Google New Verification System: अब तस्वीरें पहचानने की जरूरत नहीं! QR Code से होगा वेरिफिकेशन, जानिए पूरा मामला

Google QR Code Verification System: क्या अब CAPTCHA की जगह QR Code करेगा वेरिफिकेशन? जानिए प्राइवेसी को लेकर क्यों बढ़ी चिंता

Jyotsana Singh
Published on: 11 May 2026 6:08 PM IST (Updated on: 11 May 2026 6:08 PM IST)
QR Code vs CAPTCHA Google new verification system privacy concerns Hindi
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Google New QR Code Verification System

Google New Verification System: इंटरनेट इस्तेमाल करते समय लगभग हर यूजर ने कभी न कभी CAPTCHA जरूर देखा होगा। अक्सर देखा होगा कि कई बार वेबसाइट खोलते ही I’m not a robot पर क्लिक करना पड़ता है, तो कभी ट्रैफिक लाइट, बाइक या कार की तस्वीरें पहचाननी पड़ती हैं। इसका मकसद यह साबित करना होता है कि वेबसाइट इस्तेमाल करने वाला कोई इंसान है, कोई बॉट या ऑटोमेटेड सिस्टम नहीं। हालांकि यह प्रक्रिया कई लोगों को झुंझलाहट भरी लगती है। अब खबर है कि Google इस पुराने सिस्टम को बदलकर एक नया QR Code आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम ला सकता है, जिसे लेकर प्राइवेसी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में रेडिट (Reddit और कई टेक प्लेटफॉर्म्स पर कुछ स्क्रीनशॉट वायरल हुए हैं। इनमें दावा किया गया है कि Google CAPTCHA के लिए एक नया तरीका टेस्ट कर रहा है। इस सिस्टम में यूजर को वेबसाइट पर दिखाई देने वाला QR Code अपने मोबाइल फोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन में मौजूद Google Play Services उस वेरिफिकेशन को पूरा करेगी। यानी अब यूजर को बार-बार तस्वीरों में कार, बस या ट्रैफिक सिग्नल पहचानने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहली नजर में यह तरीका आसान और तेज लगता है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली को देखकर कई लोगों ने प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई है।

QR Code स्कैन करने के बाद क्या होगा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब यूजर QR Code स्कैन करेगा तो फोन में इंस्टॉल Google Play Services कुछ जरूरी डिटेल्स पढ़ सकती है। इसी आधार पर Google यह तय करेगा कि वेबसाइट एक्सेस करने वाला असली इंसान है या नहीं। यहीं से विवाद शुरू होता है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे Google को यह जानकारी मिल सकती है कि कौन व्यक्ति किस वेबसाइट पर जा रहा है। भले ही यूजर किसी अलग ब्राउजर का इस्तेमाल कर रहा हो या उसने अपने Google अकाउंट से लॉग-इन न किया हो। हालांकि अभी तक Google ने इस सिस्टम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, इसलिए यह साफ नहीं है कि कौन-कौन सी जानकारी शेयर होगी और उसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा।

क्यों जरूरी मानी जा रही है गूगल प्ले सर्विस?

वायरल स्क्रीनशॉट में Google के एक सपोर्ट पेज का भी जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि मोबाइल वेरिफिकेशन पूरा करने के लिए यूजर के पास एक कम्पैटिबल डिवाइस होना चाहिए। साथ ही एंड्रॉयड फोन में Google Play Services का 25.41.30 या उससे ऊपर का वर्जन इंस्टॉल होना जरूरी होगा। इससे संकेत मिलता है कि नया सिस्टम सीधे गूगल प्ले सर्विस पर निर्भर हो सकता है। यानी वेरिफिकेशन केवल ब्राउजर के जरिए नहीं बल्कि फोन के सिस्टम लेवल पर भी हो सकता है।

CAPTCHA आखिर क्यों जरूरी होता है?

CAPTCHA का इस्तेमाल वेबसाइट्स को स्पैम, फेक अकाउंट और बॉट अटैक से बचाने के लिए किया जाता है। आज के स⁵6²मय में AI और ऑटोमेशन तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और बॉट्स पहले से ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं। ऐसे में पारंपरिक CAPTCHA सिस्टम कई बार कमजोर पड़ जाते हैं। यही वजह है कि टेक कंपनियां नए और ज्यादा स्मार्ट वेरिफिकेशन सिस्टम पर काम कर रही हैं। Google पहले भी reCAPTCHA v3 जैसे सिस्टम ला चुका है, जिसमें यूजर को हर बार तस्वीरें चुनने की जरूरत नहीं पड़ती। QR Code आधारित सिस्टम को उसी दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।

प्राइवेसी को लेकर क्यों बढ़ रही है चिंता?

सबसे बड़ा सवाल डेटा ट्रैकिंग को लेकर उठ रहा है। अगर QR Code स्कैन करने के बाद फोन की गूगल प्ले सर्विस वेबसाइट वेरिफिकेशन में शामिल होती हैं, तो इससे यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी और डिवाइस की पहचान जुड़ सकती है। प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे गूगल के पास यूजर की वेब ब्राउजिंग से जुड़ा और ज्यादा डेटा पहुंच सकता है। खास बात यह है कि यह प्रक्रिया ब्राउजर लॉग-इन से अलग हो सकती है। यानी यूजर चाहे Incognito Mode इस्तेमाल करे या किसी दूसरे ब्राउजर का, फिर भी डिवाइस की पहचान संभव हो सकती है। हालांकि फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है जिसमें कहा गया हो कि वेबसाइट्स को यूजर का निजी डेटा शेयर किया जाएगा।

क्या यह सिस्टम सभी यूजर्स के लिए आसान होगा?

नई प्रक्रिया तकनीकी रूप से आधुनिक जरूर लगती है, लेकिन हर यूजर के लिए सुविधाजनक हो ऐसा जरूरी नहीं है। जिन लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है, उन्हें परेशानी हो सकती है। वहीं पुराने एंड्रॉयड फोन में जरूरी गूगल प्ले सर्विस वर्जन नहीं होगा। इसके अलावा हर बार वेबसाइट खोलते समय मोबाइल उठाकर QR Code स्कैन करना कई लोगों को झंझट भरा लग सकता है। आई-फोन यूजर्स के लिए यह सिस्टम किस तरह काम करेगा, इसकी जानकारी भी अभी स्पष्ट नहीं है। यानी सुविधा और परेशानी दोनों पहलू इसमें मौजूद हैं।

फिलहाल यह फीचर टेस्टिंग स्टेज में बताया जा रहा है। Google की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि QR Code आधारित reCAPTCHA को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह सिस्टम पूरी तरह प्राइवेसी के लिए खतरा बन जाएगा। लेकिन इतना जरूर है कि डिजिटल दुनिया में हर नई तकनीक के साथ डेटा सुरक्षा और यूजर प्राइवेसी को लेकर सवाल उठते हैं। आने वाले समय में Google को यह साफ करना होगा कि यह सिस्टम किस तरह काम करेगा और यूजर्स की जानकारी कितनी सुरक्षित रहेगी। CAPTCHA को आसान बनाने के लिए Google का QR Code आधारित नया सिस्टम तकनीक की दुनिया में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे वेबसाइट वेरिफिकेशन तेज और आसान हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ प्राइवेसी और डेटा ट्रैकिंग को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

Jyotsana Singh

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