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शशि थरूर को बड़ा धोखा? केसी वेणुगोपाल के लिए राहुल गांधी ने पलटा पूरा गेम, केरल में भारी हड़कंप
केरल में UDF की प्रचंड जीत के बीच क्या शशि थरूर के साथ बड़ा 'धोखा' हुआ है? चर्चा है कि राहुल गांधी ने अपने भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी कर ली है।
केरल की धरती पर पिछले दस सालों का सूखा खत्म करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने केरल में प्रचंड बहुमत की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। लेकिन इस ऐतिहासिक जीत की खुशी से कहीं ज्यादा चर्चा उस 'धोखे' की हो रही है जिसका शिकार शायद शशि थरूर होने वाले हैं। दिल्ली से लेकर तिरुवनंतपुरम तक सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या राहुल गांधी ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने के लिए थरूर का पत्ता साफ कर दिया है?
दक्षिण की सियासत से उठी एक तेज लहर ने राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह झकझोर दिया है। 140 सीटों वाले इस राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट करीब 90 सीटों पर बढ़त के साथ सत्ता की चौखट पार करता दिख रहा है। 10 साल के लंबे और थका देने वाले इंतजार के बाद केरल की जनता ने एक बार फिर 'हाथ' पर भरोसा जताया है। चुनावी रुझान साफ बता रहे हैं कि जनता बदलाव चाहती थी, लेकिन इस जीत के साथ ही कांग्रेस के भीतर एक ऐसा गृहयुद्ध शुरू हो गया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मुख्यमंत्री की कुर्सी एक है और दावेदार अनेक, लेकिन बाजी किसके हाथ लगेगी, इसका इशारा दिल्ली से मिल चुका है।
थरूर का बलिदान या आलाकमान की सोची-समझी रणनीति
शशि थरूर, जिन्हें केरल की जनता और खासकर युवाओं का जबरदस्त समर्थन हासिल है, इस बार हाशिए पर नजर आ रहे हैं। हालांकि थरूर ने खुद को सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री की दौड़ से दूर कर लिया था और कहा था कि वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन अंदरूनी सूत्रों की मानें तो यह उनकी इच्छा नहीं बल्कि आलाकमान का दबाव था। कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाने को तो कहा, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश नहीं किया। अब खबर आ रही है कि राहुल गांधी ने अपने चहेते केसी वेणुगोपाल को केरल का मुख्यमंत्री बनाने का मन बना लिया है, जिसे थरूर के समर्थकों द्वारा एक बड़े धोखे के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल के 'खास' वेणुगोपाल की ताजपोशी की तैयारी
केसी वेणुगोपाल वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव हैं, राहुल गांधी के सबसे करीबी और वफादार माने जाते हैं। केरल प्रदेश अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने जिस तरह से वेणुगोपाल के मुख्यमंत्री बनने की संभावना को खारिज नहीं किया है, उसने इस आग में घी डालने का काम किया है। यह साफ संकेत है कि आलाकमान वेणुगोपाल को ही इस पद के लिए पहली प्राथमिकता दे रहा है। वेणुगोपाल का कद दिल्ली के दरबार में बहुत बड़ा है और राहुल गांधी उन पर अटूट भरोसा करते हैं। ऐसे में थरूर जैसे जमीनी और लोकप्रिय नेता को दरकिनार करना पार्टी के भीतर एक नई चिंगारी को जन्म दे सकता है।
सस्पेंस और दावेदारों की लंबी फेहरिस्त
केरल कांग्रेस में इस समय 'प्रॉब्लम ऑफ प्लेंटी' वाली स्थिति बनी हुई है। वेणुगोपाल और थरूर के अलावा वीडी सतीशन और रमेश चेन्नीथला जैसे दिग्गज नेता भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से यही कहा है कि चुनाव 'सामूहिक नेतृत्व' में लड़ा गया है और किसी एक व्यक्ति को प्रोजेक्ट नहीं किया जाएगा, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। ऐसा लग रहा है कि सामूहिक नेतृत्व सिर्फ एक ढाल है ताकि वेणुगोपाल का रास्ता साफ किया जा सके। अब देखना यह होगा कि विधायक दल की बैठक में क्या सचमुच लोकतंत्र दिखेगा या फिर दिल्ली का आदेश ही केरल की किस्मत का फैसला करेगा।


