संसद में 'इडियट-अंधभक्त' बोलने पर घिरे राहुल गांधी, BJP सांसदों ने तुरंत खोला मोर्चा, समिति ने भेजा नोटिस

Rahul Gandhi Privilege Committee Notice: संसद में 'इडियट' और 'अंधभक्त' जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर राहुल गांधी मुश्किल में घिर गए हैं। बीजेपी सांसदों की शिकायत के बाद लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने उन्हें नोटिस जारी कर 28 अगस्त 2026 तक लिखित जवाब मांगा है।

Harsh Srivastava
Published on: 14 Aug 2026 10:05 PM IST (Updated on: 14 Aug 2026 10:06 PM IST)
संसद में इडियट-अंधभक्त बोलने पर घिरे राहुल गांधी, BJP सांसदों ने तुरंत खोला मोर्चा, समिति ने भेजा नोटिस
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Rahul Gandhi Privilege Committee Notice: लोकसभा में अपने बेबाक बयानों से अक्सर चर्चा में रहने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर बड़े कानूनी और संसदीय विवाद में फंस गए हैं। संसद में भाषण के दौरान 'इडियट' और 'अंधभक्त' जैसे शब्दों का प्रयोग करने के मामले में लोकसभा की विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) ने राहुल गांधी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। समिति ने कांग्रेस सांसद को सख्त निर्देश देते हुए 28 अगस्त 2026 तक अपना लिखित पक्ष रखने को कहा है। इस नोटिस के बाद से ही देश का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है।

अनुराग ठाकुर-संजय जायसवाल की शिकायत पर कार्रवाई

यह पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद गरमाया है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने 30 जुलाई 2026 को राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की औपचारिक शिकायत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी थी। इसके अलावा बीजेपी सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने भी 29 जुलाई 2026 को पत्र लिखकर संसदीय मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री पर बिना पूर्व सूचना दिए बेहद गंभीर आरोप लगाए और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया।

'एंटी पेपर लीक बिल' पर चर्चा के दौरान मचा था गदर

विवाद की असली जड़ संसद के मॉनसून सत्र के दौरान 'एंटी पेपर लीक बिल' पर हो रही बहस से जुड़ी है। सदन में सत्ता पक्ष के जबरदस्त हंगामे के बीच राहुल गांधी ने बोलना शुरू किया था। उन्होंने कहा कि वे एक युवा छात्रा के साथ हुई अपनी संवाद यात्रा का अनुभव साझा कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने लोगों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया। राहुल के अनुसार पहली श्रेणी 'स्टूडेंट' की है, जो हमेशा नया सीखने के लिए अपना दिल और दिमाग खुला रखता है।

'इडियट' और 'अंधभक्त' का गणित समझाकर फंसा पेच

भाषण के दौरान राहुल गांधी ने दूसरी श्रेणी का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को सर्वज्ञानी समझते हैं। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने छात्रा से पूछा कि वह ऐसे लोगों को क्या कहती है, तो उसने उन्हें 'इडियट' बताया। इसके आगे बढ़ते हुए राहुल ने तीसरी श्रेणी का नाम 'अंधभक्त' दिया। उन्होंने छात्रा के हवाले से कहा कि अंधभक्त वह है जो इडियट को ही भगवान मान बैठता है। राहुल गांधी का 'स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त' वाला यह फॉर्मूला आते ही पूरे सदन में भूचाल आ गया।

सत्ता पक्ष का जोरदार हंगामा, राहुल ने दी थी यह सफाई

राहुल गांधी के मुंह से ये शब्द सुनते ही बीजेपी और एनडीए के तमाम सांसद अपनी सीटों पर खड़े हो गए और नारेबाजी करने लगे। सदन की कार्यवाही में भारी रुकावट आई। हालांकि, हंगामे के बीच राहुल गांधी ने मंच से ही स्पष्टीकरण दिया था कि वे किसी भी माननीय सांसद को व्यक्तिगत तौर पर निशाना नहीं बना रहे हैं, बल्कि सिर्फ एक छात्रा के विचारों का उदाहरण दे रहे हैं।

28 अगस्त की तारीख तय करेगी आगे की रणनीति

संसदीय नियमों और मर्यादाओं को ताक पर रखने के आरोपों के बीच अब सबकी निगाहें 28 अगस्त 2026 पर टिकी हैं। विशेषाधिकार समिति को राहुल गांधी का जवाब मिलने के बाद ही तय होगा कि उन पर क्या कार्रवाई की जाएगी। अगर समिति जवाब से असंतुष्ट रहती है, तो मामला और तूल पकड़ सकता है। विपक्ष जहां इसे आवाज दबाने की कोशिश बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे संसदीय गरिमा की रक्षा का विषय मान रहा है।

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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