खुल गया गलत अध्याय, 'गद्दार' शब्द पर हाय-हाय! राहुल गांधी का बयान बना आफत, इस 'चूक' का भरना पड़ेगा बड़ा खामियाजा?

Rahul Gandhi statement controversy: पूरा विवाद अब राहुल गांधी की नेता प्रतिपक्ष के रूप में भूमिका पर आ गया है। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी अब भी उस छात्र की तरह व्यवहार करते हैं जो परीक्षा में वही लिखता है जिसकी उसने तैयारी की हो, चाहे सवाल कुछ भी हो।

Priya Singh Bisen
Published on: 5 Feb 2026 11:13 AM IST (Updated on: 5 Feb 2026 11:13 AM IST)
Rahul Gandhi statement controversy
X

Rahul Gandhi statement controversy (PHOTO: SOCIAL MEDIA)

Rahul Gandhi statement controversy: लोकसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक बयान अब देश की राजनीति में नई बहस का बड़ा कारण बन गया है। चीन, राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकार की नीतियों पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी द्वारा प्रयोग किए गए शब्दों और किताबों के संदर्भ को लेकर सत्तापक्ष ने उन पर तगड़ा हमला बोला है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की टिप्पणी को न केवल "अपरिपक्व" बताया, बल्कि इसे संसद की गरिमा के खिलाफ भी करार दिया।

'गद्दार मित्र' शब्द पर क्यों भड़क उठा सत्तापक्ष?

लोकसभा में बहस के दौरान राहुल गांधी ने एक केंद्रीय मंत्री को संबोधित करते हुए "माय ट्रेटर फ्रेंड" यानी "मेरे गद्दार मित्र" शब्द का प्रयोग किया। बस फिर क्या था... यही शब्द 'सियासी विवाद' की जड़ बन गया। इसे लेकर भाजपा का कहना है कि किसी मंत्री, सांसद और शहीद परिवार से जुड़े व्यक्ति के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद निंदनीय है।

भाजपा नेताओं ने सवाल खड़े किये कि क्या यही विपक्ष की राजनीति का स्तर है? क्या किसी भी नेता प्रतिपक्ष से इस तरह की भाषा की उम्मीद की जाती है? इस मामले पर अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा गया कि विपक्ष में रहते हुए भी गरिमा और शब्दों की मर्यादा किस प्रकार निभाई जाती है, यह उन्होंने बेहद सलीके से सिखाया था।

किताबों के हवाले और 'पीली किताब' वाला विवाद

राहुल गांधी ने सदन में एक किताब लहराते हुए चीन और भारत की सैन्य झड़पों का 'जिक्र' किया। हालांकि, भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी ने न तो किताब को ठीक से पढ़ा और न ही तथ्यों को सही तरीके से पेश किया। निशिकांत दुबे ने बड़ा पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी जिन किताबों का हवाला दे रहे हैं, वे न तो प्रमाणिक हैं और न ही ऐतिहासिक संदर्भों को सही ढंग से पेश करती हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा "ऐसी किताबें तो कभी सड़क किनारे पीली जिल्द में मिला करती थीं।"

इतना ही नहीं, भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि जिन लेखकों और व्यक्तियों के नाम राहुल गांधी या उनके समर्थक ले रहे हैं, उनकी लिखी कई बातें खुद गांधी परिवार की छवि पर सवाल खड़े करती हैं।

गलवान या डोकलाम? भूगोल पर भी उठे सवाल

बहस के दौरान राहुल गांधी द्वारा गलवान घाटी की जगह बार-बार डोकलाम का जिक्र किए जाने पर भी सवाल खड़े हुए। सत्तापक्ष का आरोप है कि चीन के साथ जिस सैन्य झड़प की बात की जा रही थी, वह गलवान में हुई थी, न कि डोकलाम में। भाजपा नेताओं ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को कम से कम इतना "होमवर्क" तो करके आना चाहिए कि घटना कहाँ हुई थी। इसे राहुल गांधी की "तैयारी की कमी" और "गंभीरता के अभाव" से भी जोड़ा गया।

लोकसभा में न बोलने देने पर भी बहस

इस पूरे विवाद के बीच यह मुद्दा भी उठा कि राहुल गांधी को लोकसभा में अपनी बात पूरी रखने का अवसर नहीं मिला। इसे लेकर कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के नियमों के अंतर्गत स्पीकर का फैसला आखिरी होता है, लेकिन यदि विपक्ष को लगता है कि उसकी आवाज दबाई जा रही है, तो वह संसद के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकता है।

यहीं से एक और तंज सामने आया कि क्या लोकसभा का मंच इसलिए चुना गया क्योंकि वहां कही गई बातों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती? भाजपा नेताओं ने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करिए, मुकदमों से डर क्यों?

राहुल गांधी की भूमिका पर भी खड़े हुए गंभीर सवाल

पूरा विवाद अब राहुल गांधी की नेता प्रतिपक्ष के रूप में भूमिका पर आ गया है। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी अब भी उस छात्र की तरह व्यवहार करते हैं जो परीक्षा में वही लिखता है जिसकी उसने तैयारी की हो, चाहे सवाल कुछ भी हो। इतना ही नहीं... बल्कि यह भी आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी को संसद की प्रक्रिया, संबोधन की मर्यादा और पद की गंभीरता का अभी तक पूरा एहसास नहीं हुआ है। यहां तक कहा गया कि उनके अपने सांसद भी कई बार उनकी बातों पर गंभीरता नहीं दिखाते।

राजनीति में क्या पड़ेगा प्रभाव ?

इस मामले को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की टिप्पणियां राहुल गांधी और कांग्रेस को राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर और कमजोर कर सकती हैं। सत्तापक्ष पहले से ही कांग्रेस पर "गैर-जिम्मेदार विपक्ष" होने का आरोप लगाता रहा है, और यह विवाद उस नैरेटिव को और मजबूत कर सकता है।

अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस इस पूरे विवाद पर सफाई देते हैं या रणनीति में बदलाव करते हैं। लेकिन इतना तय है कि 'गद्दार' शब्द और किताबों की बहस ने संसद की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।

Priya Singh Bisen

Priya Singh Bisen

Mail ID - Priyasinghbisen96@gmail.com

Content Writer

Next Story