Satya Niketan हादसा: उस मासूम की क्या गलती थी? जांच कहां पहुंची? 7 मौतों के बाद राहुल गांधी के सवाल

Satya Niketan Building Collapse: 7 मौतों के बाद राहुल गांधी ने सत्य निकेतन हादसे की जांच पर सवाल उठाए। जानिए अर्पित जाज के परिवार ने क्या कहा और अब तक क्या कार्रवाई हुई।

Alakha Singh
Published on: 20 Sept 2026 9:37 PM IST (Updated on: 20 Sept 2026 9:41 PM IST)
Satya Niketan हादसा: उस मासूम की क्या गलती थी? जांच कहां पहुंची? 7 मौतों के बाद राहुल गांधी के सवाल
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Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुई इमारत गिरने की घटना ने राजधानी में छात्र सुरक्षा और अवैध-असुरक्षित PG व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर सरकार और पूरे सिस्टम पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे सवाल किया है- सत्य निकेतन हादसे की जांच आखिर कहां तक पहुंची?

राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मध्य प्रदेश के देवास निवासी छात्र अर्पित जाज के परिवार के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। अर्पित की भी इसी हादसे में मौत हुई थी। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर उस मासूम की क्या गलती थी, जिसे बेहतर भविष्य की तलाश में दिल्ली भेजा गया था।



'अगर सुरक्षित हॉस्टल होते तो बच्चे असुरक्षित PG में क्यों जाते?'

राहुल गांधी ने कहा कि अगर छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल उपलब्ध होते, तो परिवारों को अपने बच्चों को ऐसी जगहों पर रखने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। उन्होंने सवाल किया कि नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं और छात्रों को असुरक्षित PG में रहने की मजबूरी क्यों है?



राहुल गांधी ने सिस्टम की गैर-जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी कीमत सपनों से भरी जिंदगियों और उनके परिवारों को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने छात्र सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

हादसे की जांच में क्या-क्या सामने आया?

जांच में इमारत में हादसे से पहले चल रहे निर्माण और मरम्मत के काम पर खास फोकस किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत के बेसमेंट में पानी जमा हो रहा था। वहां निर्माण मलबा डाला जा रहा था और ग्राउंड फ्लोर की एक दीवार हटाकर दुकान के लिए अतिरिक्त जगह बनाने का काम भी किया जा रहा था।

जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इन बदलावों ने इमारत की संरचनात्मक मजबूती को कितना प्रभावित किया। लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज कुमार ने पुलिस को बताया था कि उसे यह काम महेश गुप्ता की तरफ से दिया गया था।

आरोपियों पर कार्रवाई, PG ऑपरेटर ने किया सरेंडर

मामले में पुलिस ने मकान मालिक परिवार के सदस्यों, लेबर कॉन्ट्रैक्टर और PG संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। फरार चल रहे PG ऑपरेटर शुभम त्यागी ने पटियाला हाउस कोर्ट में सरेंडर किया, जिसके बाद उसे पुलिस रिमांड पर भेजा गया। बाद में कोर्ट ने शुभम त्यागी और सह-आरोपी सुधांशु को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि PG संचालकों ने इमारत को लीज पर लेकर छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल किया था। अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि PG में कितने छात्र रह रहे थे, संचालन के लिए क्या व्यवस्था थी और इमारत में चल रहे निर्माण कार्य की जानकारी संचालकों को थी या नहीं।

MCD के 5 अधिकारी निलंबित, दिल्लीभर में PG की जांच

हादसे के बाद MCD ने दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया। इसके साथ ही दिल्ली में PG और अन्य इमारतों की सुरक्षा जांच शुरू की गई।

एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 2,250 PG का सर्वे किया गया, जिसमें 138 इमारतों में मरम्मत की जरूरत सामने आई और चार इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया।

यह आंकड़ा बताता है कि मामला केवल सत्य निकेतन की एक इमारत तक सीमित नहीं है। राजधानी में छात्रों के रहने की जगहों की सुरक्षा और निगरानी अब बड़े सवाल के तौर पर सामने आई है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी लगाई कड़ी फटकार

सत्य निकेतन मामले की सुनवाई कर रहे दिल्ली हाईकोर्ट ने हादसे को सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि छोटे शहरों से सपने लेकर दिल्ली आए छात्रों की उम्मीदें 'लापरवाह और आपराधिक आचरण' से टूट गईं। अदालत ने यह भी कहा कि राजधानी में हॉस्टल की समस्या कोई नई बात नहीं है और लंबे समय से छात्र इससे जूझ रहे हैं।

मामले में PG और हॉस्टल की सुरक्षा, जरूरी मंजूरियों और नियामक व्यवस्था को लेकर भी अदालत में सवाल उठ रहे हैं। अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है।

सरकार ने भी लिया एक्शन, अब PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने PG, हॉस्टल और सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट और नियमित सेफ्टी सर्टिफिकेशन को अनिवार्य करने की घोषणा की है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि सुरक्षा को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

यानी सत्य निकेतन हादसे के बाद अब असली परीक्षा इस बात की है कि राजधानी के हजारों PG और हॉस्टल में सुरक्षा नियम वास्तव में लागू होते हैं या नहीं।

राहुल गांधी ने पूछे वो सवाल जिनका जवाब बाकी

राहुल गांधी ने अर्पित जाज के परिवार की पीड़ा को सामने रखते हुए सिस्टम से कई सवाल पूछे हैं-

छात्रों के लिए सुरक्षित हॉस्टल पर्याप्त क्यों नहीं हैं?

असुरक्षित PG में रहने की मजबूरी क्यों है?

सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन करता है?

सत्य निकेतन हादसे की जांच कहां पहुंची?

और सात मौतों के लिए अंतिम जवाबदेही कब तय होगी?

सत्य निकेतन की सात मौतों के बाद अब मामला सिर्फ एक इमारत के ढहने का नहीं रह गया है। यह दिल्ली में छात्र आवास, बिल्डिंग सेफ्टी, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुका है। राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को उठाकर सरकार से जवाब मांगा है।

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alakhsingh2025@hotmail.com

Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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