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राहुल गांधी की SIR पर सुप्रीम कोर्ट में 10 बड़ी मांगें…चुनाव आयोग से EVM तक उठाए सवाल!
Rahul Gandhi SIR PIL: राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने SIR पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 10 तरह की राहत मांगी है। चुनाव आयोग से रिकॉर्ड, मतदाता सूची और EVM के ऑडिट से लेकर सभी राज्यों में SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है।
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Rahul Gandhi SIR PIL: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक (INDIA Bloc) के अन्य नेताओं ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में SIR पर तुरंत रोक लगाने के साथ चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है। इस याचिका में SIR और चुनाव आयोग (Election Commission) के फैसलों से जुड़े कुल 10 तरह की राहत मांगी गई है।
हालांकि, यहां यह साफ समझना जरूरी है कि ये 10 मांगें याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई हैं। इन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश या आदेश नहीं माना जा सकता है।
राहुल गांधी के कोर्ट पहुंचने से पहले दाखिल हुई याचिका
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर यह याचिका ‘राहुल गांधी बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया’ (Rahul Gandhi vs Election Commission of India) के नाम से सूचीबद्ध है। याचिका के मुताबिक, कांग्रेस की कानूनी टीम ने राहुल गांधी के कोर्ट पहुंचने से करीब एक से दो घंटे पहले ही इसे दाखिल कर दिया था।
बताया गया है कि राहुल गांधी की कानूनी टीम शाम 4:30 बजे की समय सीमा से पहले कोर्ट नहीं पहुंच सकी थी। ऐसे में वकील एस प्रसन्ना ने याचिका दाखिल की।
इसके बाद राहुल गांधी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ इंडिया ब्लॉक के मार्च (INDIA Bloc March) में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। इस मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी शामिल थे।
पहली मांग- SIR का पूरा रिकॉर्ड सौंपे चुनाव आयोग
याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग SIR से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करे। इसमें SIR से जुड़ी पूरी फाइलें, समझौते, बैठकों के मिनट्स और आपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।
इसके अलावा 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित ECINET और ERONET के एक्सेस लॉग भी पेश करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करना और अनुच्छेद 324 को लागू करना है।
दूसरी मांग- SIR के फैसलों की कानूनी वैधता की जांच
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह जांच करने की मांग की गई है कि SIR से जुड़े विवादित फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 (Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023), संविधान के अनुच्छेद 324 और धारा 18 के प्रावधानों के अनुरूप हैं या नहीं।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों और सिद्धांतों, जिसमें शेषन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 1995 का भी हवाला दिया गया है, के आधार पर इन फैसलों की वैधता जांचने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि अगर कोई फैसला उचित कानूनी अधिकार के बिना लिया गया है तो उसे रद्द किया जाए।
तीसरी मांग- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
याचिका में मतदाता सूची (Voter List) तैयार करने और उसमें बदलाव करने से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) की धारा 32 के तहत भी कार्रवाई की जाए।
चौथी मांग- शिकायतों पर दर्ज हो फैसला
याचिका में चुनाव आयोग को मौजूदा याचिका और उससे संबंधित शिकायतों पर फैसला करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि SIR से जुड़े हर फैसले को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के मुताबिक लिया जाए और उसका उचित रिकॉर्ड रखा जाए।
पांचवीं मांग- ऑनलाइन फॉर्म 6 के नियमों का पालन
याचिका में ऑनलाइन फॉर्म 6 (Form 6) को लेकर भी राहत मांगी गई है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, ऑनलाइन फॉर्म 6 को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 (Registration of Electors Rules, 1960) के अनुसार ही रखा जाना चाहिए।
याचिका में मांग की गई है कि औपचारिक प्रक्रिया अपनाए बिना निर्धारित फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया जाए और तय नियमों से अलग जाकर ऑनलाइन फॉर्म 6 में परिवर्तन न हो।
छठी मांग- मतदाता सूची और EVM का स्वतंत्र ऑडिट
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति (Independent Committee) बनाने की मांग की है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और जाने-माने नागरिकों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस समिति से SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और उसमें किए गए बदलावों की जांच कराने की मांग की गई है। इसके अलावा ECINET और ERONET के डेटाबेस एक्सेस की भी जांच की मांग है।
याचिका में ईवीएम (EVM) के तकनीकी डिजाइन, आर्किटेक्चर, नीतियों और प्रक्रियाओं की भी स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की गई है।
सातवीं मांग- हटाए गए नामों की वजह और सूची सार्वजनिक हो
याचिका में SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथ-वार सूची प्रकाशित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही हर नाम हटाए जाने की वजह बताने और हटाए गए मतदाताओं को लिंग और उम्र के आधार पर वर्गीकृत करने की मांग भी रखी गई है।
इसके अलावा योग्य मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
आठवीं मांग- बिना नोटिस और सुनवाई के नाम न हटे
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम कानूनी नोटिस और सुनवाई का मौका दिए बिना मतदाता सूची से न हटाया जाए।
इसके साथ ही पंजाब और अन्य चुनाव वाले राज्यों में योग्य लोगों को निर्धारित अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने की अनुमति देने की मांग भी की गई है।
नौवीं मांग- सभी राज्यों में SIR पर अंतरिम रोक
याचिका में सबसे अहम मांगों में से एक सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाए गए मुद्दों पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक SIR की प्रक्रिया को रोका जाए।
याचिका के मुताबिक, यह योग्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
दसवीं मांग- कोर्ट उचित समझे तो दूसरी राहत भी दे
याचिका में आखिरी मांग के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से कहा गया है कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए चुनावी प्रक्रिया और हर योग्य नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए जो भी अन्य आदेश उचित समझा जाए, वह जारी किया जाए।
इस तरह राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं की ओर से दाखिल याचिका में SIR के रिकॉर्ड से लेकर मतदाता सूची, फॉर्म 6, EVM, अधिकारियों की जवाबदेही और SIR पर अंतरिम रोक तक कई मुद्दों को उठाया गया है।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि याचिका में रखी गई ये 10 मांगें याचिकाकर्ताओं की मांगें हैं, सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी किए गए निर्देश नहीं हैं। इन मांगों पर अदालत क्या रुख अपनाती है और आगे क्या आदेश देती है, यह न्यायिक प्रक्रिया के दौरान तय होगा।


