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भगवान गलत काम करने से क्यों नहीं रोकते? Premanand Maharaj ने दिया ऐसा जवाब कि सुनकर बदल जाएगी सोच
Premanand Maharaj: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने कर्म, जीवन और जिम्मेदारी पर ऐसा जवाब दिया कि भक्त भावुक हो गए।
Premanand Maharaj: वृंदावन की गलियों में जब भी भक्ति की बात होती है, तो प्रेमानंद महाराज का नाम अपने आप जुबां पर आ जाता है। दूर-दूर से आए श्रद्धालु, शांत चेहरे, नम आंखें और दिल में ढेरों सवाल… यहां हर दिन कुछ ऐसा होता है, जो सीधे आत्मा को छू जाता है। हाल ही में ऐसा ही एक सवाल महाराज जी से पूछा गया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दिया। सवाल था – अगर हम परमात्मा के अंश हैं और भगवान हमारे कर्मों का हिसाब रखते हैं, तो फिर वे हमें गलत कर्म करने से रोकते क्यों नहीं? जवाब सुनकर वहां सन्नाटा छा गया, क्योंकि बात सीधी दिल में उतरने वाली थी।
प्रेमानंद महाराज ने समझाया जीवन का उद्देश्य
प्रेमानंद महाराज ने बड़ी सहजता से कहा कि भगवान ने मनुष्य को जीवन दिया है, बुद्धि दी है, बल दिया है और इस संसार रूपी बाजार में भेजा है। अब यह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह इन सबका उपयोग कैसे करता है। उन्होंने समझाया कि अगर आप गलत कर्म करेंगे तो उसका फल भी मिलेगा और अगर सही कर्म करेंगे तो उसका पुरस्कार भी मिलेगा। यही जीवन का नियम है। भगवान ने हमें चुनने की आज़ादी दी है, ताकि हम अपने कर्मों से अपना रास्ता खुद तय करें।
यह मृत्यु लोक है, कर्मों का फल यहीं तय होता है
महाराज जी ने आगे कहा कि यह संसार मृत्यु लोक है, लेकिन इसके आगे भी कई लोक हैं – स्वर्ग लोक, महर लोक, जन लोक, तप लोक, सत्य लोक, वैकुंठ, कैलाश, साकेत और गोलोक। इंसान जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल पाता है और उसी दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पिता बच्चे को 100 रुपये अच्छे कामों के लिए देता है, लेकिन अगर बच्चा उनसे गलत काम कर ले तो क्या दोष पिता का होगा? दोष तो उपयोग करने वाले का होगा।
वाणी, दृष्टि और विचार – सबका सही उपयोग जरूरी
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भगवान ने हमें वाणी दी है, तो गाली देने के लिए नहीं, बल्कि राम-राम और राधा-राधा कहने के लिए दी है। आंखें दी हैं तो बुरा देखने के लिए नहीं, अच्छा देखने के लिए। हाथ दिए हैं तो गलत करने के लिए नहीं, सेवा और अच्छे कर्म करने के लिए। विचार दिए हैं तो नकारात्मक सोच के लिए नहीं, बल्कि सकारात्मक जीवन के लिए। उन्होंने साफ कहा कि मनुष्य जन्म इसलिए मिला है ताकि हम बुरी आदतों को छोड़ें और खुद को बेहतर बनाएं।
भगवान ने सब कुछ दिया, अब जिम्मेदारी हमारी
महाराज जी ने अंत में कहा कि भगवान ने हम पर बहुत कृपा की है। बुद्धि, शक्ति और विवेक दिया है, अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इनका सदुपयोग करें, दुरुपयोग नहीं। अच्छे बनें, अच्छा सोचें और अच्छा करें, यही सच्ची भक्ति है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों की पूर्ण सत्यता का दावा Newstrack नहीं करता है।


