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Punjab BJP: पंजाब में BJP की 40 सीटें लॉक! खुद मैदान में उतरे चाणक्य अमित शाह, फुलप्रूफ प्लान तैयार
Punjab BJP Strategy 2027 Election: जाब विधानसभा चुनाव के लिए अमित शाह ने दिल्ली में गुप्त बैठक कर बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया है। अकाली दल से गठबंधन खत्म कर बीजेपी सभी 117 सीटों पर अकेले लड़ेगी।
Punjab BJP Strategy 2027 Election: पंजाब की राजनीति में आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां अचानक बहुत तेज हो गई हैं। पहले जहां कयास लगाए जा रहे थे कि सूबे में चुनावी दंगल 2027 की शुरुआत में होगा, वहीं अब अंदरूनी सूत्रों से बड़ा दावा सामने आ रहा है कि ये चुनाव नवंबर 2027 में ही संपन्न कराए जा सकते हैं। इस बीच देश के गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब फतह करने के लिए एक बेहद गुप्त और बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। अमित शाह ने पंजाब के सभी बड़े नेताओं को अचानक दिल्ली तलब किया और एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक में यह साफ कर दिया कि इस बार पार्टी किसी भी दल के सामने नहीं झुकेगी और राज्य की सभी 117 सीटों पर पूरी ताकत के साथ अकेले चुनाव लड़ेगी।
हरियाणा के दिग्गजों को सौंपी पंजाब की कमान
राजनैतिक गलियारों में इस बात की चर्चा बेहद जोरों पर है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस बार पंजाब में अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का पूरा मन बना लिया है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में मिली ऐतिहासिक और बंपर सफलता के बाद से भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं का उत्साह सातवें आसमान पर है। इसी जोश को बनाए रखने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने पंजाब की कमान अपने सबसे भरोसेमंद चेहरों को सौंप दी है। रणनीति के तहत हरियाणा के मौजूदा मुख्यमंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और दिल्ली के कई बड़े रणनीतिकारों को अभी से पंजाब के चुनावी मैदान में उतार दिया गया है ताकि वे जमीन पर जाकर मोर्चा संभाल सकें।
अमित शाह खुद निकालेंगे बड़ी राजनीतिक यात्रा
भाजपा की अंदरूनी गतिविधियों पर पैनी नजर रखने वाले वरिष्ठ विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी पंजाब की धरती पर एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक यात्रा निकालने की योजना बना रही है। इस चुनावी अभियान में रवनीत सिंह बिट्टू को सबसे आक्रामक चेहरे के रूप में पेश किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इस बड़ी राजनीतिक यात्रा की कमान खुद गृह मंत्री अमित शाह अपने हाथों में ले सकते हैं। इस यात्रा के दौरान राज्य की चरमराती कानून व्यवस्था और युवाओं में फैलते नशे के गंभीर मुद्दे को मुख्य हथियार बनाया जाएगा। इसके साथ ही संगठन को मजबूत करने के लिए अमित शाह खुद चुनाव होने तक हर महीने पंजाब का दौरा करेंगे।
अकाली दल से पुराना नाता खत्म
पंजाब में एक लंबा दौर वह था जब भाजपा हमेशा शिरोमणि अकाली दल के साथ छोटे भाई या जूनियर पार्टी की भूमिका में चुनाव लड़ती आई थी। मगर साल 2020 में किसान आंदोलन के वक्त यह पुराना गठबंधन पूरी तरह टूट गया था। अब भाजपा ने बैसाखियों के सहारे चलने के बजाय अपने दम पर चुनावी मैदान फतह करने का फैसला किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष और अमित शाह की बैठक में पंजाब के नेताओं को कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी तरह के गठबंधन की उम्मीद छोड़ दें और राज्य की सभी एक सौ सत्रह विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन और प्रचार की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू कर दें।
40 सीटों पर विशेष नजर
अमित शाह की चुनावी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा जमीनी स्तर का सटीक प्रबंधन माना जाता है। पंजाब के लिए भी उन्होंने ऐसी ही बारीक योजना बनाई है, जिसके तहत शुरुआती चरण में चालीस सीटों को पूरी तरह लॉक कर दिया गया है। इन क्षेत्रों में हिंदू मतदाताओं की संख्या अधिक है, इसलिए पार्टी इन्हें अपनी जीत के लिए सबसे आसान और सुरक्षित मान रही है। इसके अलावा, पंजाब के जो जिले अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे हुए हैं, वहां सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी को एक बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है। साथ ही, सिख समुदाय को अपने पाले में लाने के लिए पार्टी ने पंजाब कमान की जिम्मेदारी एक जट्ट सिख चेहरे को सौंपी है और सिखों की धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रियता बढ़ा दी है।


