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घबराया पकिस्तान! जल्द उड़ान भरेगा राफेल, हैदराबाद से सीधा दुश्मनों को मिलेगा करारा जवाब
Rafale Jets: यह परियोजना भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को भी बढ़ावा मिलेगा जिससे दुश्मन अभी से घबरा गए हैं।
Rafale Jets (PHOTO CREDIT: social media)
Rafale Jets: भारत की सुरक्षा आत्मनिर्भरता को एक नई ऊंचाई देते हुए, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन ने हैदराबाद में राफेल लड़ाकू विमान के फ्यूजलेज (main structure) को बनाने के लिए साझेदारी की है। यह पहली बार है जब राफेल के इस बड़े आवश्यक भाग का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा, जो 'Make in India' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों के अंतर्गत एक बड़ी उपलब्धि है।
रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के मार्ग पर बड़ा कदम
Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह साझेदारी भारत की आतंरिक रक्षा उत्पादन क्षमताओं को और सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हैदराबाद में बनने वाले इस फ्यूजलेज का इस्तेमाल न सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए, बल्कि दुनियाभर बाजारों के लिए भी किया जाएगा, जिससे भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी में वृद्धि होगी।
स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास में होगी वृद्धि
इस परियोजना के अंतर्गत हैदराबाद में एक अत्याधुनिक उत्पादन सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार का बड़ा मौक़ा मिलेगा। यह न सिर्फ क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देगा, बल्कि भारत के तकनीकी कौशल और विनिर्माण क्षमताओं में भी वृद्धि करेगा।
भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग में एक नई ऊंचाई
Times of india के मुताबिक, यह साझेदारी भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को और शक्तिशाली बनाएगी। हाल ही में भारत ने फ्रांस से 26 नौसैनिक राफेल विमानों की खरीद के लिए ₹63,887 करोड़ (लगभग -$7 बिलियन) का समझौता किया है, जो साल 2030 तक डिलीवर किए जाएंगे।
भविष्य की संभावनाएं
इस कदम से भारत को न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी, बल्कि यह देश को दुनियाभर के रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एक आवश्यक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। इसके साथ ही, यह परियोजना भारत की रक्षा निर्यात क्षमताओं को भी बढ़ावा देगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी।
हैदराबाद में टाटा और दसॉल्ट की यह साझेदारी भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के मार्ग पर एक बड़ा और ज़रूरी कदम साबित होगा। यह न सिर्फ देश की सुरक्षा क्षमताओं में बढ़ोतरी दर्ज करेगी, बल्कि आर्थिक और तकनीकी विकास को भी प्रोत्साहित करेगी, जिससे भारत एक वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। यह पहली बार होगा जब राफेल फाइटर जेट का पूरा फ्यूज़लेज फ्रांस के बाहर बनेगा यानी 'भारत में'...


