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राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत, FIR की मांग वाली याचिका खारिज
राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अमेरिका में सिख समुदाय पर दिए बयान को लेकर FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका अदालत ने खारिज कर दी।
Rahul Gandhi News: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सिख समुदाय से जुड़ी कथित विवादित टिप्पणी के मामले में बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार (5 नवंबर) को राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। यह याचिका 2024 में अमेरिका दौरे के दौरान सिख समुदाय को लेकर दिए गए उनके बयान के संबंध में दाखिल की गई थी। जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने नागेश्वर मिश्रा और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ताओं ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले वाराणसी की अदालतों में भी राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई चली थी। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से राहुल गांधी को इस मामले में बड़ी राहत मिली है।
वाराणसी की अदालत से शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई
यह पूरा मामला वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य लोगों की शिकायत से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने राहुल गांधी के अमेरिका में दिए गए बयान को आपत्तिजनक बताते हुए सारनाथ थाने में FIR दर्ज कराने की मांग की थी। पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने अदालत का रुख किया।
28 नवंबर 2024 को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM-II) की अदालत ने FIR दर्ज कराने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि कथित बयान अमेरिका में दिया गया था, इसलिए मामला उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता।
इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने MP/MLA कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। 21 जुलाई 2025 को अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया। राहुल गांधी ने इस आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन सितंबर 2025 में हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला दोबारा वाराणसी की अदालत पहुंचा।
तारीख और समय का हवाला देकर खारिज हुई थी अर्जी
मामले की दोबारा सुनवाई के दौरान ACJM नीरज त्रिपाठी की अदालत ने शिकायत को फिर खारिज कर दिया। अदालत ने कहा था कि कथित घटना की तारीख और समय का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने ACJM-V कोर्ट में एक और पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।
25 अगस्त को राहुल गांधी ने MP/MLA कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल किया था। उन्होंने शिकायतकर्ता की याचिका को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा था कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
राहुल गांधी ने अपने जवाब में खुद को सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा था कि वह सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करते हैं। सिख समुदाय के प्रति भी उनके मन में गहरा सम्मान है। उन्होंने दलील दी थी कि अमेरिका में दिए गए उनके बयान का उद्देश्य सिख समुदाय के अधिकारों और देश के प्रति उसके योगदान को सामने रखना था।
अमेरिका में राहुल गांधी ने क्या कहा था?
दरअसल, राहुल गांधी ने 10 सितंबर 2024 को अमेरिका दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भारत में असली सवाल यह है कि क्या किसी सिख को पगड़ी पहनने और कड़ा धारण करने की अनुमति होगी? क्या वह गुरुद्वारे जा सकेगा?
राहुल गांधी ने कहा था कि यह चिंता केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सभी धर्मों और समुदायों से जुड़ी है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि BJP यह स्वीकार नहीं करती कि भारत सभी का देश है। भारत एक संघ (Union) है, जहां अलग-अलग इतिहास, परंपराएं, भाषाएं, संगीत और सांस्कृतिक विरासत मौजूद हैं।
RSS और BJP पर भी साधा था निशाना
अपने अमेरिकी दौरे के दौरान राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि RSS भारत की विविधता को सही तरीके से नहीं समझता और कुछ राज्यों, भाषाओं, धर्मों तथा समुदायों को दूसरों से कमतर मानता है।
उन्होंने तमिल, मराठी, बंगाली और मणिपुरी भाषाओं का उदाहरण देते हुए कहा था कि भारत की हर भाषा और हर राज्य की अपनी अलग पहचान, इतिहास और परंपरा है। राहुल गांधी ने इसी सोच को देश में वैचारिक संघर्ष की जड़ बताया था।
राहुल गांधी के इसी बयान को लेकर नागेश्वर मिश्रा और अन्य लोगों ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, अब 5 नवंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है।


