'रामलीला मैदान की महारैली स्थगित करें...', राहुल के कार्यक्रम पर संकट! कारोबारियों ने क्यों लिखा खत?

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले सीटीआई ने राहुल गांधी से 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली स्थगित करने की अपील की है। कारोबारियों ने बाजारों और करोड़ों के कारोबार पर असर की आशंका जताई है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 24 Oct 2026 10:23 AM IST
Rahul Gandhi Rally
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Rahul Gandhi Rally: दिवाली (Diwali) से पहले दिल्ली के कारोबारियों ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बड़ी अपील की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस की रैली (Congress Rally) को स्थगित करने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि दिवाली का पीक सीजन (Peak Season) चल रहा है और इस दौरान रैली होने से दिल्ली के बड़े बाजारों में कारोबार और आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

सीटीआई का कहना है कि रामलीला मैदान के आसपास करीब 20 बड़े होलसेल और रिटेल बाजार (Wholesale and Retail Markets) हैं। ऐसे में रैली के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन (Traffic Diversion), बैरिकेडिंग और मेट्रो स्टेशन बंद होने जैसी व्यवस्थाओं का सीधा असर कारोबार पर पड़ सकता है। कारोबारियों को आशंका है कि इससे करोड़ों रुपये के व्यापार का नुकसान हो सकता है।

राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को लिखे पत्र में रैली स्थगित करने की मांग की है। उनका कहना है कि भैया दूज के बाद इस तरह की रैलियां की जा सकती हैं। भैया दूज 10 नवंबर को है, इसलिए उन्होंने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर तक स्थगित करने की अपील की है। बृजेश गोयल ने अपने पत्र में कहा है, “आपसे विनम्र निवेदन है कि इस रैली को 10 नवंबर तक स्थगित किया जाए।”

10 हजार करोड़ के कारोबार पर असर की आशंका

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि इस समय दिवाली का पीक सीजन चल रहा है। ऐसे में रैली के कारण करीब 10 हजार करोड़ रुपये के कारोबार (Business) पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को रैली करने का ऐलान किया है। इसी को लेकर सीटीआई ने कारोबारियों की चिंता राहुल गांधी के सामने रखी है।

सीटीआई के आकलन के मुताबिक, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और सेंट्रल दिल्ली में लगातार रैलियों और मार्च (March) के कारण अक्टूबर में दिल्ली के कारोबारियों को करीब 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

क्यों सता रही बाजार ठप होने की चिंता?

रामलीला मैदान के करीब 5 किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के कई बड़े होलसेल और रिटेल बाजार मौजूद हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, मोरी गेट, किनारी बाजार, दरीबा, दरियागंज, अजमेरी गेट, जामा मस्जिद, झंडेवालान, करोल बाग, नबी करीम, आजाद मार्केट और लाजपत राय मार्केट जैसे बड़े बाजार शामिल हैं।

कारोबारियों का कहना है कि इन बाजारों से पूरे भारत में सामान जाता है। ऐसे में दिवाली के समय अगर रैली के चलते ट्रैफिक डायवर्जन, बैरिकेडिंग और दूसरी व्यवस्थाओं के कारण रास्ते प्रभावित होते हैं तो बाजारों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

खरीदारों की आवाजाही पर भी असर की चिंता

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने यह भी कहा है कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन रामलीला मैदान के नजदीक हैं। बड़ी संख्या में व्यापारी और खरीदार इन रेलवे स्टेशनों से सीधे बाजारों में खरीदारी के लिए आते हैं।

कारोबारियों की आशंका है कि रैली के दौरान अगर रास्ते बंद किए गए या यातायात व्यवस्था बदली गई तो बाजारों तक पहुंचने वाले व्यापारियों और खरीदारों को परेशानी हो सकती है। इसका सीधा असर दिवाली के कारोबार पर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।

'त्योहार तक बड़ी रैलियां न हों'

बृजेश गोयल ने कहा है कि वह शांतिपूर्ण विरोध (Peaceful Protest) के लोकतांत्रिक अधिकार का पूरा सम्मान करते हैं। उनका कहना है कि दिवाली के कारोबारी सीजन को देखते हुए राजनीतिक दलों को धनतेरस, दिवाली और भैया दूज तक दिल्ली के मुख्य बाजार क्षेत्रों में बड़ी रैलियां नहीं करनी चाहिए।

अब कारोबारियों की नजर इस बात पर है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर क्या फैसला होता है। सीटीआई ने राहुल गांधी से इसे 10 नवंबर यानी भैया दूज तक स्थगित करने की अपील की है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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