PoK में जन आक्रोश ने तोड़ी 'पाक' की अकड़! शहबाज सरकार के बदले सुर, प्रदर्शनकारियों को बताया 'देशभक्त'

PoK Protest Crisis Update: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में लंबे समय से जारी जनआंदोलन के बीच शहबाज शरीफ सरकार के सुर अचानक बदल गए हैं। सरकार के वरिष्ठ सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने JAAC के 99 प्रतिशत सदस्यों को 'देशभक्त' बताया और बातचीत का संकेत दिया।

Harsh Srivastava
Published on: 9 Aug 2026 5:56 PM IST (Updated on: 9 Aug 2026 6:06 PM IST)
PoK में जन आक्रोश ने तोड़ी पाक की अकड़! शहबाज सरकार के बदले सुर, प्रदर्शनकारियों को बताया देशभक्त
X

PoK Protest Crisis Update: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पिछले दो महीनों से जारी जबर्दस्त जनाक्रोश और विरोध प्रदर्शनों के आगे आखिरकार शहबाज शरीफ सरकार को झुकना ही पड़ा है। जिस अवामी एक्शन कमेटी को कुछ हफ्तों पहले तक इस्लामाबाद की हुकूमत कानून-व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बता रही थी, अब उसी के कार्यकर्ताओं की तारीफों के कसीदे पढ़े जा रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने अचानक अपना कड़ा रुख नरम करते हुए न केवल आंदोलनकारियों की खुलकर सराहना की है, बल्कि उन्हें देश के प्रति वफादार बताते हुए सीधी बातचीत का औपचारिक न्योता भी भेज दिया है।

'99 प्रतिशत लोग देशभक्त हैं' – राणा सनाउल्लाह

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के वरिष्ठ राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने शनिवार को आयोजित एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए यह चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के 99 प्रतिशत सदस्य पूरी तरह से 'देशभक्त' हैं। उन्होंने वादा किया कि यदि आगामी चुनावों में उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) को दो-तिहाई बहुमत हासिल होता है, तो उनकी सरकार सबसे पहले JAAC के प्रतिनिधियों को मेज पर बिठाकर उनकी सभी पुरानी मांगों का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान निकालेगी।

कल तक आतंकी ठहराने वाली हुकूमत का यू-टर्न

राणा सनाउल्लाह का यह नया रुख पूरे क्षेत्र में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि बीते दिनों तक सत्ताधारी पार्टी का रवैया पूरी तरह दमनकारी था। पहले सरकार और उसकी एजेंसियों का दावा था कि आंदोलनकारी समूहों के बीच प्रतिबंधित खूंखार आतंकी संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) के उग्रवादी घुसे हुए हैं। इसी बहाने का सहारा लेकर निर्दोष नागरिकों और युवाओं पर भीषण सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया गया था। लेकिन अब अचानक सभी को देशभक्त बताना सरकार की गहरी कूटनीतिक असफलता और रणनीति में आई मजबूरी को साफ बयां करता है।

12 शरणार्थी सीटों को लेकर क्यों भड़का है जनाक्रोश?

PoK में नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रही संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी में छात्र, स्थानीय व्यापारी, वकीलों की संस्थाएं, ट्रांसपोर्टर और कई नागरिक समूह एकजुट हैं। आंदोलनकारियों की सबसे मुख्य मांग 12 विवादित शरणार्थी सीटों की व्यवस्था को हमेशा के लिए समाप्त करना है। JAAC का सीधा आरोप है कि इस्लामाबाद में बैठी कठपुतली सरकारें इन्हीं सीटों के दम पर अपनी मनपसंद प्रांतीय सरकारें बनाती और गिराती हैं। जून के महीने में जब क्षेत्रीय प्रशासन ने इस संगठन पर पाबंदी लगाई, तो पूरे इलाके में हिंसक विरोध की ज्वाला धधक उठी।

मौतों के आंकड़ों पर UN ने जाहिर की गहरी चिंता

आंदोलनकारी संगठन का सनसनीखेज दावा है कि चुनावी दौर शुरू होने के बाद से अब तक 40 से अधिक आम नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि जून के प्रथम सप्ताह से अब तक लगभग 400 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। दूसरी ओर पाक हुकूमत इन गंभीर आंकड़ों को मनगढ़ंत बताकर खारिज कर रही है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 7 अगस्त को ही अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुई बर्बर पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई है।

आखिरी चरण के चुनाव पर टिकीं पूरी दुनिया की निगाहें

PoK में चुनावी प्रक्रिया का अंतिम और बेहद संवेदनशील दौर अभी बाकी है। चुनाव के ठीक मुहाने पर शहबाज शरीफ सरकार द्वारा पाला बदलने से कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और अंदरूनी बगावत से घबराकर ही सरकार ने यह नया पैंतरा फेंका है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इस जुबानी वादे से भड़के हुए लोग शांत होते हैं या फिर आजादी और अपने अधिकारों की यह जंग और उग्र रूप धारण करती है।

Harsh Srivastava
ABOUT THE AUTHOR

Harsh Srivastava

Content Writer Mail ID - harshsri764@gmail.comharshsri764@gmail.com

हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

Next Story