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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की घेराबंदी, लेकिन INDIA गठबंधन के ये दल क्यों हुए दूर?
Rahul Gandhi Meeting: ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर विपक्ष की रणनीति के बीच INDIA गठबंधन के कुछ दलों की दूरी चर्चा में है। जानिए AAP, DMK और BJD का रुख।
Opposition Parties
Rahul Gandhi Meeting: मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने अपनी मुहिम तेज करने की तैयारी की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार शाम INDIA गठबंधन (INDIA Alliance) के नेताओं को चाय पर चर्चा के लिए अपने आवास पर आमंत्रित किया है। बैठक के बाद विपक्षी नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस (Joint Press Conference) भी प्रस्तावित है। हालांकि, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के मुद्दे पर विपक्षी दलों की मांगें भले मिलती-जुलती हों, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व में हो रही इस पहल से कई दलों की दूरी भी चर्चा में है।
इससे पहले सोमवार, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक मार्च निकाला था। इसके बाद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत अलग-अलग दलों के 11 नेताओं ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की। याचिका में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं की भागीदारी पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं ने एक टीम की तरह काम किया और यह अलग-अलग प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक ही आंदोलन है, जिसमें सभी साथ खड़े हैं।
विपक्ष की एकजुटता के बीच कौन-कौन दल दूर?
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR को लेकर विपक्षी दलों के बीच सहमति के संकेत हैं, लेकिन साझा मार्च और कानूनी पहल में सभी दल शामिल नहीं हुए। आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) जैसे दलों की कांग्रेस के साथ राजनीतिक दूरी पहले से चर्चा में रही है। वहीं बीजू जनता दल (BJD) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) भी INDIA गठबंधन की नियमित गतिविधियों से अलग नजर आ रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इन दलों की ओर से भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को रद्द करने की मांग उठाई जाती रही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब मुद्दों पर उनकी मांगें समान हैं, तो विपक्षी दल एक साझा मंच पर साथ क्यों नहीं आ पा रहे हैं? इसके पीछे अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां, कांग्रेस के साथ संबंध और विरोध के तरीकों को लेकर मतभेद अहम हो सकते हैं।
तमिलनाडु में विजय की चुप्पी पर DMK ने उठाए सवाल
तमिलनाडु में कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रही तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय भी इस राजनीतिक घटनाक्रम में चर्चा में हैं। डीएमके ने SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर विजय की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि TVK और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच गुप्त समझौता है। हालांकि, यह डीएमके का राजनीतिक दावा है।
कांग्रेस का कहना है कि TVK INDIA गठबंधन का हिस्सा है। दूसरी ओर, डीएमके ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस के साथ उसके संबंध टूट चुके हैं और वह कांग्रेस के नेतृत्व में होने वाले आंदोलनों में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं है। पार्टी ने यह भी पूछा कि जब कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है, तो वह विजय के रुख पर सवाल क्यों नहीं उठा रही।
तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और डीएमके लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन को लेकर पैदा हुए मतभेदों ने दोनों दलों के रिश्तों में तनाव बढ़ाया है। कांग्रेस के TVK को समर्थन देने के फैसले से डीएमके नाराज है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की कोशिशों के बीच तमिलनाडु का सियासी विवाद भी महत्वपूर्ण हो गया है।
INDIA गठबंधन से दूरी पर AAP ने क्या कहा?
आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले कार्यक्रमों से दूरी को लेकर अपनी अलग दलील दी है। पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा कि AAP SIR के मुद्दे पर सड़क से संसद तक विरोध कर रही है। उन्होंने दिल्ली में पार्टी नेताओं के प्रदर्शन, विधायकों को हिरासत में लिए जाने और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ की गई कार्रवाई का जिक्र किया। संजय सिंह ने दोहराया कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना चाहिए और SIR रद्द किया जाना चाहिए।
AAP नेता दुर्गेश पाठक ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “एक देश, एक प्रोटेस्ट और दो नियम, एक को घर में अरेस्ट और दूसरे को 5 स्टार ट्रीटमेंट।” उनका इशारा राहुल गांधी के मार्च और अलग-अलग प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई के कथित अंतर की ओर था।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और AAP के रिश्तों में तल्खी बढ़ी थी। चुनाव में हार के बाद भी दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। AAP का रुख है कि जहां कांग्रेस नेतृत्व करेगी, वहां वह पार्टी के साथ मंच साझा करने से बचेगी। हालांकि, पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर उसका विरोध जारी है।
BJD कभी साथ, कभी अलग क्यों?
बीजू जनता दल (BJD) ने 6 अक्टूबर को विपक्ष के एक मार्च में भाग लिया था। इसके बाद पार्टी दिल्ली में हुए अन्य कार्यक्रमों से दूर रही। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी भी SIR को लेकर सवाल उठाती रही है।
कांग्रेस ने 6 अक्टूबर के मार्च के बाद कहा था कि प्रदर्शन को निर्वाचन सदन के पास आकाशवाणी भवन के सामने रोक दिया गया था और BJD के सांसद भी इसमें शामिल हुए थे। कांग्रेस ने यह भी कहा था कि कुछ दलों के उस समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ होने के बावजूद वे नैतिक रूप से विपक्ष के मार्च के साथ थे।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची के मुद्दे पर विपक्षी दलों की मांगें कई जगह समान हैं, लेकिन राजनीतिक तालमेल अब भी चुनौती बना हुआ है। राहुल गांधी की चाय बैठक के बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह देखना अहम होगा कि विपक्षी नेता किसी साझा कार्यक्रम पर सहमति बनाते हैं या अलग-अलग दल अपनी रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं।


