"भैंस का मांस बताकर बेच रहे थे गोमांस"...आरोपी पर भड़का हाईकोर्ट, जमानत देने से किया इनकार

Punjab Haryana Beef Case: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अवैध गोमांस मामले में 62 वर्षीय व्यक्ति की अग्रिम जमानत खारिज कर दी, फॉरेंसिक रिपोर्ट में बैल का मांस पाया गया।

Akriti Pandey
Published on: 24 Jan 2026 3:30 PM IST
Punjab Haryana Beef Case
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Punjab Haryana Beef Case: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अवैध गोमांस रखने के आरोप में 62 वर्षीय व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति आराधना साहनी की पीठ ने आरोपी के दावे को अस्वीकार कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि मांस सप्लाई करने वालों ने उसे भैंस का मांस होने का भरोसा दिलाया था। अदालत ने इसे कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए “चतुर चाल” करार दिया।

मामला कैसे शुरू हुआ

पुलिस कार्रवाई एक गुप्त सूचना पर हुई। एक गौरक्षक समूह के सदस्य ने शिकायत की कि आरोपी अपने स्कूटर के जरिए अवैध गोमांस सप्लाई कर रहा है। मौके पर पुलिस ने 50 किलो मांस बरामद किया। आरोपी ने दावा किया कि यह भैंस के बछड़े का मांस है और उसने इसे पंजाब और उत्तर प्रदेश के विक्रेताओं से खरीदा था। उसने अपने दावे को साबित करने के लिए दो बिल भी दिखाए।

फॉरेंसिक रिपोर्ट ने बदल दी दिशा

पुलिस ने मांस के नमूने राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद भेजे। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बरामद मांस बैल या सांड का था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ और गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।

कानूनी धाराएं और बहस

आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 299 और पंजाब गोहत्या निषेध अधिनियम, 1955 की धारा 8 के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि 62 वर्षीय व्यक्ति को फंसाया गया और उसे भरोसा था कि मांस भैंस का है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि दोनों अलग-अलग विक्रेताओं से गुमराह होने का दावा विश्वासयोग्य नहीं है। गौरक्षक पक्ष ने आरोपी के कृत्य को हिंदू धर्म की भावनाओं को आहत करने वाला बताया।

हाईकोर्ट का फैसला

न्यायमूर्ति साहनी ने कहा कि आरोपी की दलील “सोची-समझी चाल” है और इसे ध्यान देने योग्य नहीं माना गया। अदालत ने आरोपी की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता जताई ताकि यह पता लगाया जा सके कि मामले में और कौन शामिल था, गायों को कहां काटा गया और मांस की बिक्री कैसे होती थी। कोर्ट ने निकिता जगन्नाथ शेट्टी बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत असाधारण उपाय है और इसे नियमित रूप से नहीं दिया जाना चाहिए।

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Akriti Pandey is a journalist with more than three years of experience in the media industry. She holds a degree in Mass Communication and Journalism and specializes in writing on education, lifestyle, health, and astrology-related topics. Known for her reader-focused approach and engaging storytelling, Akriti is passionate about creating informative and accessible content. In her free time, she enjoys writing, sports, and traveling.

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