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क्या अभिजीत दीपके से दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे राहुल गांधी? प्रशांत भूषण को मध्यस्थ बनाने की चर्चा
क्या राहुल गांधी अभिजीत दीपके की CJP से नजदीकी बढ़ा रहे हैं? कांग्रेस के कथित आउटरीच, प्रशांत भूषण की मध्यस्थता और INDIA गठबंधन की रणनीति पर जानें पूरा सियासी अपडेट।
राहुल गांधी अब अभिजीत दीपके की CJP से हाथ मिलाने की कोशिश में हैं? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ आंदोलन के बीच कांग्रेस के "हाई-टी" कथित आउटरीच ने विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है। जिस कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को कांग्रेस का एक धड़ा आम आदमी पार्टी का विस्तार या फ्रंट मानता रहा, अब उसी संगठन को INDIA गठबंधन की मुहिम से जोड़ने की कोशिश की खबरें सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को दीपके तक पहुंचने के लिए मध्यस्थ बनाने का अनुरोध किया। सवाल है कि क्या राहुल गांधी विपक्षी आंदोलन का दायरा बढ़ाने के लिए CJP से दूरी घटा रहे हैं, या यह केवल साझा मुद्दों पर एकजुटता की पहल है?
राहुल गांधी की हाई-टी में CJP को बुलाने की कोशिश
चर्चा है कि कांग्रेस ने वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण से दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने का अनुरोध किया। हालांकि, दीपके की ओर से इस पहल को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाए जाने की बात भी सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने मंगलवार को अभिजीत दीपके और CJP को राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई-टी कार्यक्रम में आमंत्रित करने की पहल की। इस कार्यक्रम में INDIA गठबंधन के नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और छात्र नेताओं को बुलाया गया था।
कांग्रेस की इस कोशिश को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी के भीतर लंबे समय से CJP को लेकर संदेह रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का एक प्रभावशाली धड़ा इस संगठन को आम आदमी पार्टी (AAP) का विस्तार या उसका फ्रंट मानता रहा है। ऐसे में दीपके तक पहुंचने की कोशिश विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों का संकेत दे रही है।
सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने इस संपर्क के लिए प्रशांत भूषण से मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अनुरोध किया। भूषण के करीबी सूत्रों ने भी कांग्रेस की ओर से ऐसा अनुरोध आने की पुष्टि की। हालांकि, उस समय दीपके महाराष्ट्र में थे, जबकि CJP के वरिष्ठ नेता आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर फ्लैश प्रोटेस्ट करने के मामले में पुलिस हिरासत में थे।
कांग्रेस के कुछ नेताओं का दावा है कि दीपके इस पहल को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ेगी या नहीं।
CJP को लेकर कांग्रेस का नजरिया क्यों बदल रहा है?
CJP मई में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। इसके बाद जून-जुलाई में संगठन ने परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर आंदोलन किया। इस विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन तेज हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद प्रधान को शिक्षा मंत्रालय छोड़ना पड़ा।
हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व का एक वर्ग अब तक CJP को लेकर आशंकित रहा है। पार्टी के भीतर यह चिंता भी रही कि विपक्ष की राजनीति में CJP को ज्यादा जगह देने से कांग्रेस और INDIA गठबंधन का राजनीतिक स्पेस प्रभावित हो सकता है।
लेकिन 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के प्रदर्शन के आह्वान और उसके बाद हुए घटनाक्रम ने कांग्रेस की रणनीति पर नए सिरे से विचार करने की स्थिति पैदा की। दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई के बीच हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। कांग्रेस के आकलन में CJP उस स्तर पर भीड़ नहीं जुटा सकी, जैसा उसने जून-जुलाई के आंदोलन के दौरान किया था।
इसके बावजूद कांग्रेस अब SIR को खत्म करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रही मुहिम में सभी विरोधी ताकतों को साथ लाने पर जोर देती दिख रही है।
राहुल गांधी का बयान बना बदलाव का संकेत
कांग्रेस की रणनीति में बदलाव का पहला संकेत सोमवार को राहुल गांधी के बयान से मिला। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी प्रदर्शन एक ही आंदोलन का हिस्सा हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि संविधान की रक्षा के लिए जो भी खड़ा है, कांग्रेस उसके साथ है। उनके मुताबिक, प्रदर्शन करने वाले अलग-अलग संगठनों और समूहों के बैनर भले अलग हों, लेकिन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का उद्देश्य एक है।
राहुल के इस बयान को CJP सहित उन समूहों के लिए संदेश के तौर पर देखा गया, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के मुद्दे पर अलग-अलग तरीके से विरोध कर रहे हैं। हालांकि, CJP सोमवार को INDIA गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च में शामिल नहीं हुई थी। कांग्रेस नेतृत्व ने उस मार्च को भीड़ जुटाने के लिहाज से सफल माना।
CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर राहुल ने क्या कहा?
बुधवार को राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले CJP नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में तिरंगा लहराना अपराध नहीं है और युवाओं को जेल में डालना कायरता है।
राहुल ने छात्रों, युवाओं, पत्रकारों और INDIA गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि बैनर अलग हो सकते हैं, लेकिन संवैधानिक अधिकारों की मांग एक है। उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और उसे फिर जनता के लिए हासिल किया जाएगा।
राहुल के इस बयान पर अभिजीत दीपके ने आभार जताया। उन्होंने राहुल गांधी को टैग करते हुए CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की कथित अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए धन्यवाद दिया।
अब 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च की तैयारी
दीपके ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में देशभक्तों और तिरंगे से प्रेम करने वाले लोगों से शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे जुटने की अपील की है। उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय ध्वज लेकर आने और अन्य शहरों में भी तिरंगा मार्च आयोजित करने का आह्वान किया।
ऐसे में कांग्रेस और CJP के बीच संभावित संवाद का मुद्दा अब केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं है। SIR, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई जैसे मुद्दों ने विपक्षी एकजुटता की बहस को फिर तेज कर दिया है।
फिलहाल राहुल गांधी और अभिजीत दीपके के बीच औपचारिक राजनीतिक समझ बनने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन कांग्रेस की ओर से संपर्क की कोशिश, प्रशांत भूषण की संभावित मध्यस्थता और CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी के समर्थन ने दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाओं को चर्चा में ला दिया है।


