TRENDING TAGS :
Junk Food Ban: राजस्थान में स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड पर रोक, 4 हफ्ते में न्यूट्रिशन कमिटी बनाना होगा
Junk Food Ban: राजस्थान हाई कोर्ट ने स्कूल परिसरों और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाई है। 4 हफ्ते में फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमिटी और 8 हफ्ते में न्यूट्रिशन मेन्यू बोर्ड बनाना होगा।
Rajasthan Junk Food Ban (Image Credit-Social Media)
जयपुर। बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य, पोषण और सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूरे राज्य के सभी स्कूलों की कैंटीन के साथ-साथ स्कूल परिसरों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड (HFSS - हाई फैट, शुगर और सॉल्ट) की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम, अस्वस्थ खानपान और उससे होने वाली जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यह दिशा-निर्देश जारी किए।
अदालत के प्रमुख दिशा-निर्देश और समय-सीमा
50 मीटर के दायरे में बिक्री प्रतिबंधित: स्कूल परिसर और उसके चारों तरफ 50 मीटर के दायरे में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड स्नैक्स, अत्यधिक मीठे और तले-भुने जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी।
4 हफ्ते में 'फूड सेफ्टी कमिटी' का गठन: राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 4 सप्ताह के भीतर एक 'स्कूल फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमिटी' (School Food Safety and Nutrition Committee) गठित करने का आदेश दिया गया है। यह कमिटी कैंटीन और स्कूल के आसपास मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी करेगी।
8 हफ्ते में न्यूट्रिशन मेन्यू बोर्ड लगाना अनिवार्य: सभी स्कूलों को 8 सप्ताह के अंदर अपनी कैंटीन में विस्तृत 'मेन्यू बोर्ड' लगाना होगा, जिसमें बिकने वाले प्रत्येक खाद्य पदार्थ की कैलोरी, प्रयुक्त सामग्री और पोषण संबंधी (Nutritional Information) स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित करनी होगी।
प्रशासनिक निगरानी और मासिक निरीक्षण: आदेशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारियों (DM) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) को नियमित रूप से हर महीने औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
'Gen Z, Gen Alpha और Gen Beta को 2047 के लिए तैयार करना जरूरी'
अदालत ने अपने आदेश में देश के भविष्य और भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर जोर देते हुए टिप्पणी की:
"एक तरफ देश Gen Z, Gen Alpha और Gen Beta को वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' का नेतृत्व करने के लिए तैयार कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, इन भावी पीढ़ियों को तैयार करने वाले हमारे बुनियादी संस्थान—विशेष रूप से गांवों के सरकारी स्कूल—लगातार व्यवस्थागत कमियों और अस्वस्थ माहौल से जूझ रहे हैं। बच्चों के पोषण और सेहत से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।"
FSSAI की सख्ती: कंपनियों ने भ्रामक विज्ञापनों और दावों वाले लेबल हटाए
नई दिल्ली (PTI)। देश के शीर्ष खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने जानकारी दी है कि उसके सख्त नोटिस के बाद प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने उत्पादों से भ्रामक दावे वापस ले लिए हैं।
प्रमुख कंपनियां शामिल: मोंडेलीज इंडिया (Mondelez India) और एमवे इंडिया (Amway India) सहित कई दिग्गज फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) ने नियामक के नोटिस के बाद सुधारात्मक कदम उठाए हैं।
पैकेजिंग में बदलाव: कंपनियों ने अपने हेल्थ ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड उत्पादों पर 'एनर्जी', 'इम्यूनिटी' या अत्यधिक पोषण से जुड़े असत्यापित और भ्रामक दावों वाले लेबल्स को हटाकर पैकेजिंग में आवश्यक बदलाव कर लिए हैं।


