TRENDING TAGS :
'न्यूज चैनल से बात की है क्या...', राहुल की आय से अधिक संपत्ति का मामला उठाया तो क्यों भड़के CJI?
Rahul Gandhi Case: राहुल गांधी की आय से अधिक संपत्ति मामले का सुप्रीम कोर्ट में जिक्र होते ही सीजेआई सूर्यकांत ने वकील से पूछा- क्या न्यूज चैनल से बात की है? अदालत ने मेंशनिंग की लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने का भी निर्देश दिया।
Image Source- Social Media
Rahul Gandhi Case: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान एक वकील को जमकर फटकार लगाई। मामला कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के आरोपों से जुड़ा था। वकील की ओर से इस मामले का जिक्र किए जाने पर सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि क्या उन्होंने इस मामले को लेकर किसी न्यूज चैनल से बात की है।
सीजेआई ने मामले को अदालत में उठाने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस मामले का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें न तो कोई स्पष्ट आधार नजर आ रहा है और न ही कोई स्पष्ट निष्कर्ष दिखाई दे रहा है।
CJI ने पूछा- न्यूज चैनल से बात की है क्या?
लाइव लॉ (Live Law) की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान वकील की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले को लिस्ट करने की मांग की जा रही थी। इसी दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने मामले का उल्लेख किए जाने के तरीके पर सवाल उठाया।
उन्होंने टिप्पणी करते हुए पूछा, “कोई न्यूज चैनल वालों से बात की है क्या इसके लिए?”
सीजेआई की यह टिप्पणी उस समय आई, जब याचिकाकर्ता की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ पुराने मामले का जिक्र करते हुए उसे अदालत के सामने रखने की कोशिश की जा रही थी। वकील ने इसके पीछे राहुल गांधी के हालिया एक कार्यक्रम में दिए गए कथित बयान का हवाला दिया।
राहुल गांधी के ‘200 अधिकारियों’ वाले दावे का भी जिक्र
वकील की ओर से दलील दी गई कि राहुल गांधी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कथित तौर पर कहा था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के करीब 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं।
राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को यह दावा किया था कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और उन्हें सूचनाएं दे रहे हैं। उनके दावे में ईडी, सीबीआई और विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का भी जिक्र था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार की कार्यवाही के दौरान सीजेआई ने इस तरह मामले का उल्लेख किए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि इसका कोई ठोस आधार स्पष्ट नहीं हो रहा है।
मेंशनिंग की लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने का निर्देश
इसी घटनाक्रम के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने एक और महत्वपूर्ण मौखिक निर्देश दिया। उन्होंने अदालत के कर्मचारियों से कहा कि आगे से मामलों के उल्लेख यानी मेंशनिंग (Mentioning) की लाइव स्ट्रीमिंग बंद कर दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट में मेंशनिंग के दौरान वकील किसी मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग रखते हैं। इस प्रक्रिया में वकील अदालत के सामने अपने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए रखने की वजह बताते हैं।
ऐसे में राहुल गांधी से जुड़े मामले के उल्लेख के दौरान सीजेआई की टिप्पणी और इसके बाद मेंशनिंग की लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने का निर्देश चर्चा में आ गया।
राहुल गांधी के खिलाफ मामला क्या है?
राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का यह पुराना मामला कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर (S Vignesh Shishir) की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति है।
इसी आधार पर संबंधित जांच एजेंसियों से मामले की जांच कराने की मांग की गई थी। इसके बाद यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ पीठ तक पहुंचा।
मई 2026 में हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को शिकायत में लगाए गए आरोपों का नियमानुसार सत्यापन करने और मामले में हुई प्रगति की जानकारी देने को कहा था।
जुलाई में हाई कोर्ट ने CBI के हलफनामे पर जताई थी नाराजगी
इसके बाद 20 जुलाई 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताया था। अदालत ने एजेंसी से जांच में हुई प्रगति के बारे में स्पष्ट जानकारी देने वाला नया हलफनामा दाखिल करने को कहा था।
ईडी के संबंध में हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर जांच के दौरान किसी गैरकानूनी गतिविधि से जुड़ी सामग्री सामने आती है तो एजेंसी कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई कर सकती है।
इसके बाद राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
कपिल सिब्बल ने उठाए थे याचिका की पात्रता पर सवाल
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि जिस तरह से मामला आगे बढ़ाया जा रहा है, वह कानून की प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने याचिकाकर्ता की याचिका दाखिल करने की पात्रता और उसकी मंशा पर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया, जहां कोर्ट ने हाई कोर्ट में चल रही आगे की कार्यवाही पर हस्तक्षेप किया।
अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
17 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था। इस पीठ में जस्टिस सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को मामले की आगे की सुनवाई स्थगित करने का निर्देश दिया था। साथ ही सीबीआई, ईडी या किसी अन्य संबंधित जांच एजेंसी को हाई कोर्ट के सामने कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने को कहा था, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से आगे का आदेश न दिया जाए।
अदालत ने उस समय यह सवाल भी उठाया था कि अगर जांच एजेंसियों के पास आरोपों से जुड़ी ठोस सामग्री मौजूद है तो वे अपने वैधानिक अधिकारों के तहत स्वतंत्र रूप से कार्रवाई क्यों नहीं कर रही हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जांच एजेंसी को हर स्थिति में अदालत के निर्देश की जरूरत नहीं होती।
राहुल गांधी को सुनवाई का मौका देने पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस पहलू पर भी सवाल उठाया था कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी को सुनवाई का अवसर दिए बिना ऐसे निर्देश कैसे जारी किए, जिनका सीधा असर उन पर पड़ सकता था। अदालत ने प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन करने की जरूरत पर जोर दिया था। यानी किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा आदेश देने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
अब मंगलवार की सुनवाई में एक बार फिर राहुल गांधी से जुड़े इसी आय से अधिक संपत्ति मामले का उल्लेख हुआ, लेकिन मामले को उठाने के तरीके पर सीजेआई सूर्यकांत ने सवाल कर दिया। उन्होंने स्पष्ट आधार और निष्कर्ष के अभाव की ओर इशारा करते हुए वकील से यह तक पूछ लिया कि क्या उन्होंने इसके लिए किसी न्यूज चैनल से बात की है।
इसके साथ ही मेंशनिंग की लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने का मौखिक निर्देश भी दिया गया। ऐसे में राहुल गांधी से जुड़े पुराने आय से अधिक संपत्ति मामले की कानूनी लड़ाई के बीच मंगलवार की सुप्रीम कोर्ट कार्यवाही का यह हिस्सा खास चर्चा में आ गया है।


