राहुल गांधी को राजनाथ सिंह की दो टूक, बोले- पहले अपने इतिहास का जवाब दे कांग्रेस

Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए चुनाव आयोग, मतदाता सूची, आपातकाल और 1984 की हिंसा का जिक्र किया।

Rajan Kashyap
Published on: 16 Oct 2026 11:25 AM IST
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Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष युवाओं को बरगलाने और देश की संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के नाम पर संस्थाओं को बदनाम करने के बजाय कांग्रेस और राहुल गांधी को जनमत का सम्मान करना चाहिए। राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर भारत में बांग्लादेश जैसी हिंसक स्थिति पैदा करने की मंशा रखने का आरोप भी लगाया।

आपातकाल और 1984 की हिंसा का किया जिक्र

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यकाल में ऐसे कई घटनाक्रम हुए, जिन पर देश के लोकतांत्रिक इतिहास में गंभीर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने आपातकाल, 1984 में सिखों के खिलाफ हुई हिंसा और अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने के बाद तत्कालीन सरकार को समर्थन देने जैसे मुद्दों को उठाकर कांग्रेस को घेरा।

रक्षा मंत्री के मुताबिक, कांग्रेस को लोकतंत्र और संवैधानिक मर्यादाओं पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास का भी जवाब देना चाहिए।

चुनाव आयोग और मतदाता पहचान पत्र को लेकर कांग्रेस पर निशाना

राजनाथ सिंह ने चुनाव आयोग की नियुक्तियों और चुनावी प्रक्रिया के इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने नवीन चावला की नियुक्ति का उल्लेख किया, जिन पर तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने कांग्रेस के प्रति पक्षपात के आरोप लगाए थे। हालांकि, इन आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। बाद में नवीन चावला मुख्य चुनाव आयुक्त बने।

रक्षा मंत्री ने मतदाता पहचान पत्र और चुनावी व्यवस्था में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, लेकिन उसे अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण भी प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और फर्जी मतदाताओं को लेकर उठाए गए सवालों पर भी आपत्ति जताई।

उनके मुताबिक, पर्याप्त प्रमाण के बिना किसी आम नागरिक को फर्जी मतदाता बताना उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भाजपा ने हमेशा संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखा है। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों पर असहमति जताना अलग बात है, लेकिन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते समय तथ्यों और सबूतों का ध्यान रखना जरूरी है।

राजीव गांधी के निधन के बाद हुए चुनाव का भी किया जिक्र

राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में किसी प्रत्याशी की मृत्यु होने पर संबंधित सीट का चुनाव स्थगित किया जाता है, लेकिन राजीव गांधी की मृत्यु के बाद चुनावी कार्यक्रम में व्यापक बदलाव किया गया था।

यह घटनाक्रम 1991 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव आयोग ने शेष चरणों के मतदान को स्थगित कर दिया था और आगे की तारीखों में बदलाव किया था। राजनाथ सिंह ने इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए।

डिजिटल लेनदेन, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियां गिनाईं

रक्षा मंत्री ने केंद्र सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी बनकर उभरा है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की सफलताओं और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती क्षमताओं को भी रेखांकित किया।

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न देशों से मिले सम्मानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ी है। उनके मुताबिक, देश की रक्षा क्षमताओं का विस्तार हुआ है और भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार देश की प्रगति, सुरक्षा और विकास के लिए काम कर रही है।

विपक्ष को जनमत का सम्मान करने की नसीहत

राजनाथ सिंह ने विपक्ष को लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि युवाओं को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बरगलाना उचित नहीं है। बांग्लादेश में हुए घटनाक्रमों का संदर्भ देते हुए उन्होंने विपक्ष पर भारत में भी वैसी ही हिंसक स्थिति पैदा करने की मंशा रखने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का समर्थन नहीं किया जा सकता।

राजनाथ सिंह के बयान से स्पष्ट है कि भाजपा ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष के विरोध को राजनीतिक मुद्दा बनाया है। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तथा चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।

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Reporter - LucknowRajan.kashyap47@gmail.com
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