TRENDING TAGS :
जब दाखिल करनी थी याचिका तो राहुल गांधी ने क्यों लिखी CJI को चिट्ठी? अभिषेक मनु सिंघवी ने किया खुलासा
Abhishek Singhvi Explains: राहुल गांधी ने एसआईआर और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि सीजेआई से मुलाकात के लिए पत्र क्यों लिखा गया था।
Image Source- Social Media
Abhishek Singhvi Explains: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जा रही याचिका पर अहम जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि विपक्षी दलों की संयुक्त कानूनी पहल है। इस याचिका पर अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। वहीं, राहुल गांधी की ओर से पहले मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का समय मांगने और फिर अदालत में याचिका दाखिल करने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी सिंघवी ने जवाब दिया है।
मुलाकात की चिट्ठी के बाद याचिका क्यों दाखिल की?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर उनसे मुलाकात का समय मांगा था। इसके बाद विपक्षी नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगे कि जब मामला अदालत में ही ले जाना था, तो मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के लिए पत्र क्यों लिखा गया।
आजतक से बातचीत में वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश पर किसी तरह का दबाव बनाने की कोशिश नहीं की गई थी। विपक्षी नेताओं ने केवल मुलाकात के लिए समय मांगा था। इसके बाद जो सलाह मिली, उसके अनुसार अदालत में याचिका दाखिल करने का फैसला किया गया। सिंघवी ने मुख्य न्यायाधीश पर दबाव बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष की कानूनी कार्रवाई को उचित ठहराया।
SIR के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पाबंदियों का मुद्दा भी उठाया
अभिषेक मनु सिंघवी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जा रही याचिका में केवल विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का मुद्दा नहीं उठाया गया है, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों को भी चुनौती दी गई है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और एसआईआर की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों पर न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है।
इस मामले में राहुल गांधी मुख्य याचिकाकर्ता हैं। उनके नाम से जनहित याचिका (Public Interest Litigation) दाखिल की गई है। याचिका में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया गया है। यह विपक्षी दलों की संयुक्त कानूनी पहल है, जिसमें अलग-अलग दलों के नेताओं के नाम शामिल हैं।
प्रदर्शन में लोगों को पैसे देने के आरोपों पर क्या बोले सिंघवी?
विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने और उन्हें प्रदर्शन के लिए पैसे दिए जाने के आरोपों पर भी अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी बात रखी। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का बचाव करते हुए कहा कि लोगों की बड़ी भागीदारी उनके गुस्से और असंतोष की स्वतःस्फूर्त अभिव्यक्ति है।
सिंघवी ने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लोगों को भुगतान किए जाने के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि लोग अपनी मर्जी से विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे और इसके लिए उन्हें कोई पैसा नहीं दिया गया। हालांकि, इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब होगी और मामले का निपटारा कितने समय में हो सकता है, इस बारे में उन्होंने कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई।
लीगल टीम ने दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की
इसी बीच, पैदल मार्च के दौरान राहुल गांधी की कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट के फाइलिंग काउंटर पर पहुंची। उनके वकीलों ने राहुल गांधी की ओर से याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू करवाई। राहुल गांधी समय पर व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट परिसर तक नहीं पहुंच सके थे। ऐसे में उनकी लीगल टीम ने फाइलिंग काउंटर पर पहुंचकर जरूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
इस जनहित याचिका में कुल 11 याचिकाकर्ताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए बेबी और डी राजा के नाम शामिल हैं। याचिका पर विपक्षी दलों के नेताओं के हस्ताक्षर होने की जानकारी भी सामने आई है।
CJI ने क्यों ठुकराया था मुलाकात का अनुरोध?
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) के नेताओं के साथ मुलाकात के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। सीजेआई कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को फैसले और उसके पीछे की वजह की जानकारी दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष जिन मुद्दों पर मुख्य न्यायाधीश से चर्चा करना चाहता था, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन हैं। ऐसे में उन मुद्दों पर नेताओं से अलग से मुलाकात करना उचित नहीं माना गया। सीजेआई कार्यालय की ओर से यह भी बताया गया था कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक तौर पर सरकार के कामकाज में दखल नहीं दे सकता।
विपक्षी नेताओं को यह विकल्प भी बताया गया था कि यदि वे अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक हस्तक्षेप चाहते हैं, तो वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। अब एसआईआर और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदियों से जुड़े मुद्दों को याचिका के जरिए अदालत के सामने उठाया गया है। हालांकि, इस पर सुनवाई कब होगी और सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाएगा, इसे लेकर अभी कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।


