‘इल्हान उमर-रो से मिल रहे Rahul Gandhi...’, निशिकांत दुबे ने 270 विदेश यात्राओं पर क्यों उठाए सवाल?

Rahul Gandhi Foreign Trips: राहुल गांधी की इल्हान उमर और रो खन्ना से मुलाकात पर निशिकांत दुबे ने सवाल उठाए। उन्होंने राहुल की 270 विदेश यात्राओं का भी जिक्र किया।

Aditya Kumar Verma
Published on: 22 Oct 2026 2:17 PM IST
Rahul Gandhi Foreign Trips | Nishikant Dubey Questions
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Rahul Gandhi Foreign Trips | Nishikant Dubey Question

Rahul Gandhi Foreign Trips: भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर विदेश यात्राओं (Foreign Visits) और अमेरिका के सांसदों से मुलाकातों को लेकर निशाना साधा है। दुबे ने दावा किया कि राहुल गांधी पिछले 10 वर्षों में कम से कम 270 बार विदेश गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी इतनी बार विदेश क्यों जाते हैं और इन यात्राओं के दौरान किन लोगों से मुलाकात करते हैं।

निशिकांत दुबे ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली में पिछले 10 से 15 दिनों के दौरान हुए प्रदर्शनों (Delhi Protests) का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान ऐसा माहौल रहा, जैसे दिल्ली में कोई नियम-कानून लागू ही नहीं हो। उनके मुताबिक, प्रदर्शनों के बीच आम लोगों से लेकर व्यापारियों और छोटे कारोबारियों तक को परेशानी उठानी पड़ी।

प्रदर्शन से आम लोगों को परेशानी का दावा

निशिकांत दुबे ने कहा कि राहुल गांधी लंच या डिनर के लिए चले जाते थे और इसके बाद कहीं न कहीं धरना-प्रदर्शन होता था। उन्होंने दावा किया कि इन प्रदर्शनों से दिल्ली के आम नागरिकों के साथ व्यापारियों, ऑटो चालकों, टेम्पो चालकों, रिक्शा चालकों और रेहड़ी-पटरी वालों को भी परेशानी हुई।

दुबे ने हाल के प्रदर्शनों के संदर्भ में राहुल गांधी के विदेश जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं की भावनाएं भड़कती हैं, लेकिन बाद में कानूनी कार्रवाई का सामना प्रदर्शन में शामिल लोगों को करना पड़ता है। उन्होंने इसी संदर्भ में आशुतोष रांका और सौरभ दास का भी जिक्र किया और कहा कि वे जेल में थे, जबकि राहुल गांधी विदेश चले गए।

तिरंगे के इस्तेमाल पर भी उठाया सवाल

बीजेपी सांसद ने प्रदर्शन स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे (National Flag) के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारी तिरंगा लेकर पहुंचे और जिस तरीके से राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल किया गया, उससे उसकी गरिमा के प्रति सम्मान की कमी दिखाई दी।

दुबे ने कहा कि तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं है, बल्कि देश और संविधान से जुड़ा प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय ध्वज को फहराने और उसके इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियम और प्रोटोकॉल हैं।

राहुल गांधी की 270 विदेश यात्राओं का दावा

निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा, “विपक्ष के नेता पिछले दस साल, राहुल गांधी जी, वो कम से कम 270 बार विदेश गए हैं। एक-दो बार नहीं, 270 बार।”

दुबे ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी इतनी बार विदेश क्यों जाते हैं और वहां किन लोगों से मुलाकात करते हैं। उनके इसी बयान को लेकर अब राहुल गांधी की विदेश यात्राएं राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई हैं। हालिया रिपोर्ट में भी दुबे के हवाले से राहुल गांधी के पिछले 10 वर्षों में 270 बार विदेश जाने का दावा सामने आया है।

इल्हान उमर और रो खन्ना से मुलाकात पर सवाल

निशिकांत दुबे ने अमेरिकी सांसद इल्हान उमर (Ilhan Omar) और रो खन्ना (Ro Khanna) से राहुल गांधी की मुलाकातों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी अमेरिका में इन दोनों सांसदों से लगातार मुलाकात करते रहे हैं और इन संपर्कों के पीछे के उद्देश्य पर सवाल किया।

सितंबर 2024 में राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी सांसदों के एक समूह के साथ उनकी मुलाकात हुई थी। इस बैठक में इल्हान उमर और रो खन्ना के अलावा कई अन्य अमेरिकी सांसद भी शामिल थे। यह बैठक वॉशिंगटन स्थित रे बर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में हुई थी।

निशिकांत दुबे ने इन मुलाकातों को जॉर्ज सोरोस से जुड़े फाउंडेशन से भी जोड़ा और सवाल उठाया कि राहुल गांधी के इन संपर्कों के पीछे क्या उद्देश्य है। यह दुबे का राजनीतिक आरोप है, जिसे उन्होंने अपने बयान के दौरान उठाया।

इल्हान उमर की पाकिस्तान यात्रा का भी जिक्र

निशिकांत दुबे ने अमेरिकी सांसद इल्हान उमर की पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने इल्हान उमर के कश्मीर को लेकर दिए गए कथित बयानों पर आपत्ति जताई और राहुल गांधी से सवाल किया कि उन्होंने ऐसे अमेरिकी सांसद से मुलाकात क्यों की।

इल्हान उमर अप्रैल 2022 में पाकिस्तान की यात्रा पर गई थीं और इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का भी दौरा किया था। भारत सरकार ने उस समय उनकी यात्रा पर कड़ी आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत के हिस्से पर पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके की उनकी यात्रा देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा मामला है और इस यात्रा की निंदा की थी।

दुबे ने इल्हान उमर को लेकर लगाए गंभीर आरोप

निशिकांत दुबे ने अपने बयान में इल्हान उमर को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा, “इल्हान उमर वो सांसद है जिसने पाकिस्तान जाकर कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताया और कहा कि वहां मुसलमानों का उत्पीड़न हो रहा है, मुसलमानों को मारा जा रहा है और पूरी दुनिया को भारत पर अटैक करना चाहिए। वही इल्हान उमर है।”

इसके बाद दुबे ने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन और एफबीआई इल्हान उमर के परिवार पर कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पता चल रहा है कि वह ऐसे संगठन की सदस्य हैं, जिसमें झूठ बोलकर अमेरिका की नागरिकता ली गई। हालांकि ये सभी बातें निशिकांत दुबे के आरोप और दावे हैं।

दुबे ने आगे कहा कि संभव है कि इल्हान उमर को अमेरिका से डिपोर्ट किया जाए या उन्हें जेल भेजा जाए। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर कहा कि ये कार्रवाई ट्रंप कर रहे हैं, वह नहीं।

इस पूरे बयान के जरिए निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं, अमेरिका में उनकी मुलाकातों और दिल्ली के हालिया प्रदर्शनों को एक साथ जोड़ते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। वहीं, राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब आता है, यह इस राजनीतिक विवाद का अगला अहम हिस्सा होगा।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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