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कांग्रेस में ‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ का खेल खत्म? राहुल गांधी खुद चुनेंगे 120 नए चेहरे, पुराने दिग्गजों की होगी छुट्टी?
Congress New National Secretaries: कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी! राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू ले रहे हैं। पुराने नेताओं की छुट्टी और नई युवा टीम की तैयारी?
Congress New National Secretaries: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अब एसी कमरों और सुस्त 'ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स' करने वाले बुजुर्ग नेताओं की जकड़न से बाहर निकालने के लिए एक बहुत बड़े क्रांतिकारी फेरबदल की शुरुआत हो चुकी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के भीतर प्रतिभा और जमीनी संघर्ष को तरजीह देने के लिए एक ऐतिहासिक अभियान छेड़ दिया है। अब केवल सिफारिशों या किसी बड़े नेता के वरदहस्त से संगठन में बड़े पद हासिल करने के दिन लद चुके हैं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के साथ खुद दिल्ली में 120 संभावित युवा नेताओं के आमने-सामने बैठकर इंटरव्यू ले रहे हैं, ताकि पार्टी को एक बेहद आक्रामक, गतिशील और वैचारिक रूप से मजबूत युवा लीडरशिप दी जा सके।
10-10 के ग्रुप में सीधे सवाल
इस अनूठी चयन प्रक्रिया के तहत देश के अलग-अलग राज्यों से छांटे गए होनहार नेताओं को 10-10 के समूहों में राष्ट्रीय राजधानी बुलाया जा रहा है। राहुल गांधी के हाथ में हर नेता के वर्षों के काम का पूरा लेखा-जोखा और 'रिपोर्ट कार्ड' पहले से मौजूद है। वे खुद उम्मीदवारों से उनके पुराने प्रदर्शन, भविष्य के राजनीतिक विजन और जनहित के मुद्दों पर उनकी पकड़ से जुड़े तीखे सवाल पूछ रहे हैं। रायबरेली दौरे से लौटने के बाद वे इस सिलसिले को और तेजी से आगे बढ़ाएंगे। इस पारदर्शी प्रक्रिया का सीधा मकसद उन करीब 60 फीसदी से अधिक मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों को हटाना है जो लंबे समय से निष्क्रिय पड़े थे, ताकि उनकी जगह नए और ऊर्जावान चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी जा सके।
2004 का 'जनरेशन चेंज' का सपना अब बनने जा रहा है हकीकत
जब राहुल गांधी ने वर्ष 2004 में पहली बार राजनीति में कदम रखा था, तब से ही पार्टी में 'जनरेशन चेंज' यानी पीढ़ीगत बदलाव उनका सबसे प्रिय और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा है। इससे पहले उन्होंने यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में भी चुनाव और इंटरव्यू के जरिए बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले आम युवाओं को आगे लाने का प्रयोग किया था। हालांकि, उस दौर में पार्टी के पुराने दिग्गजों (ओल्ड गार्ड) के कड़े विरोध और अंदरूनी खींचतान के कारण यह मिशन पूरी तरह रंग नहीं ला सका था। लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर से लेकर दिल्ली के मुख्यालय तक युवाओं की ताजपोशी का जो दौर शुरू हुआ है, उसने साबित कर दिया है कि राहुल गांधी का दो दशक पुराना सपना अब धरातल पर साकार हो रहा है।
'संगठन सृजन' के असली सूरमाओं को तरजीह
इस महा-इंटरव्यू प्रक्रिया में उन नेताओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है जिन्होंने 'संगठन सृजन' जैसे अभियानों में ऑब्जर्वर बनकर जमीनी स्तर पर निष्ठापूर्वक काम किया है। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि अगर मेहनत करने वाले कार्यकर्ता को उसका वाजिब हक नहीं मिलेगा तो युवाओं का राजनीति से भरोसा उठ जाएगा। इसलिए समाज के हर वर्ग, क्षेत्र और कोने से आने वाले प्रतिभावान युवाओं को मिलाकर एक सर्वसमावेशी राष्ट्रीय टीम का गठन किया जा रहा है। यह चयन अभियान केवल पदों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों उन युवाओं के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है जो राजनीति को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे सशक्त माध्यम मानते हैं।


