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Punjab Congress में बड़ी दरार! अमित शाह से मिले रंधावा, दिल्ली से चंडीगढ़ तक हड़कंप
Punjab Congress: पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। चरणजीत सिंह चन्नी के शक्ति प्रदर्शन और सुखजिंदर सिंह रंधावा की अमित शाह से मुलाकात के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। जानिए पूरा मामला।
Punjab Congress: पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. आलाकमान द्वारा संगठन में किए गए हालिया बदलावों ने पार्टी के भीतर बगावत की एक ऐसी आग सुलगती है, जिसने पूरी सियासत को हिलाकर रख दिया है. अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपे जाने से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मोरिंडा में अपने आवास पर एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की देश के गृह मंत्री अमित शाह से हुई एक गुप्त मुलाकात ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मचा दी है, हालांकि रंधावा इसे पूरी तरह एक साधारण मुलाकात बता रहे हैं.
चन्नी के घर जुटी दिग्गजों की फौज
आगामी विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी पंजाब कांग्रेस के लिए यह अंदरूनी गुस्सा एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है. पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के सरकारी आवास पर पूरे 4 घंटे तक बंद कमरे में एक बेहद अहम बैठक चली. इस महाबैठक में 60 से अधिक कद्दावर नेता एक साथ एकजुट हुए, जिनमें हाल ही में घोषित की गई चुनाव कमेटियों के कई वरिष्ठ सदस्य और 20 से अधिक पूर्व तथा मौजूदा विधायक शामिल थे. बैठक में हिस्सा लेने वाले मुख्य चेहरों में पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा, सुखबिंदर सरकारिया, ओ.पी. सोनी, भरत भूषण आशु और परमिंदर पाल पिंकी जैसे कद्दावर नाम शामिल रहे. इसके अलावा दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने भी इस बैठक में पहुंचकर सबको चौंका दिया.
आलाकमान को 15 दिनों की चेतावनी
इस बैठक के भीतर से जो खबर निकलकर सामने आ रही है, वह कांग्रेस नेतृत्व की नींद उड़ाने के लिए काफी है. चुनाव कमेटियों में जगह मिलने से नाराज चल रहे कई दिग्गजों ने अपने सामूहिक इस्तीफे चरणजीत सिंह चन्नी को सौंप दिए हैं. इसके साथ ही नेताओं ने चन्नी को अगले 15 दिनों के भीतर दिल्ली दरबार यानी पार्टी हाईकमान के सामने अपनी बात रखने के लिए पूरी तरह अधिकृत कर दिया है. ये सभी बागी नेता अगले हफ्ते विदेश दौरे से वापस आ रहे राहुल गांधी से भी मिलने का समय मांग रहे हैं ताकि अपनी बात उनके सामने रख सकें. बैठक खत्म होने के बाद चन्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेताओं ने उनसे पंजाब की जनता की भावनाएं शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की अपील की है.
वड़िंग गुट का तीखा पलटवार
एक तरफ जहां चन्नी का खेमा इसे अपनी बड़ी कामयाबी मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजा वड़िंग के करीबियों ने इस पूरी बैठक को एक फ्लॉप शो करार दिया है. वड़िंग गुट के एक बहुत बड़े नेता ने बताया कि चन्नी के घर जुटने वाले और इस बैठक से दूरी बनाने वाले सभी नेताओं की एक पूरी सूची तैयार करके दिल्ली आलाकमान को भेज दी गई है. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस आलाकमान इस पूरे घटनाक्रम पर बहुत बारीक नजर रख रहा है और चुनाव से ठीक पहले इस बड़े संकट को शांत करने के लिए पर्दे के पीछे से चन्नी गुट से बातचीत का रास्ता भी तलाश रहा है ताकि डैमेज कंट्रोल किया जा सके.
अमित शाह और रंधावा की मुलाकात
पंजाब कांग्रेस के इस घमासान के बीच कोर कमेटी के नए चेयरमैन और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा की गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात ने कयासों का बाजार गर्म कर दिया है. हालांकि रंधावा ने इस मुलाकात के पीछे किसी भी तरह के राजनीतिक मकसद को साफ तौर पर खारिज कर दिया है. उन्होंने बताया कि यह बैठक पहले से तय थी क्योंकि उन्होंने 2 महीने पहले प्रधानमंत्री को पंजाब के सीमावर्ती इलाकों की बेहद खराब कानून-व्यवस्था को लेकर एक पत्र लिखा था, जिसकी एक कॉपी अमित शाह को भी भेजी गई थी. रंधावा ने अमित शाह को पंजाब पुलिस के हो रहे राजनीतिकरण की जानकारी दी और पाकिस्तान के इशारे पर राज्य का माहौल खराब करने वाली ताकतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र से तुरंत दखल देने की मांग की. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी रंधावा का खुलकर बचाव किया है.
रंधावा ने चन्नी की बैठक को बताया दुखद
चन्नी गुट द्वारा किए गए इस बड़े शक्ति प्रदर्शन पर जब रंधावा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस पूरी स्थिति को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. उन्होंने कहा कि यह सोचने का विषय है कि पार्टी के भीतर सांगठनिक बदलावों पर इतनी लंबी चर्चा होने के बाद भी ऐसी नौबत क्यों आ खड़ी हुई. रंधावा ने कहा कि हालात उतने खराब नहीं हैं जितना लोग समझ रहे हैं, लेकिन इतनी बैठकों के बाद भी नेताओं का असंतुष्ट होना सच में दुखद है. उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस पर्यवेक्षक अजय माकन ही इस बात का सही जवाब दे सकते हैं कि उन्होंने हाईकमान को क्या रिपोर्ट दी थी. आपको बता दें कि नए फेरबदल में राजा वड़िंग को अध्यक्ष बनाए रखने के साथ रंधावा को कोर कमेटी, चन्नी को कैंपेन कमेटी और विजय इंदर सिंगला को इलेक्शन मैनेजमेंट पैनल का जिम्मा दिया गया है.


