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कागजों में चुनाव से बाहर, नतीजों में सरपंच! राजस्थान में आखिर हुआ क्या?
Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान के बाड़मेर में नामांकन खारिज होने के बावजूद पूराराम सरपंच का चुनाव जीत गए। 1786 वोट मिलने के बाद चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। प्रशासन ने जांच शुरू की।
Nomination Rejected Candidate
Rajasthan Panchayat Election: चुनाव में जीतने के लिए उम्मीदवार को नामांकन (Nomination) भरना पड़ता है, दस्तावेजों की जांच (Document Verification) से गुजरना होता है और फिर वोटरों का भरोसा जीतना होता है। लेकिन राजस्थान (Rajasthan) के बाड़मेर (Barmer) में पंचायत चुनाव (Panchayat Election) का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां कहानी का गणित ही उलट गया। यहां एक उम्मीदवार का नामांकन जांच के बाद खारिज (Nomination Rejected) हो गया, लेकिन उनका नाम बैलेट पेपर (Ballot Paper) पर बना रहा और वोटों की गिनती के बाद उन्हें विजेता भी घोषित कर दिया गया। अब सवाल यह है कि जब चुनाव लड़ने की मंजूरी ही नहीं थी, तो उम्मीदवार वोटिंग की दौड़ में शामिल कैसे रहे?
नामांकन खारिज होने के बाद भी बैलेट पेपर पर नाम
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाड़मेर के गडरा रोड ग्राम पंचायत (Gadra Road Gram Panchayat) में सरपंच (Sarpanch) पद के लिए पूराराम ने नामांकन दाखिल किया था। 23 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेजों की जांच की गई। इस दौरान उनके आवेदन में कमियां मिलने के बाद नामांकन खारिज कर दिया गया।
नामांकन रद्द किए गए उम्मीदवारों की सूची (Rejected Nomination List) भी सार्वजनिक की गई थी। इसमें पूराराम का नाम शामिल था। बताया गया कि उनके दस्तावेजों में आपराधिक इतिहास (Criminal History) और दोषसिद्धि (Conviction) से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी पूरी नहीं थी। इस आधार पर नामांकन पत्र को अधूरा माना गया।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने चुनावी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। नामांकन खारिज होने के बावजूद पूराराम का नाम और चुनाव चिह्न (Election Symbol) बैलेट पेपर से नहीं हटे। चुनाव हुए, वोट पड़े और नतीजे भी घोषित हो गए। यानी कागजों पर नामांकन खारिज था, लेकिन मतदान के मैदान में उम्मीदवार मौजूद रहे।
1786 वोट मिले, 187 वोटों से दर्ज की जीत
मतगणना (Vote Counting) के बाद पूराराम को कुल 1786 वोट मिले। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी कुलदीप सिंह को 187 वोटों के अंतर से हरा दिया। इस नतीजे के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। जिस उम्मीदवार का नामांकन रद्द किए जाने की जानकारी सूची में मौजूद थी, वही सरपंच पद का चुनाव जीत गया।
मामले ने मंगलवार को उस समय तूल पकड़ा, जब सोशल मीडिया (Social Media) पर नामांकन खारिज किए गए उम्मीदवारों की सूची वायरल (Viral) होने लगी। इसके बाद सवाल उठने लगे कि अगर पूराराम का नामांकन पहले ही रद्द कर दिया गया था, तो उनका नाम बैलेट पेपर पर कैसे रह गया? क्या नामांकन खारिज होने के बाद सूची अपडेट नहीं हुई या चुनावी प्रक्रिया के दौरान कहीं चूक हुई? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
हारने वाले उम्मीदवार के परिवार ने उठाए सवाल
चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे कुलदीप सिंह के भाई भरत सिंह ने चुनाव अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नामांकन खारिज किए गए उम्मीदवारों की सूची नोटिस बोर्ड (Notice Board) पर लगाई गई थी और उसमें पूराराम का नाम साफ तौर पर दर्ज था।
भरत सिंह के मुताबिक, इसके बावजूद पूराराम को चुनाव लड़ने की अनुमति मिलना या तो जानबूझकर की गई कार्रवाई का मामला हो सकता है या फिर अधिकारियों की लापरवाही (Administrative Negligence) का। उन्होंने चुनाव परिणाम रद्द करने की मांग को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी (District Election Officer) के पास शिकायत भी की है।
दूसरी ओर, पूराराम ने अपने निर्वाचन को वैध बताया है। उनका कहना है कि विरोधी बेवजह अफवाह फैला रहे हैं। पूराराम के मुताबिक, पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) ने उन्हें आधिकारिक तौर पर चुनाव चिह्न दिया था और उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की है। ऐसे में उनका निर्वाचन सही है।
प्रशासन ने जांच के आदेश दिए
मामले पर बाड़मेर की जिला कलेक्टर चिन्मयी गोपाल ने कहा है कि जांच जारी है। वहीं एसडीओ सुरेश कुमार ने बताया कि रिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer) से पूरी जानकारी मांगी गई है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यदि पूराराम का नामांकन खारिज हो गया था, तो उनका नाम चुनाव प्रक्रिया में आगे कैसे बना रहा।
फिलहाल इस मामले में किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है और न ही चुनाव परिणाम रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह तकनीकी गलती (Technical Error) थी, प्रशासनिक लापरवाही या फिर कोई दूसरी वजह।
राजस्थान के इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनावी प्रक्रिया में नामांकन की जांच से लेकर बैलेट पेपर तैयार करने और नतीजे घोषित करने तक कई चरण होते हैं। ऐसे में अगर नामांकन खारिज होने के बाद भी उम्मीदवार चुनाव जीत जाता है, तो गलती आखिर किस स्तर पर हुई? अब सबकी नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर है।


