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'मेलोनी समझ के तो नहीं...' PM मोदी की विदेश निति पर राहुल-संदीप दीक्षित ने ली ऐसी चुटकी... ठहाकों से गूंजा हॉल
Rahul-Sandeep Dikshit Meloni Remark: दिल्ली के मावलंकर हॉल में कांग्रेस के रचनात्मक सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी और संदीप दीक्षित का मजेदार अंदाज चर्चा में आ गया। पीएम मोदी की विदेश नीति पर तंज कसते हुए दोनों नेताओं ने 'गले मिलने वाली डिप्लोमेसी' पर चुटकी ली, जिसके बाद पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा।
Rahul-Sandeep Dikshit Meloni Remark: राजधानी दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन के दौरान राजनीति का अनोखा रूप दिखा। मंच पर मौजूद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर चुटकी लेते हुए ऐसा माहौल बना दिया कि पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और संदीप दीक्षित ने सरकार पर कटाक्ष करने के लिए अनोखी शैली अपनाई। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार में बैठे लोगों की समझ में यह बात बैठ गई है कि केवल किसी को गले लगा लेना ही कूटनीति का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। इस बात को समझाने के लिए उन्होंने संदीप दीक्षित को अपने पास बुलाया और मंच पर ही उन्हें गले लगा लिया।
गले मिलने वाले एक्ट पर जब हुई मजेदार टिप्पणी
मंच पर जैसे ही राहुल गांधी ने संदीप दीक्षित को गले से लगाया, तभी संदीप दीक्षित ने मुस्कुराते हुए एक ऐसा सवाल पूछ लिया जिसने वहां मौजूद सभी कार्यकर्ताओं को हंसने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने मजाक में पूछा कि कहीं उन्हें गलतफहमी तो नहीं हो गई है। संदीप दीक्षित के इस सवालिया तंज पर पूरा हॉल तालियों और ठहाकों की गूंज से भर गया। राहुल गांधी ने भी हंसते हुए जवाब दिया कि वे अभी इतने आगे तक नहीं बढ़े हैं। दोनों नेताओं का यह अनोखा और मजेदार वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
'पुराना संघ अब खत्म, कॉरपोरेट का बढ़ गया प्रभाव'
हंसी-मजाक के बीच राहुल गांधी ने देश के गंभीर और राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मौजूदा कार्यप्रणाली और सोच पर सवाल उठाए। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि पहले के समय में जो पुराना संघ था, उसका ढांचा और उद्देश्य अब पूरी तरह बदल चुका है। उनके अनुसार, अब वह पुराना संगठन समाप्त हो चुका है और आज का ढांचा केवल देश के बड़े पूंजीपतियों के आर्थिक हितों को पूरा करने का साधन बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और संगठन मिलकर केवल गिने-चुने उद्योगपतियों के लिए नीतियां बनाने में लगे हुए हैं।
अभिव्यक्ति की आजादी और संघ के बचाव का ऐलान
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने लोकतंत्र और विचारों की स्वतंत्रता का बहुत बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने एक बहुत ही बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि कभी देश में संघ के लोगों के बोलने और अपने विचार प्रकट करने के अधिकार को छीनने का प्रयास होगा, तो वे स्वयं उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करेंगे। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर नागरिक और हर विचारधारा को अपनी बात रखने की पूरी आजादी होनी चाहिए। विचार अलग हो सकते हैं, परंतु किसी की आवाज दबाना लोकतंत्र के खिलाफ है। वे हमेशा देश के हर नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
छोटे व्यापारियों के नुकसान और नीतियों पर तीखा वार
देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति और व्यापार पर चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अतीत में छोटे व्यापारी और दुकानदार ही देश की असली ताकत हुआ करते थे। परंतु केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नोटबंदी और जटिल जीएसटी प्रणाली के कारण इस वर्ग को सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि व्यापार में कॉरपोरेट संस्कृति की शुरुआत काफी समय पहले हुई थी और मौजूदा सरकार ने उसे चरम पर पहुंचा दिया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि आज बहुत से लोग आवाज उठाने से घबराते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी लगातार संघर्ष करती रहेगी।


