादी हिंसा (Maoist Violence) अब अपनी आखिरी सांसें गिन रही है, लेकिन कुछ संस्थानों में वैचारिक नक्सली सोच अभी भी मौजूद है। उन्होंने लोगों और अधिकारियों से ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की अपील की, जिन्हें उन्होंने 'दिमागी नक्सल' बताया। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि ऐसी ताकतें युवाओं को अराजकता की ओर धकेल सकती हैं।
‘यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी’
कांग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने 'दिमागी नक्सल' शब्द को राजनीतिक बयानबाजी बताया। उन्होंने इसकी तुलना बीजेपी सरकार की ओर से पहले इस्तेमाल किए गए 'अर्बन नक्सल' (Urban Naxal) शब्द से की।
जयराम रमेश ने कहा कि दो या तीन साल पहले प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक विरोधियों को 'अर्बन नक्सल' कहा था। उस समय संसद में सवाल उठा था कि 'अर्बन नक्सल' की परिभाषा क्या है। उनके मुताबिक गृह मंत्री ने जवाब दिया था कि 'अर्बन नक्सल' नाम की कोई चीज नहीं है और इसकी कोई परिभाषा भी नहीं है।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि अब प्रधानमंत्री लाल किले से अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए 'मेंटल नक्सल' यानी वैचारिक नक्सल शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जातीय जनगणना को लेकर भी कांग्रेस ने घेरा
जयराम रमेश ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि पहले जिन मुद्दों को लेकर आलोचकों पर निशाना साधा गया, बाद में उन्हीं मांगों को सरकार ने अपना लिया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने जातीय जनगणना (Caste Census) की मांग को पहले 'अर्बन नक्सल' सोच बताया था, लेकिन करीब एक साल पहले खुद जाति आधारित जनगणना की घोषणा कर दी। जयराम रमेश ने कहा कि 12 साल बाद भी प्रधानमंत्री के राजनीतिक भाषण में कुछ नया नहीं था।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी हमला
कांग्रेस ने पीएम मोदी के महिला आरक्षण (Women's Reservation) से जुड़े बयान की भी आलोचना की। पार्टी ने सरकार पर महिला आरक्षण कानून और प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को लेकर “बेईमानी भरी पिच” देने का आरोप लगाया।
जयराम रमेश ने कहा कि संसद ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) को सर्वसम्मति से पारित किया था, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक मोदी सरकार ने इसके लागू होने में जानबूझकर देरी की।
उन्होंने कहा कि संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से कानून पारित किया था, लेकिन मोदी सरकार की कथित दोहरे रवैये वाली राजनीति के कारण यह 2024 के चुनाव से ही लागू नहीं हो सका। जयराम रमेश ने दावा किया कि इस अधिनियम को 16 अप्रैल 2026 की शाम देर से जल्दबाजी और चुपचाप अधिसूचित किया गया।
राजीव गांधी और कांग्रेस के योगदान का भी जिक्र
जयराम रमेश ने महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व (Women's Political Representation) की नींव रखने का श्रेय कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) को भी दिया। उन्होंने कहा कि 73वें और 74वें संविधान संशोधनों (73rd and 74th Constitutional Amendments) के जरिए महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए आधार तैयार किया गया था।
इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान कुछ देर के लिए अटकने से शुरू हुआ विपक्ष का हमला उनके भाषण में उठाए गए 'दिमागी नक्सल', जातीय जनगणना, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों तक पहुंच गया।


