TRENDING TAGS :
स्कूल में बच्चे नहीं, फिर भी हाजिरी पूरी! पंजाब के सरकारी स्कूलों में करोड़ो का घोटाला...शिक्षा विभाग की खुली पोल
Punjab School Scam Exposed: पंजाब के संगरूर जिले के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में फर्जी एडमिशन और झूठी हाजिरी के जरिए करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। स्कॉलरशिप, राशन, किताबों और सरकारी अनुदान में धांधली की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंची है।
Punjab School Scam Exposed: पंजाब के संगरूर जिले से राज्य की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक अमले को शर्मसार कर देने वाला एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में कागजों पर फर्जी एडमिशन (घोस्ट एडमिशन) दिखाकर और बच्चों की झूठी हाजिरी दर्ज करके करोड़ों रुपये के सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा था। अनुसूचित जाति (SC) के गरीब बच्चों के हक की स्कॉलरशिप, राशन, किताबें और विकास अनुदान की राशि में बड़े पैमाने पर धांधली का पर्दाफाश हुआ है। अब यह पूरा मामला देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच यानी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) तक पहुंच गया है।
सरकारी पोर्टलों पर फर्जीवाड़ा
आयोग को सौंपी गई शिकायत में खुलासा हुआ है कि संगरूर के भिंडरा सेंटर के तहत आने वाले तीन प्रमुख स्कूलों- जीपीएस भिंडरा, जीपीएस बालियां और जीपीएस संतोखपुरा में यह घोटाला धड़ल्ले से चल रहा था। पलायन कर चुके मजदूरों के बच्चों या प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के नाम स्कूल रिकॉर्ड से हटाने के बजाय उनकी फर्जी हाजिरी लगाई जाती रही। 'e-Punjab' और U-DISE पोर्टल पर छात्रों की संख्या बढ़ाकर दर्ज की गई और इसके एवज में मिलने वाली प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप, मुफ्त वर्दी, किताबें और मिड-डे मील का राशन डकार लिया गया। हद तो तब हो गई जब बच्चों के लिए आने वाली खून की कमी (एनेमिया) की फोलिक एसिड गोलियों और दवाइयों तक में गबन के गंभीर आरोप लगे हैं।
बिना परीक्षा दिए फर्जी प्रमोशन और RTI दबाने का खेल
इस सिंडिकेट ने शिक्षा व्यवस्था के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। पिछले 5 सालों से बच्चों का कोई शारीरिक मूल्यांकन या परीक्षा लिए बिना ही फर्जी असेसमेंट शीट्स तैयार कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जा रही थीं। यह राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट 2009 और आईटी एक्ट का सीधा उल्लंघन है। जब ग्रामीणों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने तीन अलग-अलग आरटीआई आवेदन दाखिल कर सच्चाई जानने की कोशिश की, तो शिक्षा अधिकारियों ने मिलीभगत कर जानकारियां दबा दीं। जो भी शिक्षक या नागरिक इस धांधली के खिलाफ आवाज उठाता, उस पर झूठी शिकायतें दर्ज कराकर दूर-दराज इलाकों में तबादला कर दिया जाता था।
NCSC से केंद्रीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने पंजाब के स्थानीय प्रशासन की जांच पर अविश्वास जताते हुए NCSC मुख्यालय से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत आयोग से मांग की गई है कि स्कूलों के सभी शैक्षणिक और वित्तीय रिकॉर्ड्स को तुरंत सील कर पुलिस और एफआईआर (FIR) जांच के आदेश दिए जाएं। इसके साथ ही इस बड़े घोटाले में लिप्त पाए जाने वाले दोषी अधिकारियों और शिक्षकों के प्रमोशन तथा सालाना वेतन वृद्धि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की गई है।


